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Wednesday, September 22, 2010

हाइपोथायरायडिज्म---मोटापे का एक कारण ---

हमारे देश में मोटा होने को सेहतमंद और पतला होने को कमज़ोर होना समझा जाता है
लेकिन यदि आपका वज़न बढ़ता ही जा रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप की सेहत बेहतर होती जा रही है ।
ज़रा गौर कीजिये --हो सकता है आप हाइपोथायरायडिज्म के शिकार हों

थायरायड :

हमारी गर्दन के सामने वाले हिस्से में एडम्स एप्पल के नीचे एक ग्रंथि होती है जिसे थायरायड कहते हैं । इससे एक हॉर्मोन निकलता है जिसे थायरायड हॉर्मोन कहते हैं । इस हॉर्मोन से हमारे शरीर के सभी अंगों की सभी गतिविधियाँ नियंत्रित होती हैं ।
इस हॉर्मोन की कमी से उत्तपन होने वाली स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण :

इसके मुख्य लक्षण हैं ---

लगातार वज़न बढ़ते जाना ।
शरीर में सूजन आना , विशेषकर हाथ , पैरों और आँखों पर ।
भूख न लगना ।
अधिक नींद आना ।
कमजोरी और थकावट रहना ।
ज्यादा सर्दी लगना --गर्मियों का मौसम अच्छा लगता है ।
त्वचा में खुश्की रहना ।
कब्ज़ रहना ।
महिलाओं में अधिक माहवारी आना ।
बच्चे पैदा न होना ।
बाल झड़ना ।

यानि आप को भूख लगती नहीं , कुछ खाना खाते नहीं , फिर भी वज़न बढ़ता जा रहा है तो समझ लीजिये आपको यह प्रोब्लम हो सकती है
निदान :

डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ । डॉक्टर पूर्ण निरिक्षण करने के बाद कुछ जाँच करवाएगा ।
रक्त जाँच में दो टैस्ट ज़रूरी हैं ---फ्री टी - और टी एस एच

एक बार निदान हो गया और दवा शुरू कर दी गई तो अक्सर जीवन भर खानी पड़ सकती है । क्योंकि अक्सर यह रोग थायरायड ग्रंथि के स्थायी तौर पर नष्ट होने की वज़ह से होता है । यह autoimmunity की वज़ह से होता है ।

उपचार :

इस रोग का कोई उपचार नहीं है ।
लेकिन हॉर्मोन की कमी को पूरा करने के लिए हॉर्मोन को दवा के रूप में दिया जाता है । यानि इलाज़ बस रिप्लेसमेंट के रूप में होता है ।

फिर भी दवा लेते रहने से सामान्य जिंदगी गुजारी जा सकती है
दवा :

एल -थाय्रोक्सिन की गोली जो २५ , ५० , १०० माइक्रोग्राम में आती है , रोज सुबह नाश्ते से पहले खाली पेट लेनी होती है । इसकी सही डोज़ तो डॉक्टर ही निर्धारित करते हैं , लेकिन आम तौर पर एक व्यस्क के लिए ७५ से १२५ माइक्रोग्राम काफी रहती है ।

फोलोअप :

आरम्भ में हर महीने डॉक्टर से मिलना पड़ेगा । लेकिन एक बार डोज़ निर्धारित होने पर ६ महीने या एक साल में एक बार डॉक्टर से मिलना काफी है ।
फोलोअप में सिर्फ टी एस एच का टैस्ट कराना काफी है ।

गर्भवती महिला :

इन महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए । गर्भ के दौरान डोज़ बढ़ानी पड़ती है क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी इसकी ज़रुरत होती है । यदि ऐसा नहीं किया गया तो बच्चे को हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है ।
बच्चे :

बच्चों में इस हॉर्मोन की कमी बहुत घातक सिद्ध हो सकती है । इससे विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिससे बच्चा अल्पविकसित रह सकता है --शारीरिक और मानसिक तौर पर । इन्हें क्रमश : ड्वारफिज्म और क्रेटीनिजम कहते हैं ।
बच्चों में दवा की डोज़ अक्सर ज्यादा रहती है ।

नोट : यह रोग महिलाओं में ज्यादा पाया जाता हैयदि मां को हो तो संतान में होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है लेकिन याद रखिये --समय पर निदान होने से कई तरह की मुश्किलों से बचा जा सकता है