मौका हो , दस्तूर हो और लॉन्ग वीकेंड , तो कुछ ऐसा करना चाहिए जो २-३ दिन में ही एक जिंदगी जीने काअहसास दिलाये । जैसा कि पिछले चार भाग में पढ़ा, हमने इन तीनों का पूरा फायदा उठाते हुए, पांच सूत्रीयकार्यक्रम इस प्रकार बनाया :
१) लॉन्ग ड्राईव -- एक स्ट्रेस बस्टर।
२) चिल्ला फोरेस्ट रेस्ट हाउस -- दो दिन का रेस्ट -- बेस्ट रेजुवेनेटिंग एक्सपीरियंस ।
३) हर की पौड़ी , हरिद्वार -- आत्म शुद्धि का अवसर प्रदान करता एक अनुभव ।
४) जंगल सफ़ारी -- जंगली जानवरों से सीखने का अनुभव ।
और अंतिम भाग में , एक ऐसा अनुभव जिसे आम के आम और गुठलियों के दाम कहा जा सकता है ।
सुबह नाश्ते के बाद , तैयार हैं वापसी के सफ़र के लिए ।
हरिद्वार से रुड़की तक सड़क अभी ज्यादा अच्छी नहीं है । चौड़ा करने का काम अभी चल रहा है । इसलिए यहाँ काड्राईविंग एक्सपीरियंस ज्यादा अच्छा नहीं हो सकता था । एक घंटा ड्राईव करके ही चाय की बड़ी तलब होने लगी थी। आते समय हरिद्वार से पहले , हमें नज़र आ गया था -- बाबा रामदेव का आश्रम --पतंजलि योगपीठ । बड़ीउत्सुकता थी यह जानने की कि वहां है क्या । इसलिए वहां पहुंचते ही हमने गाड़ी मोड़ दी प्रवेश द्वार की ओर ।इसके बारे में कुछ नहीं पता था । इसलिए गेट पर गार्ड से पूछा -- अन्दर जा सकते हैं । उसने भी आँखें फाड़ कर कहा- जी जाईये , आपके लिए ही है । मैंने पूछा --बाबा रामदेव जी हैं अन्दर । बोला - जी वो तो पता नहीं ।
खैर, पार्किंग में गाड़ी पार्क कर , हमने अपना कैमरा उठाया और निकल पड़े आश्रम की सैर पर ।
दरअसल जो भव्य भवन सामने नज़र आ रहा था , वह बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ( अस्पताल ) की ओ पीडी है ।
ओ पी डी के चारों ओर बने हैं , अलग अलग वार्ड्स ।
यहाँ ट्रॉली और व्हील चेयर पर कई मरीज़ देखे जो वर्षों के बीमार लग रहे थे । ज़ाहिर था , पूर्ण रूप से निराश होकरयहाँ आए थे , मन में उम्मीद लिए कि शायद बाबा ही कोई चमत्कार कर दे । एक रोगी से बात करने की कोशिशकरने पर यही लगा कि यह होपिंग अगेंस्ट होप का मामला ज्यादा था ।
आखिर दुनिया में चमत्कार भी कहाँ होते हैं ।
खा पीकर अब हम निकलने के लिए तैयार थे । लेकिन इस बीच हमें यहाँ की फार्मेसी भी नज़र आ गई थी । बड़ीदिलचस्प लगी । मेडम तो किचन के लिए मसाले और शरबत आदि देख रही थी और हमने खरीदी -- ज़वानी कीक्रीम -- जवाँ बनाने वाली नहीं , ज़वान दिखाने वाली । जी हाँ , इसे लगाते ही चेहरे की उम्र १० साल कम हो जाती है। अब वैसे भी दिखावे का ज़माना है । इसलिए हम भी इसे विशेष अवसरों पर इस्तेमाल करते हैं ।
हालाँकि अब बाबा की सदा बहार ज़वानी का राज़ भी समझ आ रहा है ।
मेरठ बाई पास ख़त्म होते ही , मोदी नगर से पहले बना है यह जैन शिकंजी रेस्ट्रां । इसके बोर्ड कई किलोमीटर सेदिखने शुरू हो जाते हैं । इनकी शिकंजी बड़ी मशहूर है । हालाँकि खचाखच भरे छोटे से हॉल में ३० रूपये का शिकंजीका गिलास और ४० रूपये की पनीर पकौड़े की प्लेट ( बस एक पनीर ब्रेड पकौड़ा -पांच टुकड़ों में काटा हुआ ) खानेपीने में बड़ी मुशक्कत करनी पड़ेगी । लेकिन फिर भी , थोडा रिफ्रेस्गिंग तो लगेगा ।रेस्ट्रां के बाहर बनी एक छोटी सी दुकान में १३० रूपये के आधे किलो रेट के विशेष बिस्कुट अत्यंत स्वादिष्ट लगे ।
और इस तरह पूर्ण हुआ जंगल में मंगल , फाईव इन वन पुराण ।

