डॉ अरविन्द मिश्र जी ने हमारी एक पोस्ट पर सही टाईटल दिया -- इंफोटेनमेंट।
तो लीजिए हाज़िर है , एक और इंफोटेनमेंट :
गर्मी में आता है गर्म पसीना ,
यही पसीना तो गर्मी से बचाता है।
कंपकपाने का मतलब डर नहीं होता ,
सर्दियों में कंपकपाना ही ऊर्ज़ा दिलाता है।
मत समझो कोई अपशकुन इसे ,
छींकने से तो स्वास मार्ग खुल जाता है।
दस्त भले ही कर डालें पस्त तुम्हें ,
पर पेट को रोगाणुओं से निज़ात दिलाता है।
जूता सुंघाओ या ना सुंघाओ ,
मिर्गी के दौरे में कोई टोटका काम नहीं आता है।
जितने मर्ज़ी बदलो शहर के डॉक्टर ,
वायरल बुखार तो अपने आप ही ठीक हो जाता है।
पीलिया भी एक वायरल इंफेक्शन है ,
इसमें झाड़ फूंक नहीं , आराम ही काम आता है।
किसी को नहीं लगती किसी की नज़र ,
नज़र का लगना भी एक अंधविश्वास कहलाता है।
पेट के दर्द को एसीडिटी मत समझो ,
कभी कभी ये दिल का दर्द भी निकल आता है ।
कुत्ता काट ले तो इंजेक्शन लगवाओ ,
हल्दी मिर्च के लेप से तो रोग और बढ़ जाता है।
शहर में भरे पड़े हैं झोला छाप डॉक्टर ,
इनका ईलाज जान का दुश्मन बन जाता है।
इस जिस्म को अक्सर कुदरत ही रोगों से बचाता है।

