Friday, November 4, 2016

क्या सल्फास की बिक्री पर कोई नियंत्रण होना चाहिए ?


सल्फास ( celphos ) पॉइज़निंग :

एलुमिनियम फास्फाइड अनाज को कीड़ों और चूहों से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।  लेकिन यह आत्महत्या करने का सबसे सस्ता और आसान तरीका भी है। इसका कारण हैं आसानी से इसकी उपलब्धता।  शायद यही एक ऐसा ज़हर है जिसके लिए आपको न किसी डॉक्टर की प्रेस्क्रिप्शन चाहिए , न कोई लाइसेंस। गांवों में किसानों द्वारा सब घरों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। बस यही सत्य विनाश का कारण भी बनता है।

सल्फास की गोलियां खाने के बाद यदि बहुत जल्दी मेडिकल उपचार नहीं मिला तो रोगी का बचना लगभग असंभव होता है। इसका एक कारण यह भी है कि इसका कोई एंटीडोट नहीं होता।  यानि ज़हर उतारने की कोई दवा नहीं होती। ऐसे रोगी को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना चाहिए जहाँ उसका गैस्ट्रिक लेवाज ( पेट की सफाई ) कर ज़हर को बाहर निकाल दिया जाता है, तभी बचने की सम्भावना होती है।  यदि १-२ घंटे की देरी हो गई तो रोगी भी गया ही समझो।

ऐसे रोगी की साँस और मुँह से एक बड़ी अज़ीब और गन्दी सी दुर्गन्ध आती है जिसे न सिर्फ सहन करना मुश्किल होता है , बल्कि दूसरों को भी प्रभावित कर सकती है।  यह सल्फास के द्रव से मिलने से उत्पन्न हुई फ़ॉस्फ़ीन गैस के कारण होता है जो ज़हर का काम करती है।  इसलिए ऐसे रोगियों को हेंडल करते हुए भी सावधान रहना चाहिए , विशेषकर कपड़ों पर लगा ज़हर भी आपको प्रभावित कर सकता है।

क्या सल्फास की बिक्री पर कोई नियंत्रण होना चाहिए ?


3 comments:

  1. न बेचने वाले और नहीं जनता कहाँ मानती हैं . जो वस्तु प्रतिबंधित की जाती है उसे जुगाड़ करने में माहिर होते हैं लोग ... बड़ा मुश्किल है
    हम भी पहले गेहूं में सल्फास डालते थे लेकिन अब यह आसानी नहीं मिलता इसलिए अब गेहूं और दाल आदि में आयुर्वेदिक दवा इस्तेमाल करते हैं

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "ह्यूमन कंप्यूटर' = भारतीय गणितज्ञ स्व॰ शकुंतला देवी जी “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बहुत ही उम्दा .... बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति .... Thanks for sharing this!! :) :)

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