Sunday, October 27, 2013

कॉरपॉरेट कल्चर ने परिवारों को अकेला बना दिया है --


बच्चों को खिला पिला कर,
पोंछती जब माथे का पसीना ! 
एक चमक होती चेहरे पर,
आत्मसंतुष्टि से भर जाता सीना !
रात मे खाना खाते समय वो 
अब सोचा करती है ख्यालों मे कहीं, 
क्या खाया होगा आज बच्चों ने ! 
जाने खाया भी होगा या नहीं !!
लाल के गाल थे कम लाल,
कुछ पतला भी हो गया था ,
जब घर आया था पिछले साल ! 
बिटीया भी अब कहाँ चहकती है , 
भूल सी गई है खिलखिलाना !
सोने लगते हैं जब हम यहाँ ,
तब होता है उसका घर आना !   
ना अम्मा है वहां ना दादी ,
अकेलेपन के हो गए हैं आदी !
महेनों तक बच्चे, अब घर नहीं आते,  
ये मुए कॉरपॉरेट दफ़्तर वाले  
काम कुछ कम क्यों नहीं कराते ! 
क्या ज़माना आ गया है ,
मात पिता की दी हुई शिक्षा ने ही 
बच्चों को मात पिता से दूर करा दिया है !


23 comments:

  1. सच एक बड़ी विडंबना

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  2. sateek rachana prastuti ... abhaar

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  3. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 28/10/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

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  4. बिलकुल सच...........पहले किसी अच्छे नेशनल इंस्टिट्यूट में पढ़ाई फिर बड़े कॉर्पोरेट हाउस में नौकरी....
    याने 12th के बाद बच्चे जो दूर गए फिर कभी करीब नहीं आ पाते....
    कभी लगता है एक आध एकड़ ज़मीन पर खेती करते ,पहले हम फिर बच्चे,फिर उनके बच्चे........साथ तो रहता हमेशा :-(

    सादर
    अनु

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    1. सही कहा अनु जी , लेकिन खेती बाड़ी ना भी करते, अपने शहर मे तो रहते !
      आखिर अपने शहर मे भी है रोटी ! :)

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  5. समय बदल रहा है .. ओर इसके साथ तो अब रहने की आदत डालनी होगी ...
    अर्थ का महत्त्व भी ज्यादा हो रहा है ... फिर ये अनर्थ तो सहमा ही होगा ... सार्थक चिंतन करती रचना है ...

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  6. जीवन का अर्थ बदल गया है, बहुत बड़ा बदलाव है ।

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  7. बदलते समय पर आपने बहुत सार्थक लेख लिखा हैं।
    गम्भीरता से चिंतन किया जाना चाहिए इस मुद्दे पर।
    धन्यवाद।
    चन्द्र कुमार सोनी
    www.chanderksoni.com

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    1. समय की मांग है सोनी जी . इससे बच पाना भी मुमकिन नहीं ! अब तो आदत ही डालनी पड़ेगी .

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  8. सुन्दर प्रस्तुति।
    साझा करने के लिए धन्यवाद।

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  9. सटीक चित्रण.....सुन्दर प्रस्तुति.......

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  10. कुछ पा लेने की व्यग्रता में खोते जाते परिवार..

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  11. सच कहा आपने, आखिर नतीजा भी भुगतेंगे आगे पीछे.

    रामराम.

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  12. जीवन का कॉरपोरेटीकरण हो चुका है डॉ साहब। अब तो लोग हँसते भी सोचके हैं।

