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Sunday, October 16, 2011

यहाँ नर होना भी गुनाह हो सकता है ---


सन २०११ की जनगणना अनुसार देश में मेल फीमेल रेशो ९४० है यानि १००० पुरुषों पर ९४० महिलाएंकेवल केरल और पोंडिचेरी में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हैबाकि सभी राज्यों में पुरुषों की संख्या ज्यादा हैआश्चर्यजनक रूप से मेल फीमेल रेशो केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे कम है , जैसे दमन दीव -६१८, दादर और नागर हवेली --७७५, चंडीगढ़ --८१८ . दिल्ली मे भी यह रेशो ८६६ ही है

महिलाओं की संख्या कम होने का मुख्य कारण है, पुत्र की चाह । पुत्र प्राप्ति के लिए अक्सर लोग लिंग जाँच कराकर फिमेल फीटस को अबोर्ट करा देते हैं ।
इसे रोकने के लिए सरकार ने पी एन ड़ी टी एक्ट लागु किया हुआ है । इसके बावजूद भी यह रेशो बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है । हालाँकि कुछ फर्क तो आया है ।

क्या आप जानते हैं जो दूध हम पीते हैं , वह कहाँ से आता है । ज़ाहिर है , यह हमारे गाँव और डेरियों से आता है जहाँ पशु पालन होता है । दूध की अधिकांश मात्रा भैसों से आती है । इसका कारण यह है कि जहाँ गाँव में भैंस लगभग हर घर में होती हैं , वहीँ गाय बहुत कम लोग पालते हैं । गायें दूध भी कम देती है और उनके दूध में वसा और प्रोटीन की मात्रा भी कम होती है ।

यहाँ एक महत्त्वपूर्ण और आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जहाँ भैंस गाँव के लगभग हर घर में मिलती है , वहीँ भैंसा सारे गाँव में बस एक ही होता है । और उसका काम सिर्फ प्रजनन करना ही होता है । यदि गलती से दूसरा भैंसा आ भी जाये तो पहला भैंसा उसे मार मार कर भगा देता है जैसे जंगल में एक शेर दूसरे शेर को मार भगाता है । यह सत्य हरियाणा और दिल्ली के गाँव में मुख्य रूप से देखा जा सकता है । हालाँकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भैसा गाड़ी में जोतने के काम में लाया जाता है ।

इस तरह गाँव में भैंसें अनेक और भैंसा एक ही होता है

ऐसा कैसे संभव होता है ?

होता यह है कि भैंस से पैदा होने वाले बच्चों में मेल फीमेल की रेशो तो लगभग बराबर ही होती है ।फीमेल( कटिया ) को तो प्यार से पाला पोसा जाता है क्योंकि बड़ा होकर वह दूध देती है । लेकिन मेल ( कटड़ा ) बच्चे को थोडा सा बड़ा होते ही बेच दिया जाता है ।
अक्सर खरीदने वाले इन्हें खरीद कर बूचरखाने में ले जाते हैं और वही उनका अंतिम पड़ाव होता है ।

गाँव के घरों में रह जाती हैं सिर्फ फिमेल ( कटिया ) जो बड़ी होकर भैंस बनती है और दूध देकर मालिक के रोजगार का साधन बनती है ।

इस तरह मानव जाति ने अपने फायदे को ध्यान में रख कर भैसों की प्रजाति पर नियंत्रण रखा हुआ है

पृथ्वी पर सबसे ज्यादा विकसित प्राणी ने दूसरे प्राणियों की नियति अपने हाथ में कर रखी है

भैंसों की प्रजाति में नर और मादा का यह अनुपात सही है या गलत --फैसला आपका