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Tuesday, March 8, 2011

क्यों होती हैं महिलाएं घरेलु हिंसा की शिकार --अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विचार --

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है
आइये देखते हैं क्या है आज महिलाओं का स्टेटस हमारे समाज में ।

सैक्स रेशो : पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या काफी कम । दिल्ली में अभी भी १००० पुरुषों पर सिर्फ करीब ८५० महिलाएं ।

शिक्षा : २००१ की जनगणना के अनुसार देश में ७५ % पुरुष और ५३.७ % महिलाएं शिक्षित हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या मात्र ४६ % है ।
व्यवसाय : ५१.७ % पुरुष और २५.६ % महिलाएं रोजगार में हैं ।

ज़ाहिर है , अधिकांश महिलाएं आज भी हर क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले पीछे हैं

महिलाओं के विरुद्ध अपराध :

११८ करोड़ आबादी वाले देश में जहाँ ७१ % लोग गावों में रहते हैं , ३८ % गरीबी रेखा से नीचे और बड़ी संख्या में अशिक्षित लोग हैं , वहां महिलाओं के साथ अत्याचार भी दिन पर दिन बढ़ रहे हैं ।

बलात्कार , अपहरण , छेड़खानी , दहेज़ उत्पीड़न और अत्याचार जैसे जघन्य अपराध समाज में फैले हैं

लेकिन एक और अपराध जिसे अकसर नज़रअंदाज़ किया जाता है , वह है महिलाओं के प्रति घरेलु हिंसा

घरेलु हिंसा यानि पति या घर के किसी अन्य सदस्य द्वारा महिला का उत्पीड़न ।
ऐसा नहीं है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा सिर्फ कम पढ़े लिखे या गरीब परिवारों में ही देखने को मिलती है । घरेलु हिंसा हर वर्ग , समुदाय और धर्म के लोगों में बराबर व्याप्त है ।

क्यों होती है घरेलु हिंसा ?

इसके लिए जिम्मेदार है हमारी सोच ।
पुरुष प्रधान समाज में अभी भी महिलाओं का दर्ज़ा पुरुषों से नीचे ही समझा जाता है ।
पति के लिए पत्नी उसकी एक प्रोपर्टी है , जिसे वह जैसे चाहे इस्तेमाल कर सकता है ।
पति गृह मालिक है , दाता है , बलशाली है, वह मर्द है ।
पति के लिए पत्नी को पीटना अपना आधिपत्य स्थापित करने का साधन समझा जाता है ।

घरेलु हिंसा के प्रकार :

१) शारीरिक
२) मानसिक
३) यौन शोषण
४) भावनात्मक शोषण
५) आर्थिक अत्याचार

इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च , जयपुर और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, दिल्ली द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में बताया गया कि डोमेस्टिक वायलेंस ( घरेलु हिंसा ) की शिकार महिलाओं के लिए भारत सरकार ने एक अधिनियम लागु किया है --प्रिवेंशन ऑफ़ डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट २००५ --जिसके अंतर्गत निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करने का प्रायोजन है :

* राज्य के हर जिले में एक प्रोटेक्शन ऑफिसर की नियुक्ति , जो पीड़ित महिला को कानूनी सहायता लेने में सहायता करेगा ।
* पीड़ित महिला , या उसका कोई भी प्रतिनिधि या प्रोटेक्शन ऑफिसर कोर्ट से महिला के लिए कानूनी सहायता मांग सकता है ।
* मजिस्ट्रेट पीड़ित महिला के लिए एक सर्विस प्रोवाईडर नियुक्त कर सकता है ।
* कोर्ट शोषण करने वाले पति या अन्य व्यक्ति को अवरुद्ध और पीड़ित महिला को आर्थिक राहत प्रदान कर सकता है ।

घरेलु हिंसा से पीड़ित महिलाओं के उपचार में डॉक्टर्स की भी अहम् भूमिका है । क्योंकि इनके साथ अतिरिक्त सहानुभूति , संयम और संवेदना की ज़रुरत होती है ।

साथ ही अस्पताल में भी उन्हें सभी कानूनी जानकारी प्रदान करने के लिए जोर दिया गया है ।

ऐसी महिलाओं को सही मार्गदर्शन की ज़रुरत होती है , क्योंकि यहाँ प्रताड़ित करने वाला स्वयं उसका पति होता है । इसलिए बहुत संभल कर कदम उठाने की ज़रुरत होती है ।

लेकिन सबसे ज्यादा ज़रुरत है अपने अधिकारों के बारे में जानना

इसलिए जितना हो सके इस विषय पर बहस और विचार विमर्श की ज़रुरत है ताकि समाज में फैले इस अमानवीय कृत्य को समाप्त किया जा सके