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Saturday, November 6, 2021

दीवाली का बदलता रूप -


ना मैं कहीं गया, ना कोई मेरे घर आया,

क्या बताऊँ, दीवाली का पर्व कैसे मनाया। 


ना कोई गिफ्ट ना ग्रीटिंग कार्ड ना लैटर,

ना कोई ई मेल ना कोई फोन ही आया।


कभी जाते थे मंत्री और अफसरों के घर, 

अब अपने ही घर बैठ आराम फ़रमाया।   


कभी आते थे सैंकड़ों संदेश मोबाइल पर,

अब एक एस एम एस तक नहीं आया।


पर भरा पड़ा है मोबाइल रंग बिरंगे चित्रों से,

मानो सबने पर्व वाट्सएप्प पर हो मनाया। 


एक एक ने सौ सौ को दी चित्रों सहित बधाई,

सौ सौ ने फिर सौ सौ को सन्देश पहुंचाया।    


दर्ज़नों ग्रुप्स के हज़ारों मित्रों का जज़्बा जब,

आंखें बंद कर देखा तो पागल मन भर आया। 


प्रदूषण और कोरोना ने ऐसा हाल किया "दराल", 

कि क्या बताऊँ, हमने दीवाली पर्व कैसे मनाया। 






6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 08 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. वाह!!!
    व्हाट्सएप पे दिवाली मैसेज वाली पर पटाखे फैलाते प्रदूषण
    बहुत ही सुन्दर सार्थक सृजन।

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