Wednesday, January 17, 2018

काश कि स्विस बैंकों की एक ब्रांच ऊपर भी होती ...


धन सम्पत्ति जोड़ते रहे जिंदगी भर जोड़कर पाई पाई  ,
बच्चों की जिंदगी बनाने में ही अपनी सारी जिंदगी बिताई। 
एक पल भी ना जी पाए जिंदगी भर कभी खुद के लिए ,
अंत समय में बच्चों ने ही उस धन संपत्ति पर नज़र गड़ाई। 

दुनिया की रीति है कि बच्चों से ही घर बनता है ,
तिनका तिनका जोड़कर बस इक घर बनता है।
कभी एक कमरे में रहता था छै लोगों का परिवार , 
अब बच्चों बिना छै कमरों का घर वीराना लगता है। 

डायबिटीज के मरीज़ हैं , मीठा कभी खा नहीं सकते,
ब्लड प्रैशर भी रहता है , नमक का परहेज हैं रखते।
शरीर का वज़न है भारी , बीवी घी भी खाने नहीं देती,
कुछ करोड़ कमाए थे , वे भी साथ ले जा नहीं सकते।



3 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अग्नि-5 की सफलता पर बधाई : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'रविवार' २१ जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  3. जीवन का अंतिम सच यही है।

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