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Sunday, December 26, 2010

आस्था -- या अंधविश्वास ? आस्था की इन तस्वीरों को देखकर आपका दिल दहल सकता है ।

हमारे देश में विभिन्न धर्मों , जातियों और समुदायों के लोग मिलकर रहते हैं सबकी अपनी अपनी धारणाएं , मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं

लेकिन एक बात जो बहुत खलती है , वो है समाज में व्याप्त अंध विश्वास ।

टी वी पर एक विज्ञापन बार बार दिखाया जा रहा थासभी बिमारियों का शर्तिया इलाज़ --बाबा --???--गृह कलेश , संतान की प्राप्ति , नौकरी , प्रेम विवाह , वशीकरण , ओपरा पराया , जादू टोना , मर्दाना कमजोरी आदि सभी रोगों के शर्तिया इलाज़ के लिए एक बार मिलें --हमारी फीस मात्र २५१ रूपये --गारंटी कार्ड के साथसाथ में पता और फोन नंबर भी

भले ही चिकित्सा के क्षेत्र में आज हम अग्रणी हैं । मेडिकल टूरिज्म भी बढ़ने लगा है । लेकिन आज भी हमारी भोली भाली जनता अपने बच्चों का किस तरह इलाज़ कराती है , आइये देखते हैं ----



यह महाशय क्या कर रहे हैं ? ये एक बच्चे का इलाज़ कर रहे हैं इसे देखकर आप पर क्या बीत रही होगी , यह हम समझ सकते हैं

और इन्हें देखिये --ये भी बच्चों का भला कर रहे हैं ? उन्हें २० फुट ऊंचाई से नीचे फेंककर।



पकड़ लिया --हो गया बेडा पार


ये नंगे बाबा --- ज़नाब तो मूंह पर थप्पड़ मारकर आशीर्वाद दे रहे हैं । आखिर यहाँ प्रसाद लेने वालों की भी तो कमी नहीं ।


और यह क्या ? इन बच्चों को ज़मीन में क्यों गाड़ा हुआ है ?


अरे भाई , ये बच्चे मानसिक तौर पर विक्षिप्त हैं यहाँ नका भी इलाज़ हो रहा है

इसी तरह की जाने कितनी ही भ्रांतियां हमारे समाज में फैली हैं

बच्चों को मगरमच्छ के मूंह में डालकर, बावली के ठंडे पानी में डुबकी लगवाकर , या पुण्य प्राप्त करने के लिए खुद को गाय भैंसों के पैरों तले रौन्दवाकर , या फिर एक दूसरे को पत्थर मारकर हम क्या पुण्य प्राप्त करते हैं ?


जाने हम कब समझेंगे ?

नोट : सभी तस्वीरें टी वी के न्यूज चैनल्स से ली गई हैंयह पोस्ट किसी धर्म या समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं लिखी गई है