आज से दो सप्ताह के लिए अर्जित अवकाश शुरू हो गया है । इसलिए दो सप्ताह के लिए डॉक्टरी बंद । अब डॉक्टरी के सिवाय सारे काम किये जायेंगे । हालाँकि डॉक्टर डॉक्टरी छोड़ना भी चाहे तो लोग छोड़ने नहीं देते । किसी भी शादी या दावत में खाना खाते समय भी कोई आकर कहेगा --डॉ साहब आजकल बड़ी कब्ज़ रहती है । अरे भई , पहले कुछ खा तो लो ।
कभी कभी तो उदर व्यथा का ऐसा वर्णन सुनने को मिलता है कि खाना भी खाना मुश्किल हो जाता है ।
पिछली पोस्ट पर एक डॉक्टर की नज़र से सब को दूध के बारे में जानकारी बहुत काम की लगी । लेकिन उस पर अमल करने का वादा किया बस श्री खुशदीप सहगल जी ने । उन्होंने कहा कि आज से टोंड की जगह डबल टोंड दूध ही पीयेंगे ।
लेकिन अब तो हम यह बताना चाहते हैं कि सबसे बढ़िया दूध तो ट्रिपल टोंड दूध होता है । हालाँकि यह दूध मार्केट में नहीं मिलता ।
आइये आज आपको बताता हूँ कि दूध से आम के आम और गुठलियों के दाम कैसे निकाले जाएँ । एक डॉक्टर की नज़र से नहीं , बल्कि एक रसोइये / खानसामा/ हलवाई की नज़र से ।
आम के आम :
दूध तो आप डबल टोंड ही मंगवाइये । लेकिन इसे सुबह उबालकर ठंडा कर फ्रिज में रख दें और शाम को इसकी मलाई उतार लें । जी हाँ , यदि आपने सही से उबाल कर ठंडा कर दिया है तो डबल टोंड दूध में भी काफी मलाई आ जाती है । रोज मलाई को फ्रीज़र में स्टोर करते रहिये ।
इस तरह जो दूध बचेगा वह ट्रिपल टोंड होगा यानि उसने वसा न के बराबर होगी लेकिन बाकि सभी तत्त्व पूरे मौजूद रहेंगे ।
गुठलियों के दाम :
जब मलाई का एक डोंगा भर जाये जो इस बात पर निर्भर करेगा कि आप रोज कितना दूध लेते हैं, तब इसे मिक्स़र में डालकर घुमाइए जब तक कि मक्खन न निकल आए ।
अब मक्खन को अलग कर लीजिये । आप चाहें तो घर का बना शुद्ध सफ़ेद मक्खन खाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं , विशेष कर मक्की की रोटी के साथ । या फिर इससे घी भी निकाल सकते हैं ।
घी बनाने के लिए मक्खन को एक पतीले या सॉस पेन में डालकर धीमी आंच पर गर्म कीजिये और इसे चम्मच से चलाते रहिये ताकि नीचे न लगे ।
इस काम में पेशेंस की ज़रुरत होगी । लेकिन थोड़ी देर में घी अलग हो जायेगा और दूध की प्रोटीन का अवशेष बचा रह जायेगा ।
थोडा ठंडा करने के बाद इसे छलनी में छानते हुए एक बर्तन में स्टोर कर लीजिये ।
लीजिये तैयार हो गया घर का बना शुद्ध देसी घी ।
रोज दो किलो दूध से एक महीने में करीब आधा किलो घी निकल आता है ।
ज़ाहिर है दो व्यक्तियों के लिए दो किलो दूध और महीने में आधा किलो घी काफी रहता है ।
तो मिल गए न आपको गुठलियों के भी दाम ।
डंठल के भी दाम :
अभी तो और भी दाम मिलने वाले हैं । मक्खन निकालने के बाद मिक्सी में जो मट्ठा बचा रह जायेगा , उसमे नमक और भुना हुआ पिसा ज़ीरा मिलाकर लस्सी बनायें और पीयें , बहुत स्वादिष्ट लगेगा ।
हालाँकि यदि थोडा खट्टा लगे तो आप इससे कढ़ी भी बना सकते हैं ।
छिलके के दाम :
घी बनाने के बाद पतीले में जो अवशेष रह जायेगा , वह वास्तव में वसा युक्त प्रोटीन होता है । अब इससे आप एक बहुत स्वादिष्ट मिठाई बना सकते हैं ।
इसके लिए इसमें मिलाइये --बूरा ( हर किराने की दुकान पर मिल जाती है ), इसकी मात्रा कम से कम उतनी होनी चाहिए जितना माल पतीले में बचा है । साथ ही चाय के साथ खाए जाने वाले दो रस ( रस्क ) का चूरा बनाकर मिला दीजिये । अब धीमी आंच पर पकाइए । थोड़ी सी देर में आपके हाथ में होगी एक बहुत ही स्वादिष्ट मिठाई , घर की बनी हुई ।
