1)
होली के हुडदंग में, भांति भांति के रंग
रंगों की बौछार में , मस्ती लाये भंग ।
मस्ती लाये भंग की , इक छोटी सी गोली,
कि शर्मा जी की घरवाली , वर्मा जी संग होली।
हंस कर बोले वर्मा जी , बुरा ना मानो शर्मा जी,
होली है भई होली , ये तो होली है भई होली।
2)
चश्मे पे जब हो जाये , रंगों की बौछार
सतरंगी नज़र आये , ये सारा संसार।
ये सारा संसार , फिर लगे सुनेहरा
गोरा दिखे काला , काला हरा भरा।
कह डॉक्टर कविराय, ना बुरा मनाना ,
होली पर सबको हंसकर गले लगाना।
3)
जेम्स, जावेद, श्याम और संता, रंगों में नहाएं
जात धर्म को छोड़कर , सब पर मस्ती छाये।
सब पर मस्ती छाये मिलकर आपस में गले ,
बरसों के बिछड़े भी जब सब होली पे मिलें।
आओ भैया भूल जाएँ सब गुजरे शिकवे गिले
होली के बहाने फिर आज, दिल से दिल मिलें।

