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Monday, August 1, 2011

यदि बॉस सताए , तो हमें बताएं --

देश में शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ने के साथ महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर बढे हैं . अब महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर मेहनत करती हुई कार्य करती हैं .
लेकिन पुरुष इन परिस्तिथियों का नाजायज़ फायदा उठाते हुए सहकर्मी स्त्रियों का यौन उत्पीड़न करने से बाज़ नहीं आते . देश में काम करने वाली ६० % महिलाओं का कहना है--कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न व्यापक तौर पर देखा गया है . इससे अक्सर कार्यस्थल पर महिलाओं में असुरक्षा की भावना बनी रहती है .

१३ अगस्त १९९७ को उच्चतम न्यायलय ने एक एतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा की कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न एक कटु सत्य है और यह न केवल मानव अधिकार का बल्कि व्यक्ति विशेष के मूल अधिकार का भी उल्लंघन है .
इसके फलस्वरूप महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए अब सभी राज्यों में राज्य शिकायत समिति का गठन करने का आह्वान किया गया है . दिल्ली में यह कार्य दिल्ली महिला आयोग के अंतर्गत किया जा रहा है जो १९९६ से कार्यरत है .

यौन उत्पीड़न क्या होता है ?

उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देशिका अनुसार यौन उत्पीड़न है --अवांछित यौन निर्धारित व्यवहार . जैसे :
* शारीरिक संपर्क
* शारीरिक संबंधों की मांग
* यौन सम्बंधित वार्तालाप
* पोर्न सामग्री का प्रदर्शन
* अन्य अवांछित मौखिक या अमौखिक यौन आचार

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न :

जब यह अवांछित व्यवहार रोजगार के लिए शर्त बन जाए और उसका प्रभाव कर्मचारी के रोजगार अवसर पर पड़ने लगे
जैसे --
* पदोन्नति के लिए सेक्सुअल फेवर मांगना
* बॉस द्वारा व्यक्तिगत जीवन में हस्तप्क्षेप करना
* यौन वार्तालाप या अश्लील इशारे करना
* समूह में सेक्स जोक्स सुनाना
* किसी भी रूप में कार्यस्थल पर यौन सामग्री का सार्वजानिक प्रदर्शन करना .

कार्यस्थल किसे कहते हैं ?

कोई भी जगह जहाँ कर्मचारी और नियोक्ता का कार्यकारी सम्बन्ध होता है
जैसे --
* कार्यालय परिसर
* कार्यालय से सम्बंधित क्षेत्र जैसे पार्किंग , कैंटीन आदि
* अन्य स्थान जहाँ कार्यालय से सम्बंधित आधिकारिक रूप में जाना हो

यौन उत्पीड़न के प्रकार :

१) वर्बल --यौन सम्बंधित टीका टिप्पणी, भद्दे मजाक , वस्त्र या शारीरिक टिप्पणी , डेट या यौन सम्बन्ध की मांग , अश्लील मोबाईल सन्देश या काल , पोर्नोग्राफी आदि .
२) नॉन वर्बल -- घूरना , अश्लील हाव भाव , अभद्र इशारेबाजी .
३) विजुअल -- अश्लील सामग्री रखना जैसे पोस्टर्स , पुस्तकें , मैगजीन , नोट्स , सेक्स ओब्जेक्ट्स आदि .
४) शारीरिक संपर्क -- स्पर्श , हगिंग , किसिंग , सट कर बैठना या खड़े होना , रास्ता रोकना , पीछा करना , और बलात्कार .

यौन उत्पीड़न दो तरह से किये जाते हैं :

१) प्रलोभन देकर --पदोन्नति या सैलरी बढ़ाना , या कोई और फेवर
२) विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न कर .

यौन उत्पीड़न के महिलाओं पर प्रभाव :

* सामाजिक संबंधों में मुश्किलें
* शारीरिक प्रभाव --नींद न आना , भूख न लगना , सरदर्द , पेट दर्द , कमजोरी , डिप्रेशन और अनुपस्थित रहना .
*आर्थिक प्रभाव -- पदोन्नति न मिलने से , अवसर न मिलने से या रोजगार छूटने की नौबत आने से .
* करियर में रुकावट
* मानसिक आघात

यौन उत्पीड़न को कैसे रोका जाए ?

यदि आप यौन उत्पीड़न के शिकार हैं तो सबसे पहले :

१) बॉस को ना कहना सीखें .
बॉस को बता दो की जो कुछ वो कर रहे हैं , सही नहीं है और आपको इससे आपत्ति है .
अपनी बात को बॉस को लिखित में देकर अपना विरोध प्रकट करें . एक कॉपी अपने पास रखें और कोई साक्षी भी साथ रखें .
किसी साथी को भी बता सकते हैं ताकि वह बॉस से बात कर सके .

२) अपनी शिकायत , और पूरी घटना का ब्यौरा लिखकर दस्तावेज़ के रूप में तैयार रखें .

३) अपने किसी साथी को जिसपर आप विश्वास करते हों , बता दें और उसका समर्थन प्राप्त करें .

४) अपने द्वारा किये गए कार्यों का ब्यौरा रखें ताकि आप पर कामचोरी का इलज़ाम ना लगाया जा सके .

५) ऐसे किसी व्यक्ति की तलाश करें जो आप की तरह पीड़ित हो . इसे आप के केस को बल मिलेगा .

६) अपने कार्यालय की शिकायत समिति में शिकायत दर्ज कराएँ .

विभागीय शिकायत समिति :

न्यायालय के आदेश पर अब सभी कार्यालयों में एक विभागीय समिति का गठन करना अनिवार्य है जो इस तरह की शिकायतों पर सुनवाई कर उचित निर्णय ले सकते हैं .
समिति की अध्यक्ष का महिला होना अनिवार्य है और समिति में कम से कम ५० % मेम्बर्स का महिला होना ज़रूरी है . साथ ही एक एन जी ओ मेम्बर भी लाज़मी है .

समिति पूरी सुनवाई करने के बाद ३० दिन के अन्दर अपनी रिपोर्ट विभाग अध्यक्ष को सौंप देगी जो समिति द्वारा सुझाए गए निर्णय और दंड पर विचार कर यथोचित कार्यवाही करेंगे .
अभियुक्त पर विभागीय कार्यवाही के साथ भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत भी कार्यवाही की जा सकती है .

पीड़ित या अभियुक्त --दोनों को हक़ है की निर्णय से असहमत होने पर राज्य समिति में जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं . राज्य समिति का फैसला मान्य न होने पर उच्च न्यायालय में जाया जा सकता है .

नोट : आम तौर पर अभियुक्त जितना वरिष्ठ अफसर होगा , दोषी पाए जाने पर सजा भी उतनी ही ज्यादा होगी . इस प्रक्रिया के अंतर्गत पहला केस एक कंपनी के चेयरमेन का था जिसे यौन उत्पीड़न का दोषी पाए जाने पर सर्विस से डिसमिस कर दिया गया था . केस सुप्रीम कोर्ट तक गया लेकिन वहां भी निर्णय बरक़रार रहा और दोषी को सर्विस से हाथ धोना पड़ा .

आशा है इसे पढ़कर कार्यरत महिलाओं को कुछ सबल मिलेगा .