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Saturday, September 3, 2011

हम सपने में भी ना ना चिल्लाते रहे --

पिछले महीने सारा देश अन्नामयी रहा लोगों का जोश देखकर सरकार को भी झुकना पड़ा जनता जनार्दन में ऐसा जोश बहुत कम देखने को मिलता है लेकिन इस दौरान कुछ अप्रत्यासित घटनाएँ भी देखने को मिली प्रस्तुत है इसी पर आधारित एक हास्य-व्यंग रचना :

भ्रष्टाचार की मार की मारी
एक दिन बोली पत्नी हमारी

बहुत हो गया अब उठो , अज़ी सुनते हो
क्यों टी वी के सामने पड़े , बेकार सर धुनते हो !

दिल्ली की जनता सारी, इण्डिया गेट को है भागी
आपकी देश प्रेम की भावना, अभी तक नहीं जागी ?

टोपी ना टी शर्ट , ना ही तिरंगा खरीद कर लाए हैं
शर्माजी तो दो बार रामलीला मैदान भी हो आए हैं ।

बाजु वाला पडोसी भी अन्ना टोपी लगाये खड़ा है
पर हे भगवान , मेरा कैसे कंजूस से पाला पड़ा है !

अन्ना अन्न सन्न छोड़ , अनशन पर बैठे हैं
पर आप जाने किस बात की टेंशन में ऐंठे हैं !

सुन बीबी के प्रवचन , हमको होश आ गया
दिल में देश भक्ति का , अन्ना जोश छा गया ।

पत्नी से कहा , जल्दी खाना पैक करो
आज हम भी अनशन करने जायेंगे ।

देश भक्तों संग लंच व रात का खाना
रामलीला मैदान में ही बैठ कर खायेंगे ।

पत्नी बोली अज़ी घर का खाना तो आप रोज खाते हैं
बुद्धिजीवी लोग तो वहां बस पिकनिक मनाने जाते हैं ।



हमने पडोसी से टोपी और टी शर्ट उधार मंगवाई
फिर उन्ही की बाईक उठा , बिना हेलमेट दौड़ाई ।

८०-९० की रफ़्तार से सड़क पर सरपट दौड़े
अन्ना के नाम पे सारे कानून बेधड़क तोड़े ।

गेट पर एक स्वयं सेवक ने पूछा , बताएं
ज़नाब आप क्या अन्ना सेवा कर सकते हैं ?

हमने कहा भैया , पहले ज़रा भोजन करायें
फिर शाम तक भूख हड़ताल पर बैठ सकते हैं ।

लेकिन फ़ूड स्टाल पर देखा , पब्लिक कतार लगाने लगी थी
मंच पर एक भद्र महिला , जमूरे का खेल दिखाने लगी थी ।

थोड़ी देर बाद एक हास्य कवि , वीर रस की कविता सुनाने लगे
सुनकर होश खोकर लोग , जोश में आकर तालियाँ बजाने लगे ।

एक फ़िल्मी पात्र को , अन्ना भक्ति कुछ ज्यादा चढ़ गई
उनके अभिनय से पंडाल में गर्मी अत्याधिक बढ़ गई ।

अभिनेता जब जनता को नेताओं का गुणगान सुनाने लगा
एक स्वामी चुपके से सारी ख़बरें हाईकमान को पहुँचाने लगा ।

जैसे जैसे पंडाल में पब्लिक की भीड़ बढ़ने लगी
हम जैसों के चेहरों पर , हवाईयां सी उड़ने लगी ।

उधर सड़क पर पुलिस की तादाद बढ़ रही थी
इधर हमारे दिल की धड़कन भी चढ़ रही थी ।

डंडाधारी पुलिस को देख , हमें बाबा रामदेव याद आये
वन्दे मातरम का नारा छोड़ , हम जोर से चिल्लाये ।

मत मारो , हमें मत मारो , हम तो बीबी के बहकाए हैं
कौन अन्ना, कैसा अन्ना, मुफ्त का खाना खाने आए हैं ।

तभी पत्नी ने जोर जोर से हिलाकर हमें जगाया
क्यों नींद में चिल्लाते हो , ३२ बच्चों के ताया ।


'शरीफ़' तो गली गली में अन्ना के नारे लगाते रहे
और 'तारीफ' सपने में भी ना ना ही चिल्लाते रहे


नोट : अन्ना आन्दोलन में मध्यम और युवा वर्ग का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा




Monday, August 22, 2011

क्या आपको अन्ना कहलाने का हक़ है ? जन्माष्टमी विशेष --

आज सारे देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना लहर चल रही है
जहाँ भी देखो --अन्ना ही अन्ना । मैं भी अन्ना --तू भी अन्ना । अन्ना टोपी -अन्ना टी शर्ट --यहाँ तक कि अन्ना टैटू भी --जैसे एक फैशन सा बन गया है ।

कौन है यह अन्ना ? यह अन्ना क्या है ?

