Sunday, March 10, 2013

फेसबुकिया ब्लॉगिंग और ब्लॉग पर फेसबुकिंग -- यही है ज़माने की चाल !


अब जब हमारे सभी ब्लॉगर मित्र बन्धु फेसबुक की ओर कूच कर चुके हैं, तो न चाहते हुए भी हम भी कुछ कुछ फेसबुकिया हो गए हैं। हालाँकि जो मज़ा यहाँ है , वह वहां कहाँ। इसलिए पिछले एक महीने में फेसबुक पर अलग अलग मूड और माहौल में जो कुछ चन्द पंक्तियाँ डाली, उन्हें यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है : 

फेसबुकिया क्षणिकाएं       

१)

२)

आज ---
सारी रात 
मेघा , गरजते रहे 
बरसते रहे ---
नयनों से 
फिर आज ,
सारी रात ---

39 comments:

  1. पर पढ़ने और गढ़ने का सहज आनन्द ब्लॉग में ही है..

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  2. पांचवी वाली अब तक याद है :-)

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  3. यह तो है कि पढने का मज़ा ब्लॉग में ही आता है .... फेसबुक तो तफरीह की जगह है .... सैर सपाटा कर के घर आने जैसा ....

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  4. जय हो! विजय हो। पुण्य का काम किये उधर का माल इधर ले आये।

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    1. यानि ईस्ट मीट्स वेस्ट ! :)

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  5. ब्लाग-लेखन केवल ब्लागर्स तक ही पहुँच रखता है जबकि फेसबुक का सहारा लेकर आप नान-ब्लागर्स तक अपने ब्लाग लेखन को पहुंचाने मे सफल रहते है। BLOG & FACEBOOK ARE COMLIMENTARY & SUPPLEMENTARY TO EACH OTHER.
    'कंजूस' और संकुचित विचारकों को कुछ भी कहने की छूट होने के कारण वे फेसबुक का विरोध करते हैं।

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    1. 11 मार्च 2013 को ब्लाग का एक और तमाशा पढ़ने को मिला;आप लोग भी अवलोकन करें---
      अंजू शर्मा 11 मार्च 2013
      पिछले दिनों एक पत्रिका में मेरी एक कविता के ठीक ऊपर मेरी ही ग़ज़ल किसी ओर के नाम से छपी थी। एक पल के लिए तो मैं सकते में आ गयी इसके बाद मैंने तुरंत अपने ब्लॉग को हाईड कर लिया। इससे पहले ऐसी घटनाएँ फेसबुक पर मेरे साथ कई बार हुई पर प्रिंट में भी ऐसा होना बेहद दुखद है ......हालाँकि संपादक और वे महिला जिनके नाम से कविता छपी थी दोनों फेसबुक मित्र हैं ....विवाद को न बढ़ाते हुए मैंने इसे गलती मानकर दोनों को संदेह का लाभ दिया और ब्लोगिंग से तौबा की। मैं नहीं जानती कि ऐसा पहले कितनी बार हुआ होगा ....... मेरा ख्याल है अपने ब्लॉग पर सिर्फ प्रकाशित रचनाएँ ही होनी चाहिए, वर्ना रोज एक नए विवाद के लिए तैयार रहिये और कलम को उठाकर साइड में रख दीजिये .......

      पी के शर्मा अंजू जी मेरी कविताएं चोरी होकर अखबारों में भी खूब छपी हैं। कविसम्‍मेलन में भी खूब सुनाई जाती हैं। जैसा कि मुझे मेरी मेल से भी पता चला है और और लोगों ने भी बताया है। ऐसे में क्‍या किया जाए.... और तो और मेरी अच्‍छी कविताओं ने तो मुझे कविसम्‍मेलन में भी जाने से रोक दिया है। मुझे कविसम्‍मेलन के आमंत्रण भी शनै शनै बंद हो गये हैं, ....मुझे बुलाएंगे तो चोरी वाली रचनाएं नहीं सुनाई जा सकेंगी। मतलब यही कि न बुलाओ न झंझट... आपको कुपित होने की जरूरत नहीं है। आप बस इतने पर ही संतोष और गर्व कर लीजिए कि... आपकी कविता इस लायक तो है कि चोरी हो सके ...मतलब सोने की है चांदी की है। रांगे की नहीं....।

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    2. अत्यंत दुःख की बात है कविता चोरी होना।
      हालाँकि यह गुणवत्ता को भी ज़ाहिर करता है।

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  6. आपने भी ताऊगिरी शुरू करदी? यानि माल की हेराफ़ेरी.:)

    रामराम.

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    1. ज़माने के साथ सुर ताल मिलाते जाओ --- :)

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  7. ब्लॉग का कोई मुकाबला नहीं ...

