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Monday, June 14, 2010

जब वफादार ही बेवफा हो जाये , तो क्या कीजे ----

बेशक कुत्ता एक वफादार प्राणी है लेकिन यदि आपके प्रिय टॉमी , मोती , जूजू या पूपू को कोई गली का कुत्ता काट ले और उसे रेबीज़ हो जाये तो वही स्वामिभक्त , जान से भी प्यारा आपका पालतू कुत्ता , आपकी जान का दुश्मन बन सकता है जी हाँ , मनुष्यों को रेबीज़ का रोग अक्सर और मुख्यतया कुत्ते के काटने से ही होता है
इसी विषय पर अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों को अधिक जानकारी देने के लिए हमने अपने अस्पताल में रेबीज़ पर एक व्याख्यान का आयोजन किया जिसमे अस्पताल के एमरजेंसी विभाग के अध्यक्ष डॉ जे पी कपूर ने विस्तृत जानकारी प्रदान की


कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए हमने एंटी -रेबीज विभाग का प्रभारी होने के नाते सब को एंटी -रेबीज़ उपचार पर होने वाले व्यय का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया कि :

* रेबीज़ एक १०० % फेटल रोग है यानि यदि यह रोग हो जाये तो मौत निश्चित है
* इस रोग का कोई इलाज़ नहीं है
* लेकिन इस रोग की रोकथाम करने से १०० % बचा जा सकता है
* रोकथाम करने में प्रतिवर्ष सरकार के करोड़ों रूपये खर्च हो जाते हैं
* इस खर्च को काम करने के लिए सरकार ने एक्सपर्ट्स की राय मानकर एंटी-रेबीज़ टीकों के लगाने के तरीके में बदलाव किया है ( इस एक्सपर्ट्स ग्रुप में हम भी शामिल थे )
* इस तरीके से यह खर्च कम होकर केवल २५% रह गया है

अपने व्याख्यान में डॉ कपूर ने बताया :

रेबीज के लक्षण : रेबीज का सबसे खतरनाक और शर्तिया लक्षण है --हाइड्रोफोबिया यानि पानी से डर लगना इसके बाद कुछ जानने की ज़रुरत नहीं रहती क्योंकि इसका कोई इलाज़ ही नहीं है

रेबीज इनके काटने से हो सकती है : रोग ग्रस्त कुत्ता , बिल्ली , गाय , भैंस आदि पालतू पशु , जंगली चूहा , बन्दर

यदि इनमे से कोई भी आपको काट लेता है तो क्या करना चाहिए ?

* सबसे पहले जख्म को बहते पानी में दस मिनट तक साबुन लगाकर लगातार धोना चाहिए
* इसके बाद जख्म पर कोई भी एंटीसेप्टिक जैसे बीटाडीन , डेटोल या सेवलोन आदि लगा दें
* तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाइये

डॉक्टर क्या करेगा ? डॉक्टर आपको टीका लगाएगा---

) टेटनस का टीका
) एंटी रेबीज वैक्सीन
) यदि काटने से खून भी निकला है तो एंटी सीरम का टीका भी लगाना पड़ेगा यह एक बार ही लगता है
) एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए आपको कुल पांच बार टीके लगवाने पड़ेंगे , ,,१४ और २८ दिन पर यहाँ ज़ीरो दिन पहले टीके का दिन है ये टीके मांस पेशियों ( इंट्रामस्कुलर ) में लगाये जाते हैं
) टीकों पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए आजकल इंट्राडरमल रूट का इस्तेमाल किया जा रहा है इसमें हर बार . एम् एल के दो इंजेक्शन लगाये जाते हैं ,, और २८ दिन पर इस तरह इस तरीके से करीब ७५-८० % की बचत हो जाती है

कुत्ता काटने पर क्या नहीं करना चाहिए ?

* जख्म पर हल्दी , मिर्च , नमक आदि लगाना
* जख्म पर पट्टी बंधना
* टाँके लगाना
* इलाज़ कराना
* टीके का कोर्स पूरा करना

एक बार कुत्ता काटने पर इलाज़ में कम से कम २०००-२५०० रूपये तक का खर्चा आता है लेकिन सरकारी अस्पतालों में यह इलाज़ मुफ्त उपलब्ध है
इसीलिए हमारे अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढती जा रही है


अंत में सभी का धन्यवाद करते हुए हमने एक बार फिर सबका ध्यान इस ओर दिलाया कि जब तक गली में घूमने वाले कुत्तों की आबादी कम नहीं होगी या कोई अन्य उपाय नहीं खोजा जाता , तब तक एंटी रेबीज़ उपचार पर यूँ ही पैसा बर्बाद होता रहेगा

लेकिन ये सब हमें देखकर हंस क्यों रहे हैं ?

भई देखकर नहीं हंस रहे , बल्कि सुनकर हंस रहे हैं
विषय का सारांश प्रस्तुत करते हुए हमने अपनी एक कविता की कुछ पंक्तियाँ सुनाकर अपना संदेश सब तक पहुँचाया :

जब कुछ पशु प्रेमियों ने परस्पर किया विचार
तब गली गली में कुत्तों की हो गई भरमार

अब नगर निगम के अधिकारी तो चैन की बंसी बजाते हैं
और कुत्ते काटे के इलाज़ पर , सरकार के करोड़ों खर्च हो जाते हैं

रेबीज़ कंट्रोल करने का ये वैसा ही सलीका है
जैसे गड्ढा खोदो -गड्ढा भरो , रोज़गार दिलाने का ये भी एक तरीका है

आशा करता हूँ कि इस लेख को पढने के बाद अब आप भी कुत्ता काटे के इलाज के एक्सपर्ट बन गए होंगे