अन्ना कोई व्यक्ति नहीं , यह एक सोच है --विचार है , एक प्रणाली है , व्यवहार है

बेशक भ्रष्टाचार के विरुद्ध वर्षों से दबी भावनाएं बाहर आ रही हैं । आम आदमी जो स्वयं को निसहाय महसूस करता है , आज सड़कों पर निकल आया है अपना रोष प्रकट करने ।

लोगों के विशाल जुलूस में चेहरे नज़र आते हैं --छात्रों के , युवाओं के , गृहणियों के , महंगाई से त्रस्त आम कामकाजी लोगों के , छोटे मोटे व्यवसायिक लोगों के

समर्थन में आगे आ रहे हैं --स्कूली बच्चे , मुंबई के डिब्बावाले , किन्नर -सभी वर्ग के लोग ।

उनके चेहरे पर वर्षों की यातना नज़र आती है , शोषण नज़र आता है और कूट कूट कर भरा हुआ रोष नज़र आता है

रोष प्रणाली की असंवेदनशीलता पर , अपने असहाय होने का , वर्षों तक शोषित होने का
अन्ना के रूप में सबको एक मसीहा नज़र आता है । इसीलिए आज हज़ारों की तादाद में लोग सड़कों पर निकल पड़े हैं, घर का आराम छोड़कर ।

लेकिन साथ ही कुछ सवाल भी उठते हैं । हमें यह भी सोचना पड़ेगा कि भ्रष्टाचार है कहाँ
देश में ? समाज में ? या स्वयं अपने अन्दर ?

क्या एक टोपी पहनने से आप अन्ना बन सकते हैं ?

क्या आपको अन्ना कहलाने का हक़ है यदि :

* कोई काम बिना रिश्वत लिए नहीं करते ?
* सरकारी नौकर हैं लेकिन हर काम में कमीशन चाहते हैं ?
* डॉक्टर हैं लेकिन बिल बढ़ाने के लिए गैर ज़रूरी टेस्ट करवाते हैं ?
* वकील या ज़ज़ हैं और झूठ को सच कर देते हैं ?
* अध्यापक हैं लेकिन विधालय में कम और घर पर ट्यूशन ज्यादा पढ़ाते हैं ?
* व्यापारी हैं पर हर चीज़ में मिलावट करते हैं ?
* ठेकेदार हैं लेकिन घटिया माल लगाकर सबकी जान खतरे में डालते हैं ?
* पुजारी हैं लेकिन बुरी नज़र डालते हैं ?
* समाज सेवक हैं लेकिन दान की राशि से सबसे पहले अपना घर भरते हैं ?
* भक्त हैं , मंदिर में पूजा करते हैं , फिर कुकर्म करते हैं ?

क्या सिर्फ हमारे नेता या आला अफसर ही भ्रष्ट हैं ?
यहाँ आत्म निरीक्षण की ज़रुरत है

जन्माष्टमी विशेष :

आज श्री कृष्ण जी का जन्मदिन है
श्री कृष्ण--- जिनका जीवन ही संसार के लिए एक वरदान रहा ।
जिन्होंने माखन चोर के रूप में वात्सल्य , गोपियों और राधा संग रास लीला कर प्रेम बरसा कर , मित्र के रूप में सुदामा से दोस्ती निभाकर , और अर्जुन के सारथी के रूप में विश्व को गीता का ज्ञान देकर मृत्युलोक वासियों का मार्गदर्शन किया है ।

आइये उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए निस्वार्थ भावना से अपना कर्म करते हुए आज हम सही रूप में अन्ना बनने का प्रयास करें

ईशांक दराल

आज जहाँ सारा देश कान्हा का जन्मदिन मना रहा हैवहीँ परिवार में सबसे बड़े पुत्र और एक समय आस पड़ोस में दसियों लड़कियों में अकेले लड़के होने के नाते सभी आंटियों और दीदियों द्वारा प्यार से कान्हा कहलाये जाने वाले हमारे सुपुत्र का भी आज जन्मदिन है

ईशांक जो इंजीनियरिंग का फ़ाइनल वर्ष का छात्र है , आज २१ वर्ष का हो गया है