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  13. सम्माननीय संपादक जी। -आपका -संतोष गंगेले
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    गणेश शंकर विद्यार्थी की 124वीं जयंती पर प्रांतीय समिति का सम्मेलन -
    विचारों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति से हमें कोई नहीं रोक सकता : आलोक चतुर्वेदी
    छतरपुर। आर.एन.एन.। संतोष गंगेले। अमर शहीद और कलम के धनी गणेश शंकर विद्यार्थी की 124वीं जयंती के अवसर पर गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब के तत्वाधान में स्थानीय फोरसीजन होटल छतरपुर के सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय भूमिका निभाने वाले तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को जिला कमेटी कि ओर से सम्मानित किया गया। उपस्थित कमलकारों तथा पत्रकारों को इस मौके पर संबोधित करते हुये सफल व्यवसायी तथा समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी आलोक चतुर्वेदी पज्जन भैया ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी त्याग और समर्पण के अदभुत मूर्ति के साथ सच्चे कर्मयोगी थे। देश की आजादी के इतिहास में उनके क्रांतिकारी तथा लेखनी शक्ति सदैव स्मणीय रहेगी। सीमित संसाधन में क्रांति और परिवर्तन कैसे लाये जा सकते हैं यह हमें विद्यार्थी जी के जीवन से सीखना चाहिए। जन समस्याओं और ज्वलंत मुद्दों को गंभीरतापूर्वक अपनी कलम से उठाने के कारण उन्होंने छतरपुर के साहसी पत्रकारों की सराहना करते हुये आलोक चतुर्वेदी ने कहा कि आचार संहिता उल्लंघन तथा चुनाव में उसके दुरूपयोग को रोका जाना चाहिए लेकिन आजाद भारत में विचारों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति से हमें कोई नहीं रोक सकता है। मानव के रूप में जन्म लेने के बाद दूसरों के दु:ख में साथ देना हमारा नैतिक दायित्व है।
    महिला संरक्षण की दिशा में सशक्त करने वाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गायत्री देवी परमार ने कहा कि जब मैं दो वर्ष की थी, तब विद्यार्थी जी की शहादत हुई थी। उनके बारे में पढऩे पर मैं उनसे बहुत प्रभावित हुई। यही बजह है कि पीडि़त और शोषित महिलाओं को न्याय दिलाने मैं डटी हुई हूं। कई मामलों में छतरपुर के जागरूक मीडिया का सहयोग मुझे मिलता रहा है जिससे मैं महिलाओं को न्याय दिलाने में सफल सिद्ध होती रही हूं। पत्रकारिता के धर्म और मूल्यों पर गहराई से प्रकाश डालते हुये कार्यक्रम को श्रवण गौरव, जितेन्द्र रिछारिया, हरी अग्रवाल, रामकिशोर अग्रवाल, शिक्षाविद रमाशंकर मिश्रा, हिन्दू उत्सव समिति के पवन मिश्रा, पूर्व नगर पालिका अधिकारी डीडी तिवारी तथा एडवोकेट संजय शर्मा ने मुख्य रूप से संबोधित किया।
    संगोष्ठी की शुरूआत में माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये। गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब के प्रांतीय अध्यक्ष संतोष गंगेले ने उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला। अंत में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के आयोजक पत्रकार विनोद अग्रवाल ने किया। सफल संचालन युवा टीवी एंकर अंकुर यादव ने किया। इस अवसर पर जिले के लोगों को रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने तथा समाज सेवा के क्षेत्र में आलोक चतुर्वेदी, महिला हितों के लिये गायत्री देवी परमार, विकास की दिशा में नपा सलाहकार डीडी तिवारी, मानसिक विक्षिप्तों को गले लगाने वाले बकील संजय शर्मा, भारतीय संस्कृति के लिये पवन मिश्रा तथा शिक्षाविद रमाशंकर मिश्रा, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली दलित महिला रामबाई अहिरवार, मिशनरी पत्रकारिता के लिये श्रवण गौरव, इलेक्ट्रानिक मीडिया के क्षेत्र में शीलवंत पचौरी (सहारा समय), पेप्टेक ग्रुप के युवा पत्रकार अंकुर यादव तथा नौगांव के सतीश साहू का शाल व श्रीफल देकर सम्मान किया गया और सबको मतदान करने हेतु प्रेरित किया गया। इस मौके पर प्रिंट तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के अधिकतर पत्रकार मौजूद रहे। संतोष गंगेले प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब का गठन ही सामाजिक एबं समाज सुधारक, कलम के पुजारियों , मानवता के धनी ब्यक्तियो को मंच पर उचित सम्मान देने के लिए ही गठन है। मेरा पूरा जीवन प्रेरणा से प्रेरित चला आ रहा है।
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  14. मात पिता की दी हुई शिक्षा ने ही
    बच्चों को मात पिता से दूर करा दिया है !

    क्या सोच दिलाई थी शिक्षा क्या देखा था वह सपना,अपना गाव ही भला था जहाँ जैसा मिलता कमाते, खाते सब साथ तो रहते.पर अब आँखें तरस गयी हिय बिखर गया उनसे मिलने को.

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  15. सच्चाई का आईना दिखती पोस्ट ...

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