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Wednesday, April 13, 2011

चल एक चटाई और लगा भाई के लिए ---

बात बहुत पुरानी हैजितने पुराने हम हैं , समझो उसकी आधी पुरानी है

एक विवाह योग्य युवक शादी के लिए लड़की देखने निकला । या यूँ कहिये कि लड़की वालों के रिश्ते आने लगे । युवक की एक ही शर्त थी कि लड़की डॉक्टर होनी चाहिए , वो भी हरयाणवी ।

अब हरियाणा में लड़कियां ही नहीं होती , फिर डॉक्टर हाँ से मिलती

थक हार कर युवक ने सोचा --क्यों न किसी सिद्ध महात्मा की मदद ली जाये ।

वह एक पहुंचे हुए साधु के डेरे पर पहुंचा । वहां जाकर देखा --सात चटाईयां बिछी थीं । हर चटाई पर एक साधु आसन लगाए बैठा था ।

युवक ने मुखिया साधु से कहा --बाबा , बहुत मुसीबत में हूँ । शादी करना चाहता हूँ , लेकिन लड़की नहीं मिल रही । कोई मन्त्र या उपाय बताओ ।

मुखिया साधु ने छोटे साधु से कहा -- चल एक चटाई और लगा भाई के लिए

युवक ने कहा --बाबा मैं समझा नहीं ।

बाबा बोले --बच्चा , यदि हमारे पास कोई मन्त्र होता तो क्या हम आज यहाँ चटाई बिछा कर बैठे होते ! !


आश्रम के बाबा तो नाम के ही बाबा थे लेकिन ऊपर बैठे उस बाबा में बहुत दम है

आज उस युवक की शादी की २७ वीं सालगिरह है


मोंटमोरेंसी , क्यूबेक , कनाडा --जुलाई २००९


जितना समय शादी से पहले अकेले बिताया , उतना ही शादी के बाद पूरा हुआ है

यौवन की तपन हो या , वृद्धावस्था की शीत
हर पल साथ निभाए जा , सच्चा मन का मीत

नोट : गत वर्ष बैसाखी पर आज ही के दिन १०० वीं पोस्ट लिखी थीआज यह २०० वीं पोस्ट है
आप सब को बैसाखी की हार्दिक शुभकामनायें ।



Thursday, December 31, 2009

वर्ष का अंतिम दिवस और मेरे ब्लॉग की पहली वर्षगाँठ .

आज वर्ष २००९ का अंतिम दिवस
ये वर्ष भी गुजर गया, इक झोंके की तरह।
लेकिन अच्छा रहा, पिछले वर्षों की भांति।

२००७ गुजरा, हँसते-हंसाते , इतिश्री हुई दिल्ली हंसोड़ दंगल के साथ।

२००८ , कवियों की संगत में गुज़रा। और हम भी बन गए छोटे मोटे कवि।

२००९ में शुरू की ब्लोगिंग। और आज एक साल पूरा हो गया , ब्लोगिंग को।

लेकिन ये सब , अपना काम छोड़कर नहीं
अब २०१० क्या लेकर आ रहा है, ये तो वक्त ही बताएगा।


ब्लोगिंग जगत में करीब १०,००० ब्लोगर्स हैं, लेकिन सिर्फ १०० के करीब ही सक्रीय और जाने माने ब्लोगर्स हैं। ऐसा ब्लोगवाणी पर देख कर लगता है।
क्योंकि दस में से एक दो को ही एक दो से ज्यादा टिप्पणियां मिलती हैं। कुछ को तो एक भी नहीं।

यह हिंदी ब्लोगिंग के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं

हालाँकि आरम्भ में हमारा भी यही हाल था। प्रारंभिक पोस्ट्स पर एक या दो या फिर एक भी नहीं।
छै महीने लग गए, लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में। और ये जुलाई के बाद ही संभव हो सका की टिप्पणियों की संख्या में दहाई का आंकड़ा पार होने लगा।

और इसके लिए मैं आभारी हूँ आप सब का , विशेष तौर पर वो जो शुरू से ही मेरे साथ हैं, और वो भी जो अभी हाल में ही जुड़े हैं। यहाँ मैं कुछ नाम विशेष रूप से लेना चाहूँगा ।

मेरे ब्लॉग पर सबसे पहले आकर और नियमित रूप से जुड़े रहने वालों में हैं, क्रम से ---
संगीता पूरी जी जो सबसे पहले आई और आज तक अपना समर्थन दे रही हैं।
डॉक्टर श्याम सखा श्याम , जो तीस साल से बहुत सुन्दर कवितायेँ लिखते आ रहे हैं।
श्री डी के मुफलिस जी, जिनकी खूबसूरत शायरी के हम कायल हैं।
श्री चंदर मोहन गुप्ता जी, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साहस बढाया।
श्री समीर लाल जी, पहले और अकेले मित्र जिनसे मैं व्यक्तिगत तौर पर मिला, वो भी घर से १५,००० किलोमीटर दूर एजेक्स, कनाडा में। सही मायने में मेरी पहचान , समीर लाल जी से मिलने के बाद ही बनी।
समीर
भाई ने सभी नए ब्लोगर्स का हमेशा उत्साह वर्धन किया है, मेरा भी
हरकीरत हीर जी, जिनकी रचनाएँ तो बेहतरीन होती ही हैं, उनकी टिप्पणियां भी बहुत आत्मीयता से भरपूर होती हैं।
अलबेला खत्री जी, भले ही मंच पर व्यस्त रहते हों, लेकिन ब्लोगिंग के लिए वक्त निकाल ही लेते हैं, और उनकी टिपण्णी पढ़कर उनके कला श्रेष्ठ होने का आभास होता है।
बबली जी, सुशीला पूरी जी, श्यामल सुमन जी , अमिताभ श्रीवास्तव जी और प्रेम फरुखाबादी जी का भी अक्सर सहयोग मिलता रहता है।

अगस्त में साथ मिला --खुशदीप सहगल का , जिन्होंने ब्लॉग तो मेरे साथ ही बनाया था, लेकिन सक्रीय ब्लोगिंग शुरू की अगस्त में । और जाने कब एक अटूट रिश्ता बन गया , ब्लोगर बंधू का। खुशदीप ने इतना सम्मान दिया की हमें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होने लगा एक ब्लोगर के रूप में।
आज
वो ब्लॉग जगत के सबसे तेज़ी से चमकते सितारे हैं

इसी समय कई और वरिष्ठ और सम्मानीय बंधुओं से परिचय हुआ, जिनमे डॉ रूप चाँद शास्त्री मयंक जी, श्री नीरज गोस्वामी जी, और श्री शरद कोकास जी उल्लेखनीय हैं। युवाओं में मुरारी पारीक और सुनीता शर्मा जी ने अपना विश्वास व्यक्त किया , हमारे लेखन में।

सितम्बर में परम आदरणीया निर्मला कपिला जी, रचना दीक्षित जी, प्रसन्न चतुर्वेदी जी, श्री देवेंदर जी, डॉ अरविन्द मिश्रा जी, और श्री महेंदर मिस्र जी का आगमन हुआ हमारे ब्लॉग पर और ब्लॉग की इज्ज़त बढ़ गयी, आप सब के आने से ।

अक्तूबर में परिचय हुआ श्री पी सी गोदियाल जी , श्री अजय कुमार जी, भाई महफूज़ अली, अदा जी, दीपक मशाल , ऍम वर्मा जी, श्रीमती आशा जोगलेकर जी, पी अन सुब्रामनियम जी, पंडित किशोर जी, शमा जी, के के यादव जी से

इसी समय भीष्म पितामह के रूप में श्री जे सी साहब ने अपना योगदान देना शुरू किया और अपने अपार अनुभव से समय समय पर हमारी जानकारी बढाई , विशेष तौर पर जिंदगी के अन्भिग्य पहलुओं के बारे में।
नवम्बर में सामीप्य मिला श्री योगेन्द्र मोदगिल जी , श्री परमजीत बाली जी, श्री अजित वडनेरकर जी, सुलभ सतरंगी, श्याम कोरी उदय जी, और श्री श्रीश पाठक जी का

इसी समय वरिष्ठ एवम सम्मानीय ब्लोगर्स श्री सी ऍम प्रशाद जी, श्री दिगंबर नास्वा जी, और युवा ब्लोगर मिथलेश दूबे का प्रथम आगमन हुआ

अंत में जिनका बेसब्री से इंतज़ार रहा , उनके भी दर्शन हुए --ताऊ रामपुरिया, श्री पाबला जी, श्री राज भाटिया जी, श्री ललित शर्मा जी और ब्लोगर्स के ब्लोगर श्री अजय कुमार झा जी

मैं उपरोक्त सभी ब्लोगर साथियों का अहसानमंद रहूँगा जिनकी वज़ह से मैं आगामी वर्ष में भी अपना योगदान देने का साहस और शक्ति जुटा पा रहा हूँ।

मैं उन सभी साथियों का भी आभारी हूँ जो मुझे पढ़ते हैं, लेकिन समय के अभाव में टिपण्णी नहीं दे पाते।
कुछ नाम अनायास छूट गए होंगे, मैं उनसे माफ़ी मांगते हुए आगे भी सहयोग की अपेक्षा रखता हूँ।

नव वर्ष के लिए संकल्प :

नव वर्ष में मेरा प्रयास रहेगा की कम से कम सप्ताह में एक , और ज्यादा से ज्यादा दो पोस्ट लिखूं।
कम ज्यादा
क्योंकि और भी ग़म हैं ज़माने में
ब्लोगिंग जिंदगी का एक हिस्सा है, लेकिन जिंदगी नहीं
याद रहे , घर में और भी लोग हैं, जिनके लिए आपका समय सुरक्षित रहना चाहिए

आप सब को नव वर्ष की हार्दिक बधाई अवम शुभकामनायें