इसे आप जितना पकाएंगे , उतना ही स्वाद अलग होता जायेगा ।
तो मिल गए न डंठल के भी दाम ।
पत्तियों के भी दाम :
अभी भी एक और काम की चीज़ बची है । मिठाई बनाने के बाद पतीले को आप कितना भी खाली क्यों न कर लें , उसमे घी और मीठा युक्त पदार्थ बचा रहेगा । इसे खुरचन कह सकते हैं ।
अब इसमें आधा या एक कप दूध डालें और थोडा सा और गर्म करें ।
इसे पीकर देखिये -बिल्कुल रबड़ी जैसा स्वाद आएगा ।
तो इस तरह अपने देखा कि कैसे डबल टोंड दूध को ट्रिपल टोंड बनाकर पिया जाए और साथ में महीने भर का घी का स्टॉक बना लिया जाए , महीने में एक बार घर की बनी हुई मिठाई और रबड़ी वाला एक कप दूध - सब डबल टोंड दूध से ।
इस्तेमाल करके देखिये , कुछ ही महीने में इस तरह डबल टोंड दूध से बने ट्रिपल टोंड दूध के इस्तेमाल से आपकी डबल तोंद टोंड होकर आधी रह जाएगी ।
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Wednesday, December 14, 2011
Sunday, December 11, 2011
दूध पीते बच्चे बनें दूध पीते बड़े ---
हरियाणा और पंजाब के लोग घी और दूध के बड़े शौक़ीन होते हैं । हों भी क्यों नहीं , शारीरिक श्रम करने वाले लोगों को अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रुरत पड़ती है । जितनी ऊर्जा देसी घी में होती है उतनी और किसी खाद्य पदार्थ में नहीं होती । घी मिलता है दूध से । दूध मिलता है गाय भैंसों से । भैंस का दूध गाय के दूध की तुलना में ज्यादा गाढ़ा और ऊर्जावान होता है । इसकी वज़ह है भैंस के दूध में गाय के दूध से ज्यादा वसा और प्रोटीन का होना ।
दूध न सिर्फ एक संतुलित आहार है , बल्कि ३-४ महीने तक के बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार भी है । दूध का अधिकांश भाग पानी होता है लेकिन इसमें ७-७.५ % वसा और ९ % एस एन ऍफ़ होता है । एस एन ऍफ़ यानि नॉन फैट सोलिड्स ।
नॉन फैट सोलिड्स :
दूध में वसा के अतिरिक्त जो अन्य पदार्थ होते हैं वे हैं --लैक्टोज (52%), प्रोटीन (36%), मिनरल्स (10%) और विटामिन्स (1.7%)।
वसा से सर्वाधिक , ९ केल्रिज प्रति ग्राम ऊर्जा मिलती है जबकि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से ४ केल्रिज प्रति ग्राम ऊर्जा मिलती है ।
इनके अतिरिक्त मां के दूध में रोग निरोधक पदार्थ ( इम्यूनोग्लोबुलिंस ) भी होते हैं जो बच्चे को कई तरह के रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं ।
दूध में सबसे ज्यादा काम का मिनरल होता है --कैल्सियम जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है । इसीलिए डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को दूध अवश्य पीना चाहिए ।
जहाँ गाँव में दूध एक ही किस्म का मिलता है -गाय या भैंस का दूध ,वहीँ शहरों में दूध अनेक प्रकार के मिलते हैं ।
फुल क्रीम मिल्क : इसमें वसा की मात्रा लगभग ६ - ७.५ % होती है ।
टोंड मिल्क : इसमें फैट ३ % होता है ।
डबल टोंड मिल्क : इसमें फैट कंटेंट बस १.५ % ही होता है ।
लेकिन सभी प्रकार के दूध में एस एन ऍफ़ ९ % ही होता है । दूध की गुणवत्ता दूध में एस एन ऍफ़ की मात्रा से ही मांपी जाती है ।
एक हैरानी की बात यह है कि विकसित देशों में जहाँ फुल क्रीम दूध सस्ता और टोंड दूध महंगा मिलता है , वहीँ हमारे देश में फुल क्रीम महंगा , टोंड उससे सस्ता और डबल टोंड सबसे सस्ता मिलता है ।
कुपोषण वहां भी होता है , और यहाँ भी । क्योंकि वहां ज़रुरत से ज्यादा खाने को मिलता है , यहाँ ज़रुरत से कम ।
कौन सा दूध बढ़िया है ?
