Wednesday, November 2, 2016

दीवाली कैसे मनाएं ताकि प्रदुषण से बच पाएं ---


पिछले एक सप्ताह से हम दीवाली पर ही लिखे जा रहे हैं। बेशक दीवाली एक ऐसा हर्ष उल्लास का पर्व है जिसे छोटे बड़े , गरीब अमीर और हर जाति और धर्म के लोग बड़े शौक और चाव से मनाते हैं। दशहरा से लेकर दीवाली तक बाज़ारों की रौनक , घरों की साफ़ सफाई और लोगों का आपस में मिलना और मिलकर उपहारों का आदान प्रदान जीवन में एक नया उत्साह और स्फूर्ति भर देता है।
दीवाली पर सारा जहाँ रौशन हो जाता है और बहुत खूबसूरत लगता है , भले ही बिजली की लड़ियाँ चाइनीज ही क्यों न हों। आखिर रात भर रंग बिरंगी लाइट्स की रिम झिम देखते ही बनती है। दीये और मोमबत्ती तो पल दो पल की रौशनी देते हैं , फिर अमावस्य का घनघोर अंधकार। इसलिए बिजली से चलने वाली विद्युत शमा से रौशन जहान एक रात के लिए तो ज़न्नत सा ही लगने लगता है।
लेकिन कुछ सही नहीं है तो वो है पटाखों और बमों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदुषण। सब कुछ जानते हुए भी पढ़े लिखे लोग भी स्वार्थ के वशीभूत होकर भावनाओं में बहकर अच्छे बुरे के ज्ञान को भूल जाते हैं और इस धरा को विष धरा बनाने पर तुल जाते हैं। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि दशहरा की तरह हम दीवाली की आतिशबाज़ी भी निर्दिष्ट स्थान पर सामूहिक रूप से मनाएं। साथ ही इन सभी स्थलों पर बड़े बड़े एयर प्यूरीफायर लगा दें जिससे कि सारा प्रदुषण साथ साथ ही ख़त्म किया जा सके। इस तरह कम लागत में दीवाली पर शारीरिक और मानसिक दीवाला निकलने से बच पाएंगे हम।


2 comments:

  1. ये एक अच्छा सुझाव है ... विदेशों में कई जगह ऐसे प्रावधान हैं ... और ये सिर्फ दिवाली नहीं हर त्यौहार पे होना चाहिए ...

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