top hindi blogs
Showing posts with label हास्य कवि. Show all posts
Showing posts with label हास्य कवि. Show all posts

Tuesday, April 7, 2026

हंसने की फरियाद...

 एक महफिल में

कविता सुनाने की जब फरमाइश आई,

हमने अपनी बेस्ट हास्य कविता सुनाई।

पर उस दिन तो मैं ऐसा फंसा,

श्रोता एक भी ना हंसा।

फिर ख्याल आया कि आजकल

हास्य कविता सुनाते ही कौन हैं।

शायद इसीलिए सब श्रोता मौन हैं। 

यही सोचकर हमने दर्जनों चुटकले भी सुनाए,

पर श्रोता ज़रा भी ना मुस्कराए।


भई हंसते भी कैसे, सब घबराए थे,

अपनी अपनी पत्नी संग जो आए थे।

और पत्नियां सब चुप बैठी थीं,

जाने किस टेंशन में ऐंठी थीं।

शायद पति ने झुमके दिला दिए सस्ते,

फिर बिना पत्नी की परमिशन के

भला कैसे हंसते।

हमने निर्णय लिया कि पहले महिलाओं को समझाएंगे,

फिर हम ही समझ गए कि भैया जो पत्नी के सामने हंस सके

ऐसे पति कहां से आयेंगे।


हमारी भी प्रॉब्लम ये कि हम हास्य कवि,

ठहाकों की फरियाद नहीं करते।

बाकी कवियों की तरह

तालियों के लिए हुंकार नहीं भरते।

कि जो सच्चा देशभक्त है

वो अगली पंक्ति पर तालियां जरूर बजाएगा।

हमने सोचा, अब मजा आएगा,

चलो बोलते हैं,

भाइयों बहनों चाचा काका,

अगले जोक पर ठोको ठहाका।

पर हाय रे किस्मत, जोक किसी को ना जँचा,

क्योंकि श्रोता फिर एक ना हंसा।


अब हमने महिलाओं की ओर रुख किया

और प्रश्न किया,

कृपया हाथ उठाएं जिस जिस के पति ने 

लॉकडाउन में झाड़ू पोंछा लगाया,

पत्नियां भी सभी पतिव्रता निकली

एक ने भी हाथ नहीं उठाया।

खाली गया ये भी जो तंज था कसा,

क्योंकि श्रोता अब भी एक ना हंसा।


भई हंसते भी कैसे,

कोई अपनी या अपनों की बीमारी से त्रस्त हैं,

कोई बेरोजगार है तो कोई जॉब के तनाव से ग्रस्त है।

इस मृत्युलोक में सुखी लोग नज़र ही कहां आते हैं,

इसीलिए हम तो सबको यही समझाते हैं।

कि उम्र एक नम्बर है, नम्बर ज़िंदगी नहीं,

जिंदगी में खुश रहने पर कोई पाबंदी नहीं। 

हंसने हंसाने का ही दोस्तो नाम है जिंदगी,

खुल कर हंसो, हंसने में कोई शर्मिंदगी नहीं। 


क्योंकि जब आप हंसते हैं तब अपना तनाव हटाते हैं,

जो लोग हंसाते हैं वे दूसरों के तनाव मिटाते हैं,

हंसना हंसना भी एक लाभकारी काम है दुनिया में,

इसलिए हम तो सदा हंसी की ही दवा पिलाते हैं। 

Friday, June 25, 2021

छपास का मारा , भोला कवि बेचारा --


एक बड़े हास्य कवि की किताब देख ,  

बक्से में बंद हमें, 

अपनी हास्य कविताओं की याद आई,

तो हमने फ़ौरन प्रकाशक महोदय को कॉल लगाईं।  

और कहा भाई, 

हम भी छोटे मोटे हास्य कवि कहलाते हैं ,

पर लगता है आप तो सिर्फ 

मोटे कवियों की किताब ही छपवाते हैं।   

क्या आप हमारी कवितायेँ छपा पाएंगे ?

वो बोले ये तो हम ,

आपकी कवितायेँ पढ़कर ही बता पाएंगे। 


हमने कहा अच्छा ये तो समझाइये 

आपकी क्या शर्तें हैं 

और छापने का क्या लेते हैं। 

वो बोला 

हम कोई ऐसे वैसे प्रकाशक नहीं हैं,

हम छापने का कुछ लेते नहीं बल्कि देते हैं। 

हमने अपनी ख़ुशी जताई 

और कहा भाई 

लगता है हमारी आपकी कुंडली मिलती है ,  

क्योंकि हम भी कविता सुनाने का कुछ लेते नहीं 

बल्कि अपनी जेब से देते हैं।  


पर अब ज़रा काम की बात पर आइये ,

और ये बताइये कि ,

यदि पसंद नहीं आई तो क्या आप 

हमारी कवितायेँ वापस करेंगे, 

या अपने पास ही धर लेंगे। 

वो बोला टेक्नोलॉजी का ज़माना है ,  

आप अपनी कवितायेँ हमे ई मेल कर दीजिये,

हम ई मेल से ही वापस कर देंगे।   

उनकी ईमानदारी हमे बहुत भाई , 

और कॉपीराइट की चिंता मन से निकाल , 

सारी कवितायेँ फ़ौरन ई मेल से भिजवाईं। 


अब बैठे हैं इंतज़ार में क्योंकि,

अभी तक ना कवितायेँ वापस आईं, 

और ना ही मंज़ूरी आई।