शहरों में जहाँ जीवन शैली बहुत निष्क्रिय होती है , दूध में ज्यादा वसा से मिलने वाली अतिरिक्त ऊर्जा मोटापे को जन्म देती है । इसलिए ज़रूरी है कि दूध में वसा की मात्रा कम से कम हो ।
इसलिए शहरी लोगों को डबल टोंड दूध ही पीना चाहिए । इसमें एस एन ऍफ़ की मात्रा ९ % होने से बाकि सभी पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं । और सस्ता भी है ।
यानि बचत की बचत और सेहत भी रहे दुरुस्त ।
दूध न सिर्फ एक संतुलित आहार है , बल्कि ३-४ महीने तक के बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार भी है । दूध का अधिकांश भाग पानी होता है लेकिन इसमें ७-७.५ % वसा और ९ % एस एन ऍफ़ होता है । एस एन ऍफ़ यानि नॉन फैट सोलिड्स ।
नॉन फैट सोलिड्स :
दूध में वसा के अतिरिक्त जो अन्य पदार्थ होते हैं वे हैं --लैक्टोज (52%), प्रोटीन (36%), मिनरल्स (10%) और विटामिन्स (1.7%)।
वसा से सर्वाधिक , ९ केल्रिज प्रति ग्राम ऊर्जा मिलती है जबकि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से ४ केल्रिज प्रति ग्राम ऊर्जा मिलती है ।
इनके अतिरिक्त मां के दूध में रोग निरोधक पदार्थ ( इम्यूनोग्लोबुलिंस ) भी होते हैं जो बच्चे को कई तरह के रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं ।
दूध में सबसे ज्यादा काम का मिनरल होता है --कैल्सियम जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है । इसीलिए डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को दूध अवश्य पीना चाहिए ।
जहाँ गाँव में दूध एक ही किस्म का मिलता है -गाय या भैंस का दूध ,वहीँ शहरों में दूध अनेक प्रकार के मिलते हैं ।
फुल क्रीम मिल्क : इसमें वसा की मात्रा लगभग ६ - ७.५ % होती है ।
टोंड मिल्क : इसमें फैट ३ % होता है ।
डबल टोंड मिल्क : इसमें फैट कंटेंट बस १.५ % ही होता है ।
लेकिन सभी प्रकार के दूध में एस एन ऍफ़ ९ % ही होता है । दूध की गुणवत्ता दूध में एस एन ऍफ़ की मात्रा से ही मांपी जाती है ।
एक हैरानी की बात यह है कि विकसित देशों में जहाँ फुल क्रीम दूध सस्ता और टोंड दूध महंगा मिलता है , वहीँ हमारे देश में फुल क्रीम महंगा , टोंड उससे सस्ता और डबल टोंड सबसे सस्ता मिलता है ।
कुपोषण वहां भी होता है , और यहाँ भी । क्योंकि वहां ज़रुरत से ज्यादा खाने को मिलता है , यहाँ ज़रुरत से कम ।
कौन सा दूध बढ़िया है ?
शहरों में जहाँ जीवन शैली बहुत निष्क्रिय होती है , दूध में ज्यादा वसा से मिलने वाली अतिरिक्त ऊर्जा मोटापे को जन्म देती है । इसलिए ज़रूरी है कि दूध में वसा की मात्रा कम से कम हो ।
इसलिए शहरी लोगों को डबल टोंड दूध ही पीना चाहिए । इसमें एस एन ऍफ़ की मात्रा ९ % होने से बाकि सभी पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं । और सस्ता भी है ।
यानि बचत की बचत और सेहत भी रहे दुरुस्त ।
दूध की कुछ विशेषताएं :
* दूध का सफ़ेद रंग इसमें पाई जाने वाली प्रोटीन --केसीन और कैल्सियम फोस्फेट के मिश्रण की वज़ह से होता है .
* केसीन हीट रेजिस्टेंट होती है , यानि दूध को गर्म करने से खराब नहीं होती .
* गाय के दूध में हल्का पीलापन इसमें मौजूद कैरोटीन की वज़ह से होता है .
* कुछ लोगों को दूध हज्म नहीं होता यानि दूध पीने से पेट में गैस या दस्त लग जाते हैं . यह लैक्टोज का पाचन न होने की वज़ह से होता है . ऐसी हालत में दूध की बजाय दही खानी चाहिए . दही में दूध के सभी गुण पाए जाते हैं और लैक्टो बैसिलाई लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित कर देते हैं जिससे दही का स्वाद भी खट्टा लगता है .
* पैसच्युराईजेशन से दूध संक्रमण रहित रहता है . इसके लिए दूध को ७२ डिग्री सेन्टीग्रेड तक गर्म कर एकदम ४ डिग्री तक ठंडा किया जाता है .
*इस तरह पैकेट बंद पैसच्युराइज्द दूध स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम होता है और सुरक्षित भी . जबकि खुले दूध में सभी तरह की मिलावट और गंदगी मिली होने की सम्भावना रहती है .
अक्सर बच्चे दूध पीने में आना कानी करते हैं . अब यह आप पर निर्भर करता है की आप किस तरह बच्चों को दूध पीने के लिए राज़ी करते हैं .
नोट : अगली पोस्ट में पढ़िए --दूध से आम के आम , और गुठलियों के दाम ।
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