पुरानी दिल्ली का दिल है --चांदनी चौक । सही मायने में देसी डाउन टाउन । मुग़लों और अंग्रेजों के ज़माने में चांदनी चौक ने बहुत उतार चढाव देखे हैं । वर्तमान में यह क्षेत्र दिल्ली का ट्रेडिंग का सबसे बड़ा गढ़ है । विशेषकर कपड़ों के मामले में , यहाँ के कटरे बहुत मशहूर हैं ।
लेकिन एक चीज़ जो और मशहूर है , वह है यहाँ का खाना ।
कई साल से बड़ा मन था कि एक बार यहाँ घूमकर यहाँ के खाने का मज़ा लिया जाए । आखिर अवसर मिल ही गया जब हम चांदनी चौक के कुलिनरी टूर पर निकल पड़े ।
यहाँ आने के लिए वैसे तो मेट्रो सबसे बढ़िया तरीका है लेकिन हमें तो अपनी गाड़ी में चलने की आदत पड़ी है । कारों के लिए पार्किंग भी मेट्रो स्टेशन के साथ ही बनी है ।
लेकिन अन्दर घुसते ही टिकेट वाले ने बताया कि टिकेट ले लो परन्तु जगह न मिलने पर पैसे वापस नहीं होंगे ।
दुकान के नाम पर मुश्किल से तीन फुट चौड़ी और आठ फुट लम्बी जगह है ,लेकिन खाने के लिए बहुत मारा मारी रहती है ।
नटराज पर दही भल्ला और आलू की टिक्की का स्वाद लेकर हम चल पड़े दायीं ओर ।
इसी बीच एक गली आती है जिसका नाम है --परांठे वाली गली । यह नई सड़क और गुरुद्वारा शीशगंज के बीच पड़ती है ।
इसका प्रवेश मुश्किल से ६ फुट का होगा । दोनों तरफ दुकाने और अत्यंत भीड़ भाड़ --घुसना भी बड़ी हिम्मत का काम है ।
आलू परांठा से लेकर काजू और बादाम तथा खुरचन के परांठे ३० रूपये से लेकर ५० रूपये तक मिलते हैं । एक प्लेट में कम से कम दो परांठे लेने पड़ते हैं ।
बेशक , स्वाद बेमिसाल होता है ।
यहाँ से दायें मुड़ने पर बहुत सी खाने की दुकाने हैं जो लोकल नमकीन और कचौड़ी आदि बेचते हैं । साथ ही यहाँ ड्राई फ्रूट्स और खोया भी बहुत बिकता है ।
यहाँ से हमारी वापसी हुई । वापसी में फिर नई सड़क के चौक पर पहुंचे, जहाँ है --टाउन हॉल । यहाँ कुछ समय पहले तक दिल्ली नगर निगम के ऑफिस और निगम पार्षदों की असेम्बली होती थी । अब शिफ्ट होकर नगर निगम के नए भवन सिविक सेंटर में चले गए हैं ।
अब यह हेरिटेज भवन खाली पड़ा नष्ट हो रहा है ।
इसके सामने हज़ारों कबूतर दाना चुग्गा करते हैं ।
लेकिन देसी घी की बनी इनकी जलेबी ३०० रूपये किलो मिलती हैं और हमेशा भीड़ लगी रहती है ।
इसका मालिक बैठा बैठा यंत्रवत ऐसे नोट बटोर रहा था जैसे बटोरते बटोरते बोर हो गया हो ।
और इस तरह पूरा हुआ , हमारा कुलिनरी टूर चांदनी चौक का ।
( यह टूर हमने पिछले साल इन्ही दिनों में किया था। लेकिन पोस्ट का नंबर अभी आ सका। खाने पीने के रेट अब निश्चित ही बढ़ गए होंगे। )
नोट : चांदनी चौक में इतनी भीड़ होती है कि सड़क और यहाँ की गलियों में आदमी कंधे से कन्धा मिलाकर चलते हैं । अपनी जेब का धयान रखिये । बेहतर है जेब में पर्स ही न रखें । घर जाकर दो गोली मेट्रोनिडाजोलऔर एक नोरफ्लोक्सासिन अवश्य खा लें यदि पेट में जगह बाकि हो तो ।

