Sunday, May 26, 2013

बॉलर बने बैट्टर, बल्लेबाज सट्टेबाज हो गए हैं ---


कुछ समय से समय न मिल पाने के कारण कुछ लिख नहीं पा रहा था। लेकिन कविता का कीड़ा रह रह कर कुलबुला रहा था। लिखे बिना कवियों के कवि मन को कहाँ राहत होती है। समसामयिक विषयों पर लिखना कवियों की आदत होती है। हर विषय को हंसी में ढालना हमारी आदत है। लेकिन चाहकर भी इस गंभीर विषय पर हास्य उत्पन्न करना हमें अपने बल बूते से बाहर लगा। इसलिए व्यंग ही बन पाया :     



अभी अभी पता चला है ,
क्रिकेट कोचिंग में एक नया कोर्स खुला है।

पी जी डी एम् ऍफ़ ---- यानि ,
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैच फिक्सिंग।

इसमें क्रिकेट के स्नातक ही ले सकते हैं एडमिशन ,
विशेषकर जिनका टीम इंडिया में न हो सेलेक्शन।


यहाँ नहीं सिखाते कि छक्का चौका कैसे मारते हैं ,
ये बताते हैं कि एक जीता हुआ मैच कैसे हारते हैं !


इस कोर्स में दाल चेयरमेन की भी नहीं गलती है ,
क्योंकि हुकुमत तो यहाँ दामाद की ही चलती है।

ये वी आई पी गैलरी में करते हैं सोशल मिक्सिंग ,
पर होटल के बंद कमरे में करते है मैच फिक्सिंग।

एक स्वर्गिक ईशारे ने जब मैच का रुख मोड़ दिया,
तब से सचिन ने स्वर्ग की ओर देखना छोड़ दिया।

कभी रुमाल का काम होता था पसीना पोंछना
अब होता है मैच को प्लेट पर रखकर सोंपना।

हम मैच भर जपते रहे राम नाम की माला,
पर माला ने मैच का ही राम नाम कर डाला।  

बॉक्स में बैठे भाई लोग बरबस मुस्कराने लगे ,
मैदान में जब एक बॉलर बेबात खुजलाने लगे।

चंदू को नंदू का क्रिकेटर बेटा पसंद आ गया,
हट्टा कट्टा छै फुटा वधु के मन को भी भा गया।

चंदू बेटी का मैच फिक्स करने नंदू के घर आया ,
नंदू पुत्र खुद ही मुंबई में मैच फिक्स कर आया।

क्रिकेट के गुरु और चेले ऐसे हमराज़ हो गए हैं, 
बॉलर बने बैट्टर, बल्लेबाज सट्टेबाज हो गए हैं।  


40 comments:

  1. हाल चाल बेहाल किया सब..

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  2. डॉ साहब, जरा नए कोर्स में एडमिशन रुल ढीला कर दीजिये तो बात बने - रिश्तेदार कहाँ जायेंगे ?- बहुत करारा व्यंग

    latest post: बादल तू जल्दी आना रे!
    latest postअनुभूति : विविधा

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  3. IPL पर करारा व्यंग, बेहतरीन सुंदर प्रस्तुति ,,,डा0 साहब बधाई

    RECENT POST : बेटियाँ,

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  4. तब से सचिन ने स्वर्ग की ओर देखना छोड़ दिया

    बेहतरीन

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  5. ये वी आई पी गैलरी में करते हैं सोशल मिक्सिंग ,
    पर होटल के बंद कमरे में करते है मैच फिक्सिंग।
    bahut Sundar . Kya kahen yahaan pablic bhee to kam paagal nahee hai !

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  6. करारा व्यंग्य सारी सच्चाई खोल गया

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  7. अभी अभी पता चला है ,
    क्रिकेट कोचिंग में एक नया कोर्स खुला है।

    पी जी डी एम् ऍफ़ ---- यानि ,
    पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैच फिक्सिंग।

    हा हा हा....फ़िर तो TMBC ताऊ माल बटोरो कोर्स की सीटे ही खाली रह जायेंगी?:)

    रामराम.

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    1. ताऊ अपनी कालेज में भी यह कोर्स शुरू करवा ही दीजिये समयानुकूल रहेगा :)

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    2. ताऊ कॉलेज ऑफ़ त्म्ब्क ( TMBC ) अब निशाने पर आ चुका है। :)

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    3. डाक्टर साहब TMBC निशाने पर आ गया तो क्या? ताऊओं के पास हर चीज का तोड (काट) मौजूद रहता है.:)

      रामराम.

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    4. बेशक ! ताऊ का लोहा तो अब अख़बार वाले भी मान चुके हैं। :)
      http://www.gyandarpan.com/2013/05/blog-post_26.html

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    5. अब ये अखबार वाले कहां से पीछे पड गये? देखते हैं जाकर, लगता है इन्हें भी मेनेज करना पडेगा.:(

      रामराम.

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    6. हा हा हा.... वहां तो हमारे साथ साथ आपकी भी रपट लिखी हुई है.:)

      रामराम.

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  8. इसमें क्रिकेट के स्नातक ही ले सकते हैं एडमिशन ,
    विशेषकर जिनका टीम इंडिया में न हो सेलेक्शन।


    यहाँ नहीं सिखाते कि छक्का चौका कैसे मारते हैं ,
    ये बताते हैं कि एक जीता हुआ मैच कैसे हारते हैं !

