Thursday, July 5, 2012

जिंदगी वास्तव में जिन्दादिली का नाम है -- डॉक्टर्स भी क्या खूब जीया करते हैं !


इन्सान यदि काम ही काम करता रहे तो जीवन नीरस होने लगता है .यह बात डॉक्टर्स पर भी लागु होती है . इसीलिए अस्पताल के साथ जुड़े मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष मार्च के महीने में एक फेस्टिवल मनाया जाता है . ३-४ दिन तक चलने वाले इस कल्चरल फेस्टिवल के अंतिम दिन एक विशेष कार्यक्रम रखा जाता है --टीचर्स कार्निवल . इस रंगारंग कार्यक्रम में कॉलेज और अस्पताल के शिक्षक और वरिष्ठ डॉक्टर्स मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं और दर्शक / श्रोता होते हैं छात्र . यह अपने आप में एक अद्भुत और निराला अनुभव होता है .


हम भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं . पहले बैठकर संगीत , नृत्य और नाटकों का मज़ा लेते हैं . यहाँ -- एम् एस और प्रिंसिपल के साथ .
.


हॉल छात्रों और स्टाफ से खचाखच भरा होता है .

कार्यक्रम की शुरुआत में एक सुन्दर नवयौवना का मनमोहक नृत्य देखकर सब आत्म विभोर हो गए .


इन युवा डॉक्टर्स ने सुन्दर सालसा कर समां बांध दिया .



रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा सामूहिक नृत्य .


भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है की खड़े होने को भी जगह मुश्किल से ही मिलती है .


नृत्य अब जोरों पर है .


गायनी डिपार्टमेंट की नाटिका हमेशा सबको मदहोश करने वाली होती है .


घूंघट में डॉक्टर्स ! अपनी सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए .


लेकिन जल्दी ही पर्दा हट जाता है .


बच्चों के डॉक्टर्स ने किया भांगड़ा !


एक बार जो मस्ती छाई तो पूरा डिपार्टमेंट डांस करने लगा .


बारी तो हमारी भी आई , हास्य कविता सुनाने की . यह गंभीर मुद्रा इस बात की सूचक है की हास्य उत्पन्न करना एक बेहद गंभीर मामला है . साथ ही , यह तूफ़ान आने से पहले की शांति दर्शा रही है .
अब हमने क्या सुनाया --यह तो राज़ ही रह जायेगा क्योंकि अभी तक मूवी क्लिप्स नहीं बन पाए हैं .


55 comments:

  1. वाह .... रंगमंच का अपना ही आनंद है .... क्या सुनाया ? कविता पोस्ट कर दीजिये ... मूवी क्लिप्स बाद में देख लेंगे :):)

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    1. संगीता जी , देखिये सब आप के साथ हमारे पीछे पड़ गए हैं . अज़ी क्लिप तो तब देखेंगे जब बन कर आएगी . पढने में वो बात कहाँ जो सुनने में आती है . :)

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  2. कोई बात नहीं जी, हम क्लिप्स का इन्तेज़ार करेंगे.

    रंगारंग कार्यकर्म.

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  3. वाह डॉक्टर्स की ज़िंददिली देख कर आनंद आ गया ....!!अब आपकी कविता का इंतेज़ार करते हैं ...!!

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  4. अच्छी पोस्ट!
    शेअर करने के लिए आभार!
    जिन्दगी वाकई में जिन्दादिली का ही नाम है!

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  5. समां बाँध दिया आपने तो. संगीता जी की बात मानिये, कविता पोस्ट कर दीजिए जब तक मूवी क्लिप्स आते हैं.

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    1. शिखा जी , हमारी कवितायेँ तो आप सब पढ़ चुकी हैं . बात तो स्टेज परफोर्मेंस की है . वैसे बच्चों को हँसाना बड़ा आसान होता है . :)

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  6. यह है शुक्रवार की खबर ।

    उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।

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  7. वाह सुन्दर चित्रमयी प्रस्तुति…………कविता तो लगा ही देते क्लिप्स हम बाद मे देख लेते।

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  8. @@ मूवी क्लिप्स नहीं बन पाए हैं .
    कोई नहीं इन्तजार ही सही .....! बन जायेंगे तो बता दीजियेगा ...!

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    1. ठीक है , अभी नृत्य तस्वीरों का आनंद तो लीजिये भाई जी . :)

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  9. अद्भुत नजारा होगा. आपके कैमरे ने हमें दिखा दिया.
    कविता तो पढ़वाना बनता ही है जो आपने पढ़ा

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  10. नाच गाने की झलकियाँ तो दिखा दी. अब तो कविता सुनानी बाकी रही.

