Monday, September 13, 2010

अस्पताल ----

अस्पताल

जहाँ ,
आशा निराशा की
आँख मिचौली में
झूलती है जिंदगी ।


कभी,
भंवर से निकल
साहिल से मिल
झूमती है जिंदगी ।


कभी,
मंझधार में फंसी
डगमगाती कश्ती सी
लगती है जिंदगी ।


जहाँ ,
उम्मीदों की हज़ारों
ख्वाहिशें दिल में लिए
मचलती है जिंदगी ।

वहां ,
सफ़ेद कोट में
इंसानी रब्ब के
लबों से निकलते
चन्द लफ़्ज़ों में
बसती है जिंदगी ।

35 comments:

  1. जिन्दगी को लेकर
    आपने बहुत सुन्दर शब्द चित्र प्रस्तुत किये हैं!

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  2. अस्पताल
    जहाँ
    सफ़ेद कोट में
    इंसानी रबों के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी
    ...अस्पताल की सुंदर परिभाषा गढ़ती अनमोल कविता के लिए बधाई।

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  3. एक डॊक्टर के हृदय से निकली सुंदर कविता :)

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  4. सटीक बानगी है अस्पताल की ।

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  5. सफ़ेद कोट में
    इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।
    बिलकुल सही कहा। उमदा रचना। बधाई।

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  6. जहाँ ,
    उम्मीदों की हज़ारों
    ख्वाहिशें दिल में लिए
    मचलती है जिंदगी ।

    वहां ,
    सफ़ेद कोट में
    इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।

    सही कहा.बधाई!!

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  7. बहुत उम्दा पोस्ट के लिए आभार.
    धन्यवाद.
    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  8. बिलकुल सच ...सही खाका खींचा है अस्पताल का ...

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  9. अस्पताल और उसके आस-पास के वातावरण को जस्टीफाई करती मेडिकली फिट रचना :-)

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  10. एक मरीज़ के लिए तो अस्पताल किसी मंदिर से कम नही होता...आपने अच्छा वर्णन किया है.!हिंदी दिवस की शुभकामनायें!!!!

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  11. वहां ,
    सफ़ेद कोट में
    इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।
    एकदम सही बात है , बहुत सुन्दर रचना , आज ही एक खबर पढी अखबार में की किसतरह एक नाउम्मीद इंसान जिसके सर के अन्दर सरिया घुसा पडा था, एम्स के डाक्टरों ने नई जिन्दगी बख्स दी !

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  12. अले वाह, अस्पताल को लेकर कित्ती प्यारी रचना ...बधाई.

    _____________
    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है...

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  13. इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।
    ......
    बहुत खूब !!!!!!!!

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  14. हिन्दी दिवस पर आपको बहुत-बहुत बधाई।

    http://sudhirraghav.blogspot.com/

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  15. बड़ी खूबसूरती से शब्द दिए...सुन्दर भाव..बधाई.

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  16. इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।
    ......
    बहुत खूब !!!!!!!!
    सच ही कहा अपने हमारे लिए तो डाक्टर भगवन ही होता है हम लोग तो ये भी मानते हैं की भगवन हर जगह नहीं पहुँच सकता इसलिए लोगों की जान बचने को डाक्टर के शरीर में बसता है
    इसी सच को स्वीकारते हुए ये पोस्ट अच्छी लगी

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  17. सही कहा रचना जी । डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होता है । इसीलिए डॉक्टर के मूंह से निकले शब्दों पर मरीज़ की जिंदगी टिकी होती है ।

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  18. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, हिंदी ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  19. क्षमा प्रार्थी हूँ, प्राचीन ज्ञानी किन्तु भगवान् को कण-कण में, हर प्राणी में bhi देख पाए, जो navgrahon ki apni-apni bhinn-bhinn prakriti ke kaaran एक दूसरे से bhinn prateet hote हैं...

    shayad kaliyug में, agyanta apne charam seema में hone के kaaran, जीवन-daayi shristikarta, ajanme aur amrit naadbindu, shakti के dhwani roop से utpann मानव roop में sabse nikat swaroop, doctor, के shabdon में hi uske hone का 'aam aadmi' को ahsaas hota है (athva kisi 'neta' aadi ki chaploosi karte hue use भगवान् pukara jaata hai!)...

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  20. सफ़ेद कोट में
    इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।
    बिलकुल सही तस्वीर खींची है, अस्पताल की...डॉक्टर तो मरीज के लिए ख़ुदा समान ही होता है.
    सुन्दर रचना..

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  21. बहुत सुन्दर रचना बधाई.

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  22. .. sundar va prasanshaneey rachanaa, badhaai !!!

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  23. आपकी रचना दिल से निकली है...अप्रतिम है...भावपूर्ण है...बधाई...
    नीरज

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  24. डर रही थी .....
    कि कहीं १७ के बाद के अध्यायों का सार तो नहीं पढना पड़ेगा इस बार फिर ......
    डरते डरते द्वार खोला तो बड़ी प्यारी सी नज़्म दिखी ....
    किसी सफ़ेद कोट के नीचे खुदा सा दिल रखने वाले इंसान की....
    जिनके लफ़्ज़ों से ही कई मुर्दा मरीज़ जी उठते होंगें ....
    .
    दुआ है ...उनकी सोच में कभी तब्दीली न आये .....!!

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  25. हस्पताल की काफी सटीक कविताई परिभाषा गढ़ दी सर... बधाई...

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  26. वाह! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने ! हर एक शब्द में गहराई है और इस लाजवाब रचना के लिए बहुत बहुत बधाई!

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  27. वहां ,
    सफ़ेद कोट में
    इंसानी रब्ब के
    लबों से निकलते
    चन्द लफ़्ज़ों में
    बसती है जिंदगी ।

    सुन्दर और भावपूर्ण रचना

    .

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  28. डॉक्टर कोटनीस की अमर कहानी याद आ गई...

    जय हिंद...

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  29. आपकी दुआ के लिए हम भी दुआ करते हैं हरकीरत जी ।
    धन्यवाद ।

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  30. anubhooti ke dharatal par khade ho likhi sundar rachna!
    subhkamnayen!

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