    इसकी तो महारत हासिल है हमें? सीखाने की क्या जरूरत? हम तो सीखकर ही पैदा हुये हैं, इसीलिये दांत बिंदू बिंदू से हो गये हैं.:)

    रामराम.

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  9. क्रिकेट के गुरु और चेले ऐसे हमराज़ हो गए हैं,
    बॉलर बने बैट्टर, बल्लेबाज सट्टेबाज हो गए हैं।

    अंत में आपने गजब का लिखा है, आपकी सोच और लेखनी को नमन, बहुत ही जोरदार.

    रामराम.

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  10. पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैच फिक्सिंग...

    गज़ब का डिप्लोमा रहने वाला है ...
    पर दाखिला क्रिकेटरों और नेताओं के बच्चों को ही मिलने वाला है ...
    जल्दी ही लोगों की जेबो पर चलने वाली है तलवार
    हम तो कहते हैं मिल कर करें
    इस खेल का ही बहिष्कार ...

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    1. फिर तो कितनो की रोजी , कितनो की रोटी और कितनो की लंगोटी मारी जाएगी। :)

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  11. शानदार व्यंग्य

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  12. एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है...

    एक तौलिया आदमी को श्रीसंत बना देता है...


    जय हिंद...

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  13. पी जी डी एम् ऍफ़ ---- यानि ,
    पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैच फिक्सिंग।

    अभी अभी पता चला है कि यह कोर्स ताऊ के कालेज में भी उपलब्ध है ! सुना है अधिकतर सीटें भर चुकी हैं ...
    क्या होगा क्रिकेट का ??

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    1. जब क्रिकेट पर कब्ज़ा भाइयों और ताउओं का होगा , तो और क्या होगा ! :)

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    2. कब्जा तो पौराणिक काल से रहा है, यह अलग बात है कि अब मिडीया की वजह से जनता को मालूम पडने लग गया है.

      रामराम.

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  14. मुझे तो तुलसीदास जी की राम चरित मानस की वो लाइन याद आती है इस प्रकरण से - उमा दारू जोषित की नाई सबही नचावत राम गोसांई. क्रिकेटर्स तो कठपुतलियाँ हैं बड़े बड़े सट्टेबाजों के हाथ की. यही हैं जो पी जी डी एम् ऍफ़ कोर्स चलाने वाली यूनिवर्सिटीज के मालिक हैं.

    भगवान सबका कल्याण करें.

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  15. यहाँ नहीं सिखाते कि छक्का चौका कैसे मारते हैं ,
    ये बताते हैं कि एक जीता हुआ मैच कैसे हारते हैं !

    सब को बोल्ड कर दिया आपने ......

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  16. ये वी आई पी गैलरी में करते हैं सोशल मिक्सिंग ,
    पर होटल के बंद कमरे में करते है मैच फिक्सिंग

    बहुत ही सटीक सामयिक रचना ...

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  17. आज की ब्लॉग बुलेटिन फ़िर से नक्सली हमला... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  18. श्रीसंत आपके फ़िस्किंग स्कूल में पढ़ा होता तो फ़ंसता तो पक्का न!

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  19. क्या बात है कमाल करते हैं आप भी ...
    व्यंग लिखने में तो माहिर हो गए हैं आप ....
    फिक्सिंग के सारे क्लू दे दिए हमें तो पता ही नहीं था सर खुजाने का मतलब .....

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  20. सत्य वचन यहाँ तो सरकार भी फिक्स है आईपीएल भी तो सरकारी लोग ही चला रहें हैं

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  21. जोरदार व्यंग्य .... अब तो हाल ये है कि बैट को चार बार ठोका ज़मीन पर तो लगेगा कि सट्टा लगा है ....

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  22. डॉ साहब आपने बातों ही बातों में बड़े गंभीर मसाले को बड़ी खूबसूरती से कह दिया क्या कहूँ एक कप शाम की चाय उधारी रही फिक्सिग के नाम *************

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  23. सार्थक रचना |

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  24. यह रचना तो बहुत भाई
    जन्मजात कवि हैं डॉ भाई!

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  25. अच्छा हुआ आपने एक कोर्स छोड़ दिया......मैच फिक्सिंग वाला बडा कोर्स आप और ताउ के बड़े-बड़े कॉलेज में ही चलना चाहिए.....मेरे छोटे से फॉस्ट लर्निंग सेंटर में स्पॉट फिक्सिंग वाला कोर्स शुरु होगा...होगा क्या विज्ञापन देने शुरु कर दिए है...कुछ स्टूडेंट आ गए हैं...सिखाने का जिम्मा फिलहाल मेरे पास ही है....अगर स्टूडेंट ज्यादा आ गए तो ...सरकारी कर्मचारियों को रख लूंगा...। फिक्सिंग के माहिर खिलाड़ी सरकारी दफ्तरखानों में भी खाते-पीते कहीं भी ..किसी कोने में भी मिल जाएंगे..एक ढूंढे हजार मिलेंगे की तर्ज पर.....

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    1. सरकारी दफ्तर में लोग बस चाय पानी पर गुजारा करते हैं। :)

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    2. हाहाहाहा सरकारी दफ्तर में पिलाई जाने वाली चाय और पानी ही इतना महंगा होता है कई बार कि पिलाने वाले का कलेजा फूंक जाता है...वैसे इस चाय पानी की बदौलत की लोगो के सिर घी की कड़ाई में हो जाते हैं...

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  26. waah!!! kya baat hai bahut khub...:)

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