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  11. किसने कहा कि डॉक्टर सदा ही गम्भीर होते हैं, आज तो सबको मस्ती में देख ही लिया..

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  12. डॉक्टर हमेशा गंभीर नहीं रहते , बल्कि वे तो अपनी सहज बातों से और व्यवहार से मरीज का आधा कष्ट वैसे ही काम कर देते हैं. आपके चित्रों ने मन मोह लिया है. वैसे साल के कुछ दिन ऐसे ही गुजार लेने से बैटरी चार्ज हो जाती है.

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    1. जी सही कहा . all work and no play , makes jack a dull boy .

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  13. प्रोग्राम जोरदार रहा ...
    क्लिप का इंतज़ार रहेगा !

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  14. सभी संगीता आंटी की बात से सहमत है आप कविता पोस्ट कर ही दीजिये माना की सुनने का मज़ा पढ़ने मेन कम आयेगा मगर वो कहते है आ something इस better then nothing :)इसलिए पोस्ट कर ही दीजिये।

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  15. मैं सोच रहा हूँ कि मार्च के फैस्टिवल की याद अब जाकर सावन में क्यूँ आई?
    कुछ भी हो मुझे इससे क्या! जब दिखी तभी मजा लेते हैं
    आपने जीवंत देखा हम तश्वीरों में झांकते हैं
    आपको डाक्टर कम कवि ही जानते हैं
    अपनी बिरादरी का मानते हैं
    आपने बताया वरना हम क्या जान पाते कि डाक्टर्स
    क्या खूब मजा लेते हैं!:)

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  16. डॉक्टरों की आनन्दी वृत्ति देख कर बहुत अच्छा लगा .मरीज़ों के साथ रह कर मन कैसा हो जाता होगा उसके उपचार का काम इन्हीं के द्वारा.अब आपकी कविता का इन्तज़ार है!

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  17. ----सभी डाक्टर्स आनंदी प्रवृत्ति के एवं बहु-विधायी प्रकृति व बहुमुखी प्रतिभा के होते हैं....
    ----मरीजों के साथ रह कर मन खराब कभी नहीं होता ..अपितु अपने कर्तव्य बोध से प्रसन्न ही होता है.....यह है ही जिंदादिली का प्रोफेशन ...

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    1. सही कहा डॉ गुप्ता .
      यह पोस्ट डॉक्टर्स के इसी रूप को दर्शाती है .

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  18. भई डॉक्टर्स भी इंसान होते हैं. इनकी सर्विस का कोई समय नही. आधी रात को इमरजेंसी सर्विस भी देनी पडती है. आश्चर्य होता है कई बार क्या गहरी नींद में होने पर या फिल्म देखते समय उठाने पर इन्हें गुस्सा या झुंझलाहट नही होती? ऐसे सांस्क्रतिक कार्यक्रम एक ताजगी से भर देते हैं.प्रतिभाएं भी निखर के आती हैं. मेरी एक डॉक्टर दोस्त बहुत प्यारा गाती हैं.पिक्निक्स की बहुत शौक़ीन.ये सब ताजगी देते हैं जरूरी है. फोटोज अच्छे लगे. आपकी कविता सुनना चाहेंगे जी बिलकुल :)

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    1. जी ज़रूर . जल्दी ही लोड करता हूँ .
      पता चला है आपकी तबियत ठीक नहीं . बस जल्दी से ठीक हो जाइये .

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  19. डॉक्टर्स की ज़िन्दगी भी बहुत तनाव-भरी होती है.ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम दिल में नया जोश भर देते हैं.शुक्र है कि नई पीढ़ी इसमें रूचि रख रही है.

    ...आपकी उपस्थिति ऐसे कार्यक्रम में अनिवार्य है !

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  20. जब सब इतना कह रहे है तो कविता पोस्ट कर ही दीजिये...रंगारंग कार्यकर्म रहा

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    खूब मौज हो रही है।

    सावधान सावधान सावधान
    सावधान रहिए



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ सावधान: एक खतरनाक सफ़र♥


    ♥ शुभकामनाएं ♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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  22. डॉक्टर्स की ज़िंददिली देख कर आनंद आ गया.

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  23. इतना भी कम मजेदार नहीं.

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  24. हम तो पहले से ही मान बैठे हैं -सालसा एक नृत्य भी है मैंने तो एक खाद्य पदार्थ ही जाना था

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  25. सचित्र रंगारंग कार्यक्रम का मजा हमने भी ले लिया सच में डाक्टर्स पेशे में भी कमाल करते हैं और सांस्कृतिक कार्य्रक्रम में भी धमाल करते हैं बहुत अच्छा लगा देख कर आपकी कविता की क्लिपिंग का इन्तजार रहेगा

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    1. जी सही कहा . डॉक्टर्स की टेलेंट सब जगह काम आती है . हम तो लड़कियों के डांस देखकर हैरान थे .

