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Wednesday, March 4, 2020

छोटी बह्र की ग़ज़ल --


फ़िल्मी मशहूर हस्तियों और मॉडल्स के परिधान देखकर उपजी ये छोटी बह्र की ग़ज़ल :

वस्र छै गज रंगा ,         ( वस्र = वस्त्र )
तन फिर भी नंगा।

कहने को मैया ,
मैली क्यों गंगा।

मन में रख विग्रह ,       ( विग्रह = वैर / शत्रुता )
कर दें कब दंगा ।

धर्म के हैं गुरु ,
मत लेना पंगा ।

जग में हो अमन ,
मन रहता चंगा।

तज दे हर व्यसन ,
बीड़ी  या   छंगा ।        ( छंगा छाप तम्बाकु )

नोट : मैट्रिक क्रम = २,२,२,२,२ 

5 comments:

  1. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 05 मार्च 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


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  2. बहुत खूब!
    अच्छी सामयिक प्रस्तुति

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