Thursday, September 12, 2013

काश किसी गुरु की कृपा हम पर भी होती ---


टी वी पर बाबाओं की धूम देख कर समझ नहीं आता कि हालात पर हसें या रोयें ! फिर सोचा चलो कविता ही रची जाये :


ज़वानों की  जुबानी सुनी, लाख तरकीबें अपनाई,
पर ज़वानी जो गई एक बार, फिर लौट कर ना आई !

दिल में थी आरजू कि लहराएँ अपनी भी जुल्फें,
हेयर कटिंग भी हमने तो हबीब के सैलून से कराई !

बालों को रंगाया कभी रोगन कभी मेहंदी से,
पर अब तो सर पर बाल ही कितने बचे हैं भाई !

गालों पर कराया फेसियल शहनाज़ का ,
लेकिन झुर्रियों में ज़रा सी कमी तक ना आई !

चेहरे पर लगाया वैदिक एंटी सन लोशन ,
काम बाबा रामदेव की ज़वानी क्रीम भी ना आई !

हसीनों संग करते थे कनअंखियों से आँख मिचोली ,
अब मोतिया बिंद से ही बंद है इन आँखों की बिनाई !

आसां नहीं है दुनिया में आसाराम बन जाना ,
हाथ मलते रह जाओगे ग़र गुरु कृपा ही ना आई !

खामख्वाह दम भरते हैं ज़वानी का ' तारीफ ' ,
साँस रुक जाती है जब लट्ठ लेकर सामने आती है ताई !

नोट : कृपया इसे शुद्ध हास्य के रूप में ही पढ़ें। अर्थ का अनर्थ निकालकर आत्मविश्वास न खोएं।  


23 comments:

  1. आसां नहीं है दुनिया में आसाराम बन जाना ,
    हाथ मलते रह जाओगे ग़र गुरु कृपा ही ना आई !

    बहुत खूब !
    latest post गुरु वन्दना (रुबाइयाँ)

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  2. वा वाह ...वा वाह ...
    तालियाँ ही तालियाँ डाक साब क लिए !!!

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  3. आसां नहीं है दुनिया में आसाराम बन जाना ,
    हाथ मलते रह जाओगे ग़र गुरु कृपा ही ना आई !

    सुंदर हास्य व्यंग ! बेहतरीन रचना, !!

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  4. आसां नहीं है दुनिया में आसाराम बन जाना ,
    हाथ मलते रह जाओगे ग़र गुरु कृपा ही ना आई !

    ....एक ही तीर से दो दो बाबाओं को निपटा दिया! कमाल करते हैं आप भी।

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    1. बाबाओं का ही अब ज़माना है ,
      हम आप तो यूँ ही जीया करते हैं !

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 13/09/2013 को
    आज मुझसे मिल गले इंसानियत रोने लगी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः17 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





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  6. आप में आसाराम बन्ने के गुर नहीं हैं ..अच्छा है आप ब्लॉगर बाबा ही बने रहिये और हमें हास्य रंग की गोलिय्याँ देते रहिये ....

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    1. आजकल हर चीज़ की ट्रेनिंग मिलती है भाई ! :)

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  7. खामख्वाह दम भरते हैं ज़वानी का ' तारीफ ' ,
    साँस रुक जाती है जब लट्ठ लेकर सामने आती है ताई !

    :):) आप भी ताऊ बनने की राह पर हैं क्या ?

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    1. जी हम तो पहले से ही ताऊ हैं ! :)

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (13-09-2013) महामंत्र क्रमांक तीन - इसे 'माइक्रो कविता' के नाम से जानाः चर्चा मंच 1368 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. आपने बहुत सही लिखा है खोई जवानी लौट कर नहीं आती बुढापे से जो दुर्गति होती है उसे बदला नहीं जा सकता चाहे कितने भी यत्न किये जाएं |
    आशा

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    1. जी ,बुढ़ापे में सही रहने के लिए ज़वानी में सही रहना ज़रूरी है.

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  10. चेहरे पर लगाया वैदिक एंटी सन लोशन ,
    काम बाबा रामदेव की ज़वानी क्रीम भी ना आई !

    आपने गलत प्रोडक्ट खरीदा, कभी बाबा ताऊश्री की क्रीम खरीद कर देखिये.:)

    बहुत सशक्त व्यंग.

    रामराम.

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  11. जय हो सर जी , आजकल मूड कवितयाना हो रहा है , जमाए रहिए सर :)

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  12. हास्य रस से सराबोर रचना बहुत पसंद आई ,सच में आज कल तो नेताओं और बाबाओं का ही ज़माना है क्या करेंगे पढ़ लिख कर
    बहुत- बहुत बधाई इस मजेदार प्रस्तुति हेतु

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  13. जिन खोजाँ तीन पाइयाँ ... :)

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  14. :))behad Rochak anubhav kavita mei bataa diye!

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  15. आसाराम होकर भी बचना मुश्किल है .... बाबाजी को मामा जी मिल गए....खाकी वर्दी वाले...अइसे अइसे टेस्ट किए हैं कि आसाराम बापू के मुंह से निकल गया ही गया कि अति हो गई भाई जुल्म की अति हो गई...वइसे सुना है कि मच्छरों के पैर पकड़ लिए थे बाबाजी ने और कहा कि वो तो मच्छरों के बाप हैं..कृपया बाप को न काटें पर मच्छर तो मच्छर हैं...नहीं मान रहे हैं..ठीक वइसे ही जैसे बाबाजी ने कहा था कि निर्भया पैर पकड़ लेती औऱ कहती है कि भाई छोड़ दो...पर न तब वो दरिंदे माने ..न अब मच्छर मान रहे हैं...

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  16. आसां नहीं है दुनिया में आसाराम बन जाना ,
    हाथ मलते रह जाओगे ग़र गुरु कृपा ही ना आई !

    गुरु बनने के लिए भी गुरु कृपा चाहिए ... फिर गुरु कौन ओर चेला कौन रह जाएगा ...
    नाजा आया डाक्टर साहब ...

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