Wednesday, November 18, 2015

डॉक्टर और रोगी के बिगड़ते संबंधों पर कुछ पैरोडी हँसिकाएँ : एक नया प्रयोग।

प्रस्तुत हैं , डॉक्टर और रोगी के बिगड़ते संबंधों पर कुछ पैरोडी  हँसिकाएँ : एक नया प्रयोग।  

१)
अय डाक्टर , चल दवा लिख !
झूठा बिल , फर्ज़ी मेडिकल बना ! 
पी एम रिपोर्ट बदल ,
अजन्मी बेटी का गला दबा ! 
अपनी फीस ले ,
अय डाक्टर , चल झूठा बिल बना ! 

२) 

मैं चाहे ये खाऊँ , मैं चाहे वो खाऊँ 
मैं चाहे जिम छोडूं ,
मैं चाहे दारू के अड्डे पे जाऊं , 
चाहे वेट बढ़े , चाहे पेट बढ़े ,
डाक्टर को दिखाऊँ ना दिखाऊँ , 
मेरी मर्ज़ी ! 

३)

अस्पताल मे 
छोड़ गया बेटा , मुझे 
हाय अकेला छोड़ गया ! 
सब देखते रहे तमाशा ,
मैं सड़क पे घायल ,
पड़ा पड़ा दम तोड़ गया ! 

४)

तू मेरा ईश्वर है , 
तू मेरा रक्षक है ! 
पर फीस मांगी तो  
तू पूरा भक्षक है ! 

५) 

होटल मे टिप् दे देंगे पूरे एक हज़ार , 
जुए मे हम भले ही हज़ारों जाएं हार , 
पर दो चार दिन गर पड़ जाएं बीमार,
तो तो तो तेरी तो ,
अय डाक्टर , चल दवा खिला ,
इंजेक्शन लगा , पर बिल ना बना ! 





10 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, अमर शहीद कर्नल संतोष को हार्दिक श्रद्धांजलि , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. क्या किया जाय डॉ.भी अनेक प्रकार के होते हैं और मरीज़ों की तो बात ही क्या !

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  3. डॉक्टरों का पाला तो सभी से पड़ता है. सुंदर व्यंग.

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  4. बहुत बढ़िया व्यंग्य किया हैआपने!

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  5. डॉक्टर को सेकंड गॉड कहते हैं लेकिन नादान, मासूम, नासमझ लोग कहाँ समझते है यह बात ...
    बहुत सही ..

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    1. अक्सर डॉक्टर्स को रोगी ही भृष्ट बनाते हैं।

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  6. अय डाक्टर . ले अपनी फीस ..तू भी खुश ..मैं भी राज़ी ....चल अब एक व्यंग सुना ..हो जाये मेरा भी भला ...:-)
    शुभकामनायें जी .

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    1. हा हा हा। हो सब का भला।

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