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Wednesday, July 6, 2011

न जाने किस भेष में नारायण मिल जाये---

दो दोस्त आपस में बात कर रहे थे
एक बोला --यार मैंने तुझे कल टी वी पर देखा पर ये बता तू उस रैली में क्या कर रहा था
दूसरा बोला --यार कमाल है मैंने तो मास्क से मूंह ढक रखा था तूने फिर भी पहचान लिया !
पहला दोस्त बोला --यार मैं तो यूँ ही मज़ाक कर रहा था , पर तू तो सच में --निकला

यह दृश्य था दिल्ली में दूसरी बार हुए एल जी बी टी जलसे का

एल जी बी टी यानि --लेस्बियन , गे , बाई सेक्सुअल , ट्रांसजेंडर

ये टर्म्स हैं आजकल यौन सम्बन्धी विकृतियों के फलस्वरूप उत्त्पन्न होने वाली परिस्थितियों में लोगों के यौन व्यवहार अनुसार विभागीकरण की

आइये देखते हैं --क्या अर्थ होता है इन शब्दों का

लेस्बियन : समलैंगिक यौन सम्बन्ध रखने वाली महिला
गे : समलैंगिक यौन सम्बन्ध रखने वाला पुरुष
बाईसेक्सुअल : स्त्री पुरुष दोनों से यौन सम्बन्ध रखने वाला/वाली
ट्रांसजेंडर : स्त्री या पुरुष --पुरुष या स्त्री के भेष में यानि अपने लिंग के विपरीत व्यवहार करने वाला /वाली

ज़ाहिर है , ये लोग सामान्य लोगों से भिन्न होते हैं शारीरिक तौर पर या मानसिक तौर पर या दोनों तरह

लेकिन गौर से देखा जाए तो केवल ट्रांसजेंडर ही ऐसे होते हैं जिनके साथ प्रकृति ने धोखा किया है यानि उन्हें पुरुष के शरीर में स्त्री या स्त्री के शरीर में पुरुष बनाकर संसार में भेज दिया है


यही वो लोग भी हैं , जिनका सर्जरी द्वारा और हॉर्मोन्स देकर लिंग परिवर्तन किया जा सकता हैहालाँकि प्रजनन क्षमता तो नहीं आती

लेकिन बाकि तीन तरह के लोग अपनी मर्जी से ऐसा व्यवहार करते हैं
एक मत यह भी है कि उनका सायकोलोजिकल मेकप ऐसा होता है इसलिए वे विवश होते हैं

हकीकत क्या है , यह तो कोई सायकोलोजिस्ट या सायकायट्रिस्ट ही बता सकता है
लेकिन यह भी हकीकत है कि ऐसे लोगों को समाज में नीची नज़रों से देखा जाता है और वे उपहास के पात्र भी बनते हैं

अब वैसे तो उच्च न्यायालय ने समलैंगिक संबंधों को मान्यता देते हुए , इन्हें कानूनी तौर पर सुरक्षा प्रदान कर दी है इसलिए सरकार को भी झुकना पड़ा

लेकिन क्या सामाजिक तौर पर इन्हें स्वीकार किया जायेगा ? क्या समाज में इन्हें वही इज्ज़त मिल पायेगी जो सामान्य लोगों को मिलती है ? और क्या सचमुच यह व्यवहार स्वीकार्य होना चाहिए ?


फ़िलहाल स्थिति यह हो सकती है कि जहाँ पहले सिर्फ लड़कियों को संभल कर चलना पड़ता था , अब लड़कों को भी यह ध्यान रखना पड़ेगा कि कहीं कोई ऐसा मिल जाए जिसका व्यवहार आपको असमंजस्य में डाल दे

आखिर जाने किस भेष में नारायण मिल जाये


नोट : इस विषय पर माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी के बयान पर मिडिया ने बहुत शोर मचाया है
इस बारे में जन साधारण का क्या सोचना है , यह जानने की उत्सुकता रहेगी