गाँव में अक्सर देखते थे कि कैसे गायों के बछड़ों को ज़वान होते ही पशु चिकित्सालय ले जाकर मेकेनिकल कासट्रेशन करा दिया जाता था। इस प्रक्रिया में बछड़े के अंडकोषों को एक मशीन से दबाकर क्रश कर दिया जाता था जिससे कुछ ही दिनों में अंडकोष सिकुड़ कर अट्रोफिक हो जाते थे। इसके बाद न बांस होता था , न बजती थी बांसुरी। यानि युवा बैल की न सिर्फ प्रजनन क्षमता ख़त्म हो जाती थी बल्कि उसकी यौन इच्छा भी ख़त्म हो जाती थी। लेकिन उसकी शारीरिक ताकत पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़ने से , वह किसान के लिए खेती के काम में पूर्ण उपयोगी रहता था।
आजकल दामिनी के बलात्कारियों को सज़ा देने के मुद्दे पर जम कर बहस हो रही है। जहाँ अधिकांश लोगों की पुकार है कि इन दरिंदों को फांसी की सज़ा होनी चाहिए , वहीँ केमिकल या फिजिकल कासट्रेशन की भी बात हो रही है। अमेरिका सहित कई देशों में बलात्कारियों के लिए इस सज़ा का प्रावधान है। कासट्रेशन का मुख्य उद्देश्य दोषी को गाय के बछड़े की तरह यौन क्षमता से वंचित करना है ताकि वह भविष्य में यह कुकर्म न कर सके। लेकिन क्या यह सही है और इससे वांछित न्याय मिलने की सम्भावना है , इस पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है।
कासट्रेशन :
केमिकल कासट्रेशन में मनुष्य को एंटीएंड्रोजेनिक इंजेक्शन लगाये जाते हैं। ये इंजेक्शन एक डॉक्टर द्वारा लगाये जाते हैं जिनका असर तीन से छै महीने तक ही रहता है। यानि ये बार बार लगाने पड़ते हैं और जब तक लगाते रहेंगे तब तक यह अपना असर दिखाते रहेंगे। इनके प्रभाव से मनुष्य के शरीर में टेस्टोस्टिरोंन हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है। फलस्वरूप उसकी मर्दानी ताकत ख़त्म हो जाती है यानि वह सेक्स करने के काबिल नहीं रहता। न उसमे सेक्स की इच्छा रहती है और न ही क्षमता। चिकित्सा के क्षेत्र में इनका उपयोग ऐसे रोगियों में किया जाता है जिनकी यौन इच्छा अप्राकृतिक रूप से अत्यधिक होती है। ज़ाहिर है , यह रोगी द्वारा स्वयं उपचार कराने की इच्छा ज़ाहिर करने पर ही इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं का विपरीत प्रभाव भी होता है जो काफी कष्टदायक हो सकता है। इनमे हड्डियों का कमज़ोर होना , हृदय रोग और महिलाओं जैसे शारीरिक परिवर्तन प्रमुख हैं। यह इलाज़ महंगा होता है। हालाँकि इंजेक्शन या गोलियों द्वारा किया गया कासट्रेशन रिवर्सिबल होता है।
फिज़िकल कासट्रेशन में अंडकोषों को स्थायी तौर पर नष्ट करने से या सर्जिकलि काट देने से नामर्दी भी स्थायी होती है। इसलिए इसे सज़ा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि अपने देश में इसका इस्तेमाल शायद ही कभी किया गया हो। लेकिन अमेरिका और युरोपियन देशों में कैदियों को कभी कभी यह सज़ा सुनाई जाती है।
क्या कासट्रेशन एक उपयुक्त तरीका है ?
अक्सर बलात्कार में बिना रज़ामंदी के अवांछित सम्भोग ही नहीं होता बल्कि शारीरिक हिंसा, मार पीट, अपहरण और चोट आदि भी होते हैं। अपराध इन सभी श्रेणियों में भी होता है। इसलिए सज़ा भी कई काउंट्स पर दी जाती है। कासट्रेशन से यौन क्षमता तो ख़त्म हो जाती है लेकिन शारीरिक क्षमता में कोई कमी नहीं होती। ऐसा मनुष्य और भी खतरनाक हो सकता है। भले ही वह यौन सम्बन्ध न बना सके लेकिन शारीरिक तौर पर शक्तिशाली होने से हिंसा के लायक तो रहता ही है। अधिकांश बलात्कारी हिंसक और अपराधिक प्रवृति के होते हैं। ऐसे लोग यौन क्षमता के न रहते और भी हिंसक हो सकते हैं। इसीलिए कासट्रेशन सिर्फ लम्बी कैद की सज़ा प्राप्त कैदियों में ही किया जाता है।
बलात्कार :
महिलाओं के प्रति इससे ज्यादा जघन्य अपराध और कोई नहीं हो सकता। इसे निसंदेह रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए। इसलिए इसकी सज़ा भी सख्त से सख्त होनी चाहिए। अफ़सोस की बात तो यह है कि इस दुखद घटना के बाद भी दिल्ली में बलात्कार बेख़ौफ़ हो रहे हैं। इसलिए दामिनी के अपराधियों को जल्द से जल्द सज़ा देकर फांसी पर टांग देना चाहिए ताकि भावी बलात्कारियों को मौत का खौफ़ नज़र आए। आशा करते हैं कि सरकार जल्दी ही संविधान में आवश्यक परिवर्तन कर इस अमानवीय सामाजिक कुकृत्य से नागरिकों को सुरक्षित रखने की दिशा में तत्परता से कार्यवाही करेगी।