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  26. Charcha -Manch par ki tippani

    जीवन में कितना सुने, देखें दर्द अथाह |
    इक डाक्टर की सदा ही, बड़ी कठिन है राह |
    बड़ी कठिन है राह, मर्ज से रहते लड़ते |
    दवा मरीज की दाह, ताप में समय रगड़ते |
    हक है मित्र दराल, लूटिये हंसी ख़ुशी दिल |
    करूँ थैंक्स टू आल, बढ़े न ज्यादा यह बिल ||

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    1. जी शुक्रिया .हमारे साथ हँसते रहिये , बिल कभी दिल नहीं तोड़ेगा . :)

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    2. वाह रविकर जी,तुस्सी कमाल कित्ता !

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  27. बढिया कार्यक्रम है।

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  28. बड़ी सुन्दर तस्वीरें हैं..रंगारंग कार्यक्रम की

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  29. aise prograame kayi dinon tak dil-o-dimag ko fresh air dete rahte hain. aise programmes aap jaise field wale logon ke liye bahut anivaary hain.

    padh kar hi aanand aaya....agar vahan hote to kitna maja aata soch kar hi khush ho rahe hain.

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  30. वाह ये मस्ती देखकर याद आ रहा है कि जाने कितने दिन हो गए जब इस तरह की मस्ती की हो...क्या करें लोगो की व्यवस्ता औऱ दूसरों शहरों में दोस्तों का पलायन कर जाना इस तरह की मस्ती हल्ले की काफी याद दिलाता है....जबरदस्त फोटोग्राफस सर ..

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  31. This comment has been removed by the author.

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    1. डॉक्टर साहिब, यह मानव मन भी विचित्र प्रतीत होता है... किन्तु यदि मस्तिष्क रुपी कंप्यूटर पर आते विचारों का सार देखें तो उनकी प्रकृति मुख्यतः तीन श्रेणी में बंटती दिखाई देती हैं :- सुखदायी, दुखदायी और निर्गुण (न्यूट्रल)...
      और आजकल यह माना जाता है कि मस्तिष्क में यदि देर तक दुखदायी सोच आये (डिप्रेशन हो) तो वो व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है... इस लिए सहन शक्ति बढाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है (भले ही वो डॉक्टर हो अथवा मजदूर), सुखदायी (मनोरंजक) और न्यूट्रल विचारों को भी मन में लाने का प्रयास करना... और कह सकते हैं, जैसे कहावत भी है, "पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं", हर व्यक्ति का मानसिक रुझान लगभग निश्चित रहता है... किन्तु यह काल पर भी निर्भर रहता है कि कब कोई डाकू भी महर्षि बन जाए!!!... आदि आदि...

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    2. जे सी जी , आपसे अक्षरश : सहमत हूँ . हालाँकि न्यूट्रल विचारों का मतलब है , हम विरक्ति की ओर जा रहे हैं जो एक समय के बाद आना स्वाभाविक भी है .

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    3. JCJuly 07, 2012 12:23 PM
      तभी तो कहते हैं "ये बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुवे"!
      यह प्राकृतिक है कि समय समय पर भले-बुरे अनुभव करते करते एक तपस्या सी हो जाती है, और ऐसे अनुभवी व्यक्ति का दिल मजबूत हो जाता है, उस कि सहन शक्ति बढ़ जाती है...

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  32. लगातार काम के बीच मनोरंजन के ये पल फिर से तरोताजा कर देते हैं ...
    अच्छी तस्वीरें !

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  33. वाह डॉ साहब !मेडीफेस्ट की बात ही निराली होती है .ये कार्यक्रम पब्लिक के लिए भी ओपन हों तो नजदीकी और लोकप्रियता बढे डॉ लोगों की .

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  34. आपकी कवितायें पढने में बहुत मजा आता है लेकिन आज आपकी परफार्मेंस सुनने में जो मजा आया, बता नहीं सकता।
    बहुत छोटी वीडियो क्लिप मिली और उसमें जितना श्रोताओं का शोर था, उतना ही मेरा मन भी उत्साह से चीखने का करने लगा।
    पूरे वीडियो के लिंक्स का इंतजार है

    प्रणाम

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  35. कमाल है भाई . अभी तो मैंने डाली भी नहीं , आपने कहाँ सुन ली !

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  36. तस्वीरें जब इतनी सुन्दर लग रही हैं तो निश्चित ही क्लिप्स तो जोरदार होंगी.इंतज़ार रहेगा.

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    1. इंतजार ख़त्म ही हुआ समझिये .

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