top hindi blogs
Showing posts with label गैंगटोक. Show all posts
Showing posts with label गैंगटोक. Show all posts

Thursday, June 3, 2010

दिल्ली की गर्मी और बब्बे का चमत्कार ---

गर्मियों के दिनदिल्ली की भीषण गर्मी ऐसे में यदि बिजली भी गुल हो जाये तो फिर सब भगवान भरोसे

बचपन में जब गाँव में रहते थे तो उन दिनों बिजली भी नहीं होती थी । जेठ की तपती रातों में गरमागर्म लू के थपेड़े, घर के आँगन में बिछी चारपाई से टकराते , तो लगता जैसे किसी भट्टी के आगे लेटे हैं । लेकिन किसी दिन हवा भी चलनी बंद हो जाती थी तो मारे गर्मी के बुरा हाल हो जाता था । हाथ से पंखा झलते झलते कभी नींद आती भी तो कुछ ही पल में खुल जाती ।

ऐसे में सब उठ कर बैठ जाते और हमारे दादाजी कहते --चलो सब मिलकर बब्बे बोलना शुरू करते हैं । इससे हवा चलने लगेगी। अब आप सोच रहे होंगे कि ये बब्बे क्या बला है ।

बब्बे का मतलब होता है या यूँ कहिये कि होता था --बारह पेड़ पौधों के नाम लेना , जिनका नाम `` से शुरू होता होजैसे --बड़ , बरगद , बेर , बांस ---इत्यादि

यदि आपने बारह के बारह याद कर लिए तो हवा चलने लगेगी, ऐसा विश्वास होता था ।

अब यह तो याद नहीं कि हवा चलती थी भी या नहीं लेकिन सब बच्चे इस खेल में इतना खो जाते थे कि गर्मी के बारे में भूल ही जाते थे । फिर कभी न कभी तो हवा चलती ही थी ।

शायद यह उनका मेडिटेशन का ही एक तरीका था , गर्मी से ध्यान हटाने के लिए

आज जब बिजली चली जाती है , या वैसे भी गर्मी से त्रस्त होकर हम तो बब्बे ही पढने लगते हैं , लेकिन आधुनिक रूप में । जी हाँ , हमें जब गर्मी सताती है तो हम याद करने लगते हैं , पहाड़ों की हसीं वादियों को , जहाँ हम कभी हो कर आये थे ।
और सच मानिये , कुछ देर के लिए ही सही , गर्मी का अहसास ख़त्म सा हो जाता है

तो चलिए आज आपको ले चलते हैं --दार्जिलिंग , गंगटोक और मनाली की सैर पर ।

सिर्फ चित्र देखिये और ठंडक की अनुभूति कीजिये ----


दार्जिलिंग में स्टर्लिंग रिजोर्ट्स के बाहर अपने एक मित्र के साथ



दूर हिमालय की कंचनजंगा चोटियाँ नज़र आती हैं लेकिन बादलों ने सब ढक दिया है



दार्जिलिंग शहर में तो कुछ खास मज़ा नहीं आया लेकिन शहर के बाहर की हरियाली ने मन मोह लिया


चाय बागानों के बीच से होकर काफी नीचे उतरकर यह झरना बड़ा मनमोहक लग रहा था



नेपाल सीमा के पास यह झील इतनी खूबसूरत है कि बस यहीं बस जाने को जी चाहता है



इसी घोड़े पर बैठकर हमने झील का आधा चक्कर लगायालेकिन इसका मालिक क्या घास लेने गया है ?



और सिक्किम की यह झील शायद सबसे उंचाई पर बनी झीलों में से एक हैयह गैंगटोक से भारत चीन सीमा पर बने नाथुला पास जाने वाले रास्ते पर बिल्कुल सुनसान जगह पर हैइसकी छटा देखने लायक है


गैंगटोक में होटल के बाहर से सूर्योदय के समय कंचनजंगा का नज़ारा

मनाली

सोलंग वैली जहाँ अब पैराग्लाइडिंग कराई जाती है



एक बार आजमाने में क्या हर्ज़ है ? कैसा लगता होगा हवा में पक्षियों की तरह उड़ना ?

उम्मीद है कि अब तक आपकी गर्मी उड़नछू हो गई होगी ।

तो अब दीजिये एक सवाल का ज़वाब ---

यहाँ दिखाई गई इन दो झीलों के नाम क्या हैं ?
सही बताने वाले का इनाम --एक शाम हमारे टीचर्स के साथ CSOI में


नोट : पिछली पोस्ट में आधे सूखे आधे हरे पेड़ की लोकेशन --एलिफेंटा केवज, मुंबई --सही बताकर इनाम के हकदार बने हैं श्री गोदियाल जी और श्री समीर लाल जी