Friday, December 3, 2010
ज़रा याद उन्हें भी कर लें , जो एड्स से बच न पाए --
करीब तीस साल पहले उजागर हुई इस भयंकर बीमारी से अब तक ३ करोड़ लोग अकाल मौत के मूंह में जा चुके हैं ।
अभी भी ३.३ करोड़ लोग , जिनमे 2५ लाख बच्चे हैं , इस रोग से ग्रस्त हैं ।
लेकिन इस बात से थोड़ी सांत्वना मिलती है कि जहाँ पहले इसका कोई उपचार नहीं था और रोगी एक साल से ज्यादा जिन्दा नहीं रहता था , वहीँ अब सही समय पर सही इलाज़ किया जाए तो ७० साल तक भी जिन्दा रहा जा सकता है ।
करीब ३० से ज्यादा तरह की दवाएं, एक या एक से अधिक कम्बीनेशन में उपलब्ध होने से अब इलाज़ संभव है ।
इसके अलावा इसके रोकथाम के लिए भी कई साधन उपलब्ध हो रहे हैं जैसे एड्स वैक्सीन , टोपीकल ज़ेल्स , एंटी रिट्रो वाइरल ड्रग्स रोक थाम के लिए ।
लेकिन इनसे करीब ४०-६० % लोगों को ही एड्स होने से रोका जा सकता है ।
इसलिए बचाव में ही बचाव है ।
एड्स कैसे होता है ?
* असुरक्षित यौन सम्बन्ध से ।
* संक्रमित रक्त से।
* नशा करने वालों में संक्रमित सूई से ।
* गर्भवती मां से शिशु को ।
एड्स के लक्षण :
* हल्का बुखार रहना ।
* लगातार वज़न घटना ।
* लगातार या बार बार दस्त लगना ।
* खून की कमी होना ।
* गिल्टी निकलना ।
एड्स के रोगी को ये रोग भी पकड़ लेते हैं :
तपेदिक , न्युमोनिया , कई तरह के opurtunistic infections तथा लिम्फोमा जैसे ट्यूमर ।
एड्स के साथ ये रोग भी ट्रांसमिट होते हैं :
Hepatitis -B और C।
निदान :
रक्त की जांच तीन बार की जाती है । यदि तीनों टेस्ट पोजिटिव हों तो एड्स का निदान होता है ।
विंडो पीरियड :
एड्स का संक्रमण होने से रोग के टेस्ट में पोजिटिव आने में ३ सप्ताह से लेकर ३ महीने तक का समय लगता है । इसे विंडो पीरियड कहते हैं ।
इसीलिए संभावित घटना से तीन महीने बाद ही टेस्ट करने का फायदा होता है ।
ऐसे एड्स नहीं फैलता :
* हाथ मिलाने से।
* साथ खाना खाने से ।
* स्विमिंग पूल में ।
* नाई से बाल कटवाने से सम्भावना काफी कम होती है । लेकिन एहतियात बरतने में ही फायदा है ।
* चूमने से --साधारण किस से नहीं होता लेकिन डीप किसिंग से हो सकता है, विशेषकर यदि मूंह में छाले या जख्म हों ।
बचाव में ही बचाव है ।
* जीवन में संयम बरतें ।
* रक्त लेते समय सावधानी बरतें ।
* नशे से दूर रहें ।
* कोई भी शक होने पर अपनी जाँच करवाएं ।
सभी बड़े अस्पतालों में स्वैच्छिक जांच और परामर्श केंद्र खुले हैं ।
यहाँ इलाज़ भी मुफ्त किया जाता है ।
वैसे न ही ज़रुरत पड़े तो अच्छा है ।
Tuesday, December 1, 2009
आज वर्ल्ड एड्स डे पर ---अपना बचाव, अपनों का बचाव ---
वो मुश्किल से १८-२० साल की सुकन्या थी। सुंदर गोल चेहरा, अश्रुओं में भीगा हुआ । मेरे कमरे के बाहर बैठी थी, गुमसुम, उदास, चुपचाप आंसू बहाती हुई। किसी का रेफरेंस लेकर आई थी, ऐ आर टी क्लिनिक में इलाज़ कराने के लिए । ज़ाहिर था, वो एड्स से पीड़ित थी। उसका खूबसूरत , मासूम चेहरा देखकर, और स्थिति का आभास होते ही, किसी का भी कलेजा मूंह को आ सकता था।
लेकिन एक डॉक्टर को इमोशनल होना नही होता। क्या करें, वी आर ट्रेंड लाइक देट।
सोचता हूँ, किस ने दी उसको ये भयंकर बीमारी ?
कहाँ से पकड़ा ये नाईलाज रोग ?
क्या मजबूरी रही होगी ?
कौन है उसका गुनाहगार?
