Tuesday, January 30, 2018

हमारी शादियां और इंडियन स्टेंडर्ड टाइम ...


शादी के कार्ड में लिखे
समय पर जाएँ या न जाएँ ,
लेकिन कार्ड को पढ़कर ज़रूर जाएँ ।
एक शाम हम बिना पढ़े ही चले गए ,
उस दिन ऐसा धोखा खाये थे।
कि शादी में एक की जाना था ,
और बधाई दूसरे को दे आये थे।
दूल्हा भी लगा जाना पहचाना था ,
पर घर आकर कार्ड में देखा,
उस शादी में तो दोपहर को जाना था।  

4 comments:

  1. सही कहा आपने
    उनके भाग्य में लिखा था लिफाफा और आपके भाग्य में उनका प्रीति भोज

    ReplyDelete
  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, दूल्हे का फूफा खिसयाना लगता है ... “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (01-02-2018) को "बदल गये हैं ढंग" (चर्चा अंक-2866) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete