top hindi blogs
Showing posts with label चूमना. Show all posts
Showing posts with label चूमना. Show all posts

Thursday, September 8, 2011

प्यार करने वाले कभी क्यों डरते नहीं ---

स्नेह भाव के मामले में मनुष्यों और पशुओं में एक बड़ी समानता है --दोनों प्रजातियों में व्यस्क, विशेषकर मादा अपने बच्चों को चूम कर अपने स्नेह और भावनाओं का इज़हार करती हैं । यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है ।

यदि मनुष्य की बात की जाये तो मनुष्य चुम्बन का कई तरह से प्रयोग करता है ।

* एक मां का संतान के प्रति ममता और स्नेह । मां हर हाल में अपने बच्चे को चूम सकती है ।
* कुछ देशों में यह आदर और सम्मान का प्रतीक माना जाता है । हालाँकि इस चुम्बन में खाली गाल से गाल मिलाते हैं ।
* प्यार और रोमांस का प्रतीक --प्रेमी-प्रेमिका और पति पत्नी के बीच चुम्बन । यह अक्सर होठों पर होता है । ज़ाहिर है , इसमें सलाईवा ( लार ) का आदान प्रदान होता है ।

अब यदि किसी के मूंह से बदबू आ रही हो तो सारा प्यार उड़न छू हो सकता है ।

किसी
भी मनुष्य के मूंह से बदबू आने के कारण हो सकते हैं :

* नियमित रूप से दन्त मंजन या ब्रश न करना । शहर में अक्सर लोग खाने के बाद कुल्ला भी नहीं करते क्योंकि यह अभद्र माना जाता है । इसीलिए शहर में भी बहुत से लोगों के मूंह से बदबू आ रही होती है ।
* दांतों में कीड़ा --डेंटल केरीज। इससे भी मूंह से बदबू आ सकती है ।
* अनियंत्रित मधुमेह तथा अन्य असाध्य रोग ।
* विशेष किस्म के खाद्य पदार्थ जैसे लहसुन , प्याज़ , मूली आदि भी अपना प्रभाव छोड़ते हैं ।

उपरोक्त परिस्थितियों में न सिर्फ मूंह से आने वाली बदबू प्यार की दुश्मन बन सकती है बल्कि व्यक्ति विशेष को सार्वजनिक तौर पर भी उपहास और उपेक्षा का पात्र बना सकती है ।

लेकिन
कहते हैं --प्यार करने वाले कभी डरते नहीं । वे इन्सान तो क्या कुत्तों को भी प्यार करने में नहीं हिचकते ।

अब
ज़रा इस सुंदरी को ही देखिये :


चित्र गूगल से साभार ।

माना कुत्ता एक स्वामिभक्त , वफ़ादार , भरोसेमंद और प्यारा सा पालतू प्राणी है । लेकिन क्या इस तरह कुत्ते से प्यार करना सही है ?

वैसे तो प्यार करने के लिए दुनिया में मनुष्यों की कमी नहीं है । और प्यार करने लायक भी बहुत हैं । लेकिन यदि पालतू प्राणियों से भी प्यार किया जाए तो इन बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है :

कुत्ते से मूंह चटवाने से पहले इतना जान लीजिये --कुत्ते से आपको कई बीमारियाँ लग सकती हैं , जिन्हें जूनोटिक डिसिजिज कहा जाता है , यानि जानवरों से मनुष्य को लगने वाले रोग ।
और ये हैं :

* रेबीज जो १०० % घातक बीमारी है . इसका रोगी पानी नहीं मांगता ।
* वोर्म्स इन्फेस्टेशन -- जैसे हुक्वोर्म , राउंड वोर्म , टेप वोर्म ।
हुक्वोर्म से खून की कमी हो जाती है ।
राउंड वोर्म से पेट में दर्द रहता है ।
टेप वोर्म से Hydatid disease और सिस्टीसर्कोसिस होता है ।
* लेपटोस्पाइरोसिस-- यह भी एक भयंकर रोग का रूप धारण कर सकती है ।
* टिक बोर्न रोग

आप कह सकते हैं कि आप तो अपने कुत्ते को हमेशा साफ सुथरा , और नहला धुलाकर रखते हैं ।

लेकिन अब ज़रा यहाँ देखिये :



दिल्ली
के लोदी गार्डन में पिकनिक मनाने आए ये मां बेटा /बेटी , भले ही जोरबाग में रहने वाले किसी फोरेन डिप्लोमेट के डार्लिंग हों , लेकिन ये अपने लम्बे बालों में घास से कितने कीटाणु या पेरासाईट लेकर गए होंगे , यह कहा नहीं जा सकता ।

और जब इनका मालिक प्यार से इनसे गले मिलेगा या चूमा चाटी करेगा , तो उसका भी संक्रमित होना तय है ।

जी हाँ , कुत्ते की लार में रेबीज के वायरस होते हैं
बालों में वोर्म्स के अंडे और टिक्स हो सकते हैं
पेशाब से लेपटोस्पाइरोसिस का संक्रमण हो सकता है

क्या यह जानकर भी आप अपने कुत्ते के साथ खाना खाना , सोना या चूमकर प्यार करना चाहेंगे ?
मर्ज़ी आपकी