अब ज़रा इसे देखिये --
ये है एक विकसित देश का हाइवे शहर की ओर जाता हुआ ।ज्यादा फर्क नहीं है । सच पूछिए तो यहाँ ड्राइव करते समय गर्व की अनुभूति होती है ।

यह जगमगाता मॉल --विकसित देश का ।
लेकिन सारी समानताएं बस यहीं ख़त्म हो जाती हैं ।
क्योंकि भले ही यहाँ भी सब भौतिक सुख सुविधाएँ उपलब्ध हों , लेकिन अभी भी हमारा रहन सहन , रख रखाव , साफ़ सफाई क्या एक विकसित देश का मुकाबला कर सकती है ? अब ज़रा इसे देखिये --
ये है वहां के एक पोश इलाके का आवासीय क्षेत्र ।दोनों जगह मकानों की कीमत लगभग एक जैसी है ।
यहाँ पार्किंग को लेकर सर फूटने तक की नौबत आ जाती है ।
वहां के डाउन टाउन के चौराहे का एक दृश्य। सामने लाल हाथ की बत्ती --पैदल लोगों को रुकने का इशारा । सब शांति से खड़े होकर बत्ती हरी होने का इंतजार कर रहे हैं । दायें हाथ को ट्रैफिक की बत्ती लाल है । इसलिए गाड़ियाँ रुकी हैं । पैदल यात्री पार कर रहे हैं । सब कुछ शांति से हो रहा है ।क्या इसे विकास कहेंगे ?
जिम्मेदार कौन ?
हमारी कानून या सामाजिक व्यवस्था ?
या फिर हमारी अनुशासनहीन मानसिकता ?
वज़ह कुछ भी हो , जब तक यह सब नहीं बदलेगा, हम विकासशील ही बने रहेंगे। कभी विकसित देश नहीं कहलायेंगे ।

