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Monday, July 15, 2013

नाम यूँ ही बदनाम है बेचारी शराब का ---


शराब एक ऐसी चीज़ है जिस पर सदियों से शायरों ने अनगिनत शे'र लिखे हैं , गीतकारों ने गीत लिखे हैं , जो उच्च समाज में प्रतिष्ठा का प्रतीक होती है , मध्यम वर्ग में जश्न का जरिया और निम्न वर्ग में जिंदगी बर्बाद करने का साधन। इसका सेवन भी आदि काल से होता आया है। आदि मानव से लेकर आधुनिक युग तक विभिन्न रूपों में शराब का उत्पादन और सेवन होता आया है। कहीं शराब को खराब माना जाता है , कहीं शराब और शबाब साथ मिलकर नवाबों की शान बनती है। लेकिन ख़राबी शराब में होती है या शराबी में , यह हमेशा बहस का विषय बना रहता है।

बात बहुत पुरानी है। तब हमने नया नया जॉब ज्वाइन किया था। एक दिन डॉक्टर्स के किसी कार्यक्रम का निमंत्रण मिला जिसमे कार्यक्रम के बाद कॉकटेल डिनर का आयोजन था। उन दिनों में कॉकटेल शब्द को बहुत बड़ा माना जाता था। ज़ाहिर है , शराब का सेवन अपेक्षाकृत इतना कॉमन नहीं था जितना आजकल हो गया है। इसलिए इस तरह के निमंत्रण को पाना एक सौभाग्य माना जाता था। हमने जब अपने एक वरिष्ठ साथी डॉक्टर को इसके बारे में बताया तो उनकी बांछें खिल गई और हम भी खुश हो गए कि चलिए कोई साथ तो मिला जो साकी का भी काम करेगा।   

कार्यक्रम में हम तो तन्मयता से भाषण सुन रहे थे और हमारे साथी बार बार घूमकर यह देख रहे थे कि शराब खुली कि नहीं। क्योंकि देर हो चुकी थी और लोगों को बेचैनी होने लगी थी , इसलिए अंतत: भाषण ख़त्म होने से थोड़ा पहले कॉकटेल काउंटर खुल गया। यह पता चलते ही हमारे साथी महाशय दौड़ पड़े और जब तक हम वहां पहुंचे तब तक वो जाने कितने पैग उदरस्थ कर चुके थे। जब हमने जाकर देखा तो पाया कि कुछ लोग उन्हें घेर कर खड़े थे और सब अपना अपना गिलास उन्हें सौंप रहे थे और वो भी गटागट बॉटम अप किये जा रहे थे। यह पागलपन देखकर हम तो सकते में आ गए। हमने उन्हें बड़ी मुश्किल से सब से दूर किया , लेकिन तब तक जो होना था वो हो चुका था। आखिर किसी तरह हमने जल्दी जल्दी कुछ खाया और उनकी सुध ली तो उन्हें चारों खाने चित पाया। अंत में उनके स्कूटर को अन्दर पार्क कर उन्हें एक ऑटो में डालकर रात के बारह बजे हमने उन्हें उनके घरवालों को सौंपा और अपने घर की ओर रवाना हुए।     

ऐसा नहीं है कि शराब ऐसी खराब चीज़ है कि इसका सेवन पाप समझा जाये। दरअसल ख़राबी पीने वाले के व्यवहार में होती है। इस घटना से कई बातें उजागर होती हैं जो शराब का सेवन करने वालों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इनके बारे में और शराब से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में अगली पोस्ट में। फ़िलहाल आप इस लतीफे का आनंद लीजिये : 

एक आदमी डॉक्टर के पास गया और बोला -- डॉ साहब मेरे पेट में दर्द रहता है।
डॉक्टर ने उसका मुआयना किया और कहा -- क्या आप शराब पीते हैं ?
रोगी बोला -- जी सच बोलूँगा , वो तो मैं पीता हूँ।
डॉक्टर -- देखिये शराब पीने से आपका ज़िगर ख़राब हो गया है और पेट में पानी भी भर गया है।
रोगी -- लेकिन डॉक्टर साहब पानी तो मैं पीता ही नहीं फिर पेट में पानी कैसे ! अच्छा याद आया शुरू में जब मैंने पीना शुरू किया था तब पानी मिलाकर पीता था लेकिन चढ़ जाती थी। तब से मैंने पानी पीना ही छोड़ दिया।
डॉक्टर -- लेकिन अब आपको छोड़नी पड़ेगी।
रोगी -- डॉक्टर साहब , प्लीज छोड़ने के लिए मत कहिये। हाँ , कम कर सकता हूँ।
डॉक्टर -- ठीक है , रोज कितना पीते हो ?
रोगी -- जी झूठ नहीं बोलूँगा , बस चार पीता हूँ।
डॉक्टर -- चलिए आज से तीन कर दीजिये , फिर दो सप्ताह बाद दो और --
रोगी -- ठीक है डॉक्टर साहब , लेकिन दो से कम मत कीजियेगा क्योंकि पूरी बोतल एक पैग में आ ही नहीं सकती।

नोट : असली शराबी वो होता है जो बेड टी की जगह चाय का कप नहीं बल्कि पैग लेकर बैठता है।