कुछ इसी तरह के सवाल उठते हैं जहन में , एड्स का ख्याल आते ही।
क्या है एड्स :
एड्स का पूरा नाम है -- अक्वायेर्ड इम्यूनो- डेफिसियेंसी सिंड्रोम।
ये एक ऐसी बीमारी है, जिसमे शरीर में बाहरी संक्रमण से लड़ने की कुदरती ताकत ख़त्म हो जातीहै।
और इसका जिम्मेदार है, एक नानो साइज़ का वायरस --जिसे एच आई वी कहते हैं---यानि ह्युमन इम्यूनो देफिसियंसी वाइरस।
ये वाइरस शरीर में प्रवेश करने के बाद रक्त की सी डी -४ नाम की कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की ताकत ख़त्म हो जाती है। और तरह तरह के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
क्या एच आई वी और एड्स एक ही बात है ?
जी नही, एच आई वी पोजिटिव होने का मतलब है --आपके शरीर में एड्स के वाइरस प्रवेश कर चुके हैं। लेकिन ये ज़रूरी नही की रोग उत्पन्न हो गया हो।
एड्स --का मतलब है की वाइरस की वजह से शरीर में विकार उत्पन्न होने लगे हैं, यानि रोगों के लक्षण प्रतीत होने लगे हैं।
क्या हैं एड्स के लक्षण ?
१। लगातार वज़न का घटना।
२। लगातार हल्का बुखार रहना।
३। महीनो तक दस्त लगे रहना।
४। मूंह में छाले बने रहना।
५। शरीर में लिम्फ नोड्स का उभरना।
एड्स क्यों होती है ?
इसके ४ मुख्य कारण हैं ---
१- अनैतिक , असुरक्षित यौन संबध ।
यानि असुरक्षित प्री-मेराईतल या पोस्ट- मेराईतल सेक्स।---
समलैंगिक सम्बन्ध।--- वेश्यावर्ती ।--- एच आई वी पोजिटिव पति या पत्नी से असुरक्षित यौन सम्बन्ध।
२ -एच आई वी पोजिटिव ब्लड ट्रांसफ्यूजन।
३ -नशा करने के लिए उपयोग की गई सूई , विशेषकर जब एक ही सूई से कई लोग नशा करते हों।
४ -एच आई वी पोजिटिव गर्भवती महिला से शिशु को एड्स हो सकती है।
कैसे बचा जाए एड्स से ?
ब्रहमचर्य का पालन। जी हाँ, यदि आप कुंवारे हैं तो बेहतर है, दादा- परदादा की बात माने और २५ साल तक ब्रहमचारी रहें। बात पुरानी ज़रूर है, लेकिन बात में दम है। अब तो विकसित देशों में भी इसका अनुसरण होने लगा है।
और यदि आप विवाहित हैं तो गीता में श्री कृष्ण द्वारा दिए ज्ञान का पालन करें, यानि परायी औरत पर नज़र मत डालें।
ये विचार मन में भी न लायें ---की बोर हो गया हूँ घर का खाना खाते खाते।
ब्लड यानि रक्त की आवश्यकता पड़ जाए तो किसी अधिकृत केन्द्र से ही रक्त प्राप्त करें जहाँ इसे अच्छी तरह से जांच कर ही दिया जाता है।
किसी तरह का नशा न करें, विशेषकर सूई लगाने वाली दवा का । नशेड़ियों को कहाँ होश रहता है ,अपनी सेहत का।
यदि गर्भवती मां को एच आई वी पोजिटिव निकल आता है, तो घबराएँ नही। किसी भी पास के अस्पताल में जाकर इलाज़ कराएँ। खाने से शिशु सुरक्षित रहेगा।
सभी बड़े अस्पतालों में वी सी टी सी यानि स्वैच्छिक परामर्श एवम जांच केन्द्र खुले हैं, जहाँ टेस्टिंग मुफ्त की जाती है।
ऐ आर टी क्लिनिक : यानि एंटी रित्रोवाइरल क्लिनिक। यहाँ एड्स के रोगियों को मुफ्त एड्स की दवा दी जाती है। लेकिन इसे उमर भर खाना ज़रूरी होता है।
याद रखिये :
भारत में करीब २.५ मिलियन लोग एच आई वी / एड्स से पीड़ित हैं।
एड्स का कोई इलाज़ नही है। दवा से सिर्फ़ वाइरस को कंट्रोल करके सामान्य जीवन गुजारा जा सकता है ।
ठहरिये, सोचिये, आप क्या करने जा रहे हैं। कही क्षणिक शारीरिक आनंद आपको जीवन भर के लिए आंसुओं में न डुबो दे।
उपरोक्त जानकारी --साभार, सौजन्य से --प्रोफ़ेसर श्रीधर द्विवेदी --इंचार्ज , ऐ आर टी क्लिनिक, जी टी बी हॉस्पिटल, दिल्ली।
वर्ल्ड एड्स डे के अवसर पर जी टी बी अस्पताल में एक पब्लिक लेक्चर का आयोजन किया गया, डॉ द्विवेदी के मार्गदर्शन में ।
इस अवसर पर एक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
प्रस्तुत है डॉ द्विवेदी द्वारा लिखी एक कविता इस विषय पर--
यह लेख आपको कैसा लगा, बताईएगा ज़रूर.

