top hindi blogs
Showing posts with label एल टी सी. Show all posts
Showing posts with label एल टी सी. Show all posts

Sunday, June 19, 2011

मुफ्त दो घूँट पिला दे तेरे सदके वाली---

हर छै महीने में दो सप्ताह का अर्जित अवकाश यह सबसे बड़ा फायदा है निस्वार्थ भावना से सरकारी नौकरी करने का

हालाँकि स्वार्थी और भ्रष्ट सरकारी नौकरों को भी यह सुविधा उतनी ही उपलब्ध है

रोजमर्रा के काम से ब्रेक लेना भी उतना ही आवश्यक है जितना टी वी पर कमर्शियल ब्रेक । फर्क बस इतना है कि इस ब्रेक से वो अपना खाता रीचार्ज करते हैं और हम अपनी ऊर्जा ।

साथ ही हर चार साल में मिलती है एल टी सी --जिस के दम पर हम भी घूम आते हैं दूर दराज़ की ज़गहों पर हवाई ज़हाज़ में बैठकर ।

वरना अपना तो वो हाल है कि ख्याल का वो शे 'र याद आता है --

मुफ्त दो घूँट पिला दे तेरे सदके वाली
हम गरीबों से कहीं दाम दिए जाते हैं

लेकिन यहाँ साकी भी उदारतापूर्ण दो घूँट नहीं बल्कि पूरा पैमाना भर के देता है । यानि एल टी सी के साथ १० दिन की तनख्वाह मुफ्त ।

बस एक ही शर्त है कि टिकेट एयर इण्डिया की लेनी पड़ेगी , भले ही दाम दुगने देने पड़ें

यानि --एक हाथ ले , एक हाथ दे --कहावत का पूर्णतया चरित्रण ।

वैसे एयर इण्डिया से सफ़र करना उतना बुरा भी नहीं

एक तो खाना मुफ्त में मिलता है । और हर स्टॉप के बाद मिलता है । फिर हैरानी की बात यह कि खाने की क्वालिटी भी ठीक ठाक लगी । ऊपर से थोडा बहुत मनोरंजन भी हो जाता है ।

एक फ्लाईट में एयर होस्टेस ने खाना सर्व करते हुए एक यात्री से पूछा --वेज या नॉन वेज ?
यात्री ने कहा --नॉन वेज ।
एयर होस्टेस --सर , नॉन वेज तो ख़त्म हो गया है ।

दूसरे , यहाँ आपको एयर होस्टेस भी हर उम्र और रंग रूप की देखने को मिल जाएँगीऐसी वैराइटी भला और कहाँ मिलेगी

लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह कि सारी फ्लाइट्स पूर्णतया टाइम पर ।

परिस्थितिवश पिछले वर्ष कहीं जाना न हो सका । इसलिए जीवन की नीरसता से नी और ता हटाने के लिए हमने भी दोनों सुविधाओं को ग्रहण करते हुए कार्यक्रम बना लिया --ऊटी घूमने का ।

इसीलिए ब्लोगिंग से भी १० दिन का ब्रेक हो गया । हालाँकि इस आभासी दुनिया में लोग एक दुसरे को बड़ी जल्दी भूल जाते हैं ।

शायद अदम ने भी इन्ही हालातों पर यह शे 'र लिखा होगा --

शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हो आप
महफ़िल में इस ख्याल से फिर गया हूँ

इसलिए हमने भी १० दिन का ब्रेक लिया और अब सन्मुख हैं आपके , एक नई और अलग सी पोस्ट लेकर

इस बीच देश की हालत को लेकर ब्लोगिंग में बहुत गहमा गहमी नज़र आई । काफी संख्या में ब्लोगर बंधु निराश नज़र आए ।

लेकिन किसी ने कहा है --लाइफ हैज टू गो ओन

ऊटी :

तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत श्रंखला में २२५० मीटर की ऊँचाई पर स्थित ऊटी को पर्वतों की रानी ( क्वीन ऑफ़ हिल्स ) कहा जाता है । हालाँकि यह ख़िताब मसूरी के हिस्से भी आता है । लेकिन उत्तर भारत में स्थित मसूरी जहाँ अपनी चमक धमक और मॉल रोड के लिए मशहूर है , वहीँ ऊटी अपनी हरियाली , जंगल , चाय के बगान और खूबसूरत वादियों के लिए प्रसिद्द है ।

लेकिन ऊटी का गुणगान अगली पोस्ट में ।

अभी तो आपको दिखाते हैं --स्टर्लिंग रिजोर्ट जहाँ एक सप्ताह का वास ऎसी तरो ताज़गी देता है जैसा स्पा में एक घंटा बॉडी मेसाज देता है ।


स्टर्लिंग रिजोर्ट --फर्न हिल ऊटी


पोर्टिको और प्रवेश द्वार


अपार्टमेंट्स का लेआउट


रिजोर्ट का ड्राइव वे


रिजोर्ट से घाटी का द्रश्य

स्टर्लिंग रिजोर्ट्स --एक होलीडे टाइम शेयर कंपनी है जो देश भर में १४ रिजोर्ट्स चला रही है ।
ऊटी में इसके दो रिजोर्ट्स हैं --फर्न हिल और एल्क हिल । दोनों आमने सामने की पर्वतीय चोटी पर बने हैं , जिनसे चारों ओर की घाटी का ३६० डिग्री व्यू नज़र आता है ।

स्टर्लिंग रिजोर्ट्स एक घर की तरह आरामदायक अस्थायी निवास प्रदान करता है । यानि आप यहाँ अपने घर की तरह रह सकते हैं ।

चाहें तो घर में ही , जिसमे ड्राइंग डाइनिंग , बेडरूम और किचन --सभी होते हैं , आप घर का बना खाना खा सकते हैं । हालाँकि ९० % लोगों की घरवाली सहयोग करने से मना कर देती हैं ।

आखिर छुट्टियों पर आए हैं , यहाँ भी खाना क्यों बनायें । लेकिन ज़रा सोचिये , घर से हज़ार मील दूर खूबसूरत वादियों के बीच आपको गर्मागर्म चाय और पकौड़े आपकी ही श्रीमती जी बनाकर खिलाएं तो कितना मज़ा आएगा ।

लेकिन घरवाली सहयोग न भी दे तो चिंता नहीं । क्योंकि यहाँ रिजोर्ट में ही फ़ूड मस्ती के नाम से जो बफ़े परोसा जाता है उसे देखकर किस का मन करेगा खाना बनाने का ।

बफ़े में पचासों आइटम देखकर बस एक ही प्रोब्लम सामने आती है कि कितना खाया जाये । अब यह तो आप पर ही निर्भर करता है । कम से कम भी खा सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा भी ।

हमने तो यही देखा है कि एला कार्टा में लोग खाने से पहले सोचते है , बफ़े में खाने के बाद ।

नोट : अगली पोस्ट में ऊटी के मनोरम द्रश्य देखना मत भूलियेगा