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  8. तो ठीक है ना दोनो विधाओ में रहें कल पता नही किसको छोडना पडे और किसको पकडना

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  9. बहुत ही सुन्दर.ब्लॉग का स्थान फेसबुक कभी नही ले सकता.महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  10. बिल्कुल ब्लॉग ही बेहतर है ...... फेसबुक पर सबसे जुड़े रहने की कोशिश है पर पूरी तरह फेसबुक की दुनिया में गुम होने से बची रहूँ यह भी ध्यान में है

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  11. कभी-कभी फेसबुक में लिखा स्टेटस ब्लॉग की एक अच्छी पोस्ट के लिए सहायक होता है।

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  12. फसबूक हो ब्लॉग पढ़ने में आनंद आना चाहिये. सुंदर भावपूर्ण और आज का यथार्थ हैं यह क्षणिकाएँ.

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

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  13. फ़ेसबुक कंप्यूटर का वह कोढ़ है जिसकी खुजलाहट आनंददायी है :)

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  14. सुबह से शाम होती है ,
    शाम से रात होती है।
    उन से अब मिलना हो तो बस
    फेसबुक पर मुलाकात होती है...

    हा हा ... फेसबुक का कमाल ... क्षणिकाएं हैं धमाल ... सभी बेमिसाल ...
    अभी तक तो अकाउंट नहीं खोला ... देखें कब तक रोक पाता हूं अपने आप को ...

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  15. :) बहुत सुन्दर

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  16. सुबह से शाम होती है ,
    शाम से रात होती है।
    उन से अब मिलना हो तो बस
    फेसबुक पर मुलाकात होती है।

    हा !हा! हा!रोचक.

    वाकई ,फेसबुक को'देर तक झेल सकना भी बड़ा काम है.
    मैं अभी तक इस एक 'बुक' से दूर हूँ ...देखें कब तक.

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    1. अल्पना जी , फेसबुक पर भक्तों की भीड़ देखकर लगता है कि एक दिन में २४ घंटे से ज्यादा होने चाहिए।

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  17. फ़ेसबुक के ज़माने तालमेल बनाना पडता है :)

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  18. फेसबुक मुझे भी पसंद नहीं है पर...

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  19. dono kaa apnaa apnaa mahattav hain ji.
    lekin, aaj ki peedhi padhnaa or samajhnaa or soch-vichaar karnaa hi nahi jaanti.
    isliye facebook jyada chal rahaa hain.
    thanks.
    CHANDER KUMAR SONI
    WWW.CHANDERKSONI.COM

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  20. फेसबुक की अपनी अहमियत है किन्तु ब्लॉग की कोई जगह अद्भुत आपने सिद्ध कर दिया
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

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  21. श्री ग़ाफ़िल जी आज शिव आराधना में लीन है। इसलिए आज मेरी पसंद के लिंकों में आपका लिंक भी सम्मिलित किया जा रहा है।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (11-03-2013) के हे शिव ! जागो !! (चर्चा मंच-1180) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  22. हमें तो ब्लॉग और फेसबुक दोनों पसंद हैं :)

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  23. दोनों के बीच समन्वय बना रहे तभी मज़ा आता है |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  24. फेसबुक और ब्लॉग दोनों का अपना संसार है , मिला मिला सा , जुदा जुदा सा भी !

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  25. आज की ब्लॉग बुलेटिन गर्मी आ गई... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  26. फ़ेसबुक के चक्कर में ही बहुत से ड्राफ़्ट रेड़ी पड़े है ब्लॉग के लिए ... :-) लिखा ज्यादा जाता है फ़ेसबुक पर ...और सुधार कर सहेजा जाता है ब्लॉग पर ....

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  27. ब्लोगिंग से अच्छा फेस बुक नही है,,,,

    Recent post: रंग गुलाल है यारो,

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  28. ब्‍लॉग लंबी रेस को घोड़ा है..फेसबुक तुरंत आकर्षक जरूर लगता है....मगर आप हमेशा जुडे नहीं रह सकते। अच्‍छा लगा पढ़कर..

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  29. कसी को हो न हो पर हमें तो शिकवा यही है कि अब आप वाकई में बहुत कम बतियाते हैं :) यहाँ तक के आप अब हमारे ब्लॉग पर भी नहीं आते हैं....

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  30. यकिनन……

    सुबह से शाम होती है ,
    शाम से रात होती है।
    उन से अब मिलना हो तो बस
    फेसबुक पर मुलाकात होती है।

    सटीक अवलोकन आपका!!

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  31. कमेन्ट बॉक्स न खुलने की कई शिकायत आ रही हैं। हालाँकि यहाँ तो खुल रहा है।


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