Saturday, October 21, 2017

वर्तमान परिवेश में हमारे पर्व --


दिवाली के अवसर पर हिन्दुओं के पंचपर्व की श्रंखला में आज अंतिम पर्व है , भैया दूज।  यह महज़ एक संयोग हो सकता है कि हिन्दुओं के सभी त्यौहार तीज के बाद आरम्भ होकर मार्च में होली पर जाकर समाप्त होते हैं।  फिर ५ महीने के अंतराल के बाद पुन: तीज पर आरम्भ होते हैं। निश्चित ही इसके सामाजिक , आर्थिक , भूगोलिक  और मौसमी कारण भी हो सकते हैं।  मार्च के बाद गर्मियां आरम्भ हो जाती हैं जो देश में किसानों के लिए फसल काटने और धनोपार्जन का समय होता है। साथ ही गर्मी और बरसात का मौसम भौतिक सुविधाओं के अभाव में गांवों में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत कष्टदायक रहता था। इसलिए सावन की रिमझिम फुहारों के साथ जब मौसम सुहाना होने लगता है , और किसानों की मेहनत की कमाई भी फसल के रूप में घर आ जाती है , तब आराम के दिनों में तीज त्यौहारों को मनाने का  आनंद आता है।शायद यही कारण आगे चलकर सम्पूर्ण देश में पर्वों का कैलेंडर बनाने में सहायक सिद्ध हुआ होगा।

समय के साथ देश में हुए विकास के कारण निश्चित ही देशवासियों के रहन सहन , दिनचर्या और सामर्थ्य में परिवर्तन आया है।  आज यहाँ भी किसी भी विकसित देश में मिलने वाली सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बदले हुए परिवेश में हमारी जीवन शैली बदलना स्वाभाविक है। पर्वों के स्वरुप भी बदल रहे हैं। आज आवश्यकता है कि हम वर्तमान परिवेश अनुसार अपनी सोच को भी बदलें। आदिकाल से चले आये पर्वों की कालग्रस्त परमपराओं और कुरीतियों को त्याग कर सिर्फ अच्छी बातों को ही अपनाएं। जो रीति रिवाज़ सदियों पहले तर्कसंगत रही होंगी , वे अब अर्थहीन हो गई हों तो उन्हें छोड़ना और तोडना ही अच्छा है।  

त्यौहार हमारे जीवन में माधुर्य प्रदान करते हैं।  यह सामाजिक , पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों को सुदृढ़ बनाने का अच्छा अवसर भी होता है। इसलिए पर्व पर सभी आपसी मन मुटाव भुलाकर सभी को एक होकर मर्व मनाना चाहिए।  भले ही विभिन्न धर्मों के पर्व भिन्न होते हैं , लेकिन सभी धर्मों के पर्वों का सम्मान करते हुए दूसरे धर्मों के पर्वों में भी यथानुसार अपने निकटतम सहयोगी और मित्रों को बधाई अवश्य देनी चाहिए। तभी समाज और देश में पारस्परिक सौहार्द बनाये रखा जा सकता है।   

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-10-2017) को
    "एक दिया लड़ता रहा" (चर्चा अंक 2765)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    दीपावली से जुड़े पंच पर्वों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार २३ अक्टूबर २०१७ को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

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