वो सफ़ेद कुर्ता पहने ,
और धोती बांधे
पैरों में सेंडल ,
कांधे पर झोला टांगे
रोज ठंडे पानी से नहाकर
आता दस कोस साईकल चलाकर ।
खांसी नज़ला , दर्द बुखार ,
उलटी दस्त की दवा लेकर ,
टेटनस का टीका देकर
चोट पर बीटाडीन की पट्टी बाँध
दर्द से आराम दिलाता था ।
कहीं जन्म हो या मृत्यु ,
या शादी का जश्न
पहुँचता सबसे पहले
परिवारों के आपसी झगडे
बिना फीस निपटाता था ।
सब बुलाते उसे डागदर बाबु बुलाकर
पर एक दिन आकर
एंटी क्वेकरी स्क्वाड ने
उसे गिरफ्तार करा दिया ।
झोला छाप डॉक्टर का
उसे खिताब दिला दिया ।
अब गाँव के मरीज़ दस कोस दूर
शहर जाते हैं,
इलाज़ कराते हैं
ठूठी वाले डॉक्टर के नर्सिंग होम में,
जिसके रोम रोम में
बसा है पैसा,
कहते हैं उसके जैसा
नहीं कोई लुटेरा,
नकली दवा का डेरा
मृत शरीर को वेंटिलेटर लगाकर
आई सी यू में लिटाता है ,
यह ठूठी वाला डॉक्टर कहलाता है ।
डिग्री है पर नहीं लाइसेंस
अल्ट्रा साउंड मशीन का
पर इस मिस्टर हसीन का
हाथ नहीं कांपता,
जब वह जांचता
अजन्मे बच्चे का लिंग,
यह दुराचार का किंग
थैली लेकर हर सप्ताह
मंत्री के घर , भेंट चढ़ाता है
यह शहर में पढ़ा लिखा
ठूठी वाला डॉक्टर कहलाता है ।
यहाँ कोई डॉक्टर , इंजीनियर
बाबू या मिनिस्टर
नहीं टांगता थैला।
मन का मैला
यह सफेदपोश
रखता है बड़ा बक्सा,
उसको बोध नहीं इसका
कि जब दुनिया से खिसका
तो न चपरासी न मजदूर,
न कुली ही मिल पायेगा
फिर इतना भारी बक्सा
अरे मूर्ख क्या तू खुद उठा पायेगा ।
झोला छाप कौन है , वो ईमान की डिग्री वाला झोला धारी
या ठूठी वाला , बड़े बक्से का मालिक ,ये शहरी खद्दरधारी ?
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Thursday, August 26, 2010
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