पिछली पोस्ट में हमने मानव प्रवृति के बारे में जाना । बेशक अधिकांश जनता राजसी प्रवृति की ही होती है क्योंकि सांसारिक लोग सात्विक बहुत कम हो पाते हैं और तामसी भी कम ही होते हैं ।
कहते हैं -जैसा खाओ अन्न, वैसा होवे मन । हम डॉक्टर्स कहते हैं --जैसा खाओ अन्न , वैसा होवे मन और तन ।
कहते हैं -जैसा खाओ अन्न, वैसा होवे मन । हम डॉक्टर्स कहते हैं --जैसा खाओ अन्न , वैसा होवे मन और तन ।
अब देखिये भोजन का तन पर प्रभाव :
सात्विक भोजन --निरोगी काया । तन में ताकत , मन में शांति ।
राजसी भोजन ---राजसी ( शाही ) रोग ।
चाट ,पकोड़े , समोसा आदि तीखे पदार्थ खाने से एसिडिटी , अल्सर आदि रोग होने का डर रहता है ।
फैटी फूड्स --- जंक फूड्स---और हाई कैलरीज फूड्स जैसे बटर चिकन --मोटापा , डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रोल , बी पी , हार्ट अटैक ।
तामसी भोजन --तुच्छ रोग , मौत का साया । अपवित्र भोजन से संक्रमण हो सकता है, जो जान लेवा भी हो सकता है ।
अब ज़रा सोचिये आप गोल गप्पे खाते हुए सी सी कर रहे है , फिर भी एक के बाद एक गोल गप्पे गपे जा रहे हैं । कभी सोचा है , गोल गप्पे वाला आपको कैसे खिलाता है गोल गप्पे । जी हाँ , नंगे हाथ से , पानी में हाथ घोलकर , खिलाता है वो । उसी हाथ से सारी साफ सफाई भी करता रहता है , अपने शरीर की भी , आपकी ही आँखों के आगे । ज़रा सोचिये , क्या उसने नाखून काटे हैं ? आखिर हाइजीन का कितना पता होगा उसे ?
इसी तरह , घर में नौकरानी आपको रोटी बनाकर खिला तो देती है , लेकिन क्या आपने उसको पाठ पढाया है हाइजीन का ?
अज़ी उनकी छोडिये , कृपया अपने ही नाखून देखिये --कहीं बढे हुए तो नहीं है न ।
व्यक्तिगत स्वच्छता में हाथ धोने का बड़ा महत्त्व है ।
आइये देखते हैं कब हाथ धोना अति आवश्यक होता है ---
खाना खाने से पहले ।
टॉयलेट या यूरिनल जाने के बाद ।
किसी रोगी की देखभाल करने के बाद ।
बाहर से आने के बाद ।
मूंह पोंछने के बाद ।
हाथ गंदे होने पर ।
हाथ धोने का सही तरीका :
हमेशा साबुन या एंटीसेप्टिक घोल का इस्तेमाल करें ।
पानी और साबुन लगाकर हाथों को ६ दिशाओं में रगड़ना चाहिए ।
१) हथेलियों पर ।
२) डोर्सम ऑफ़ हैंड्स --यानि हाथ के पिछले हिस्से पर ।
३) वेब्स --उँगलियों के बीच में रगड़ें ।
४) फिंगर टिप्स --उँगलियों के पोरों पर ।
५) अंगूठे के चारों ओर ।
६) दोनों हाथो को घुमाते हुए , सारे हाथ को एक साथ ।
इस तरह हाथ साफ करने से हाथों पर मौजूद कीटाणुओं को काफी कम किया जा सकता है । इससे ओरोफीकल रूट से होने वाली बीमारियों से निजात पाई जा सकती है ।
लेकिन क्या आपको पता है --गोल गप्पे खाने से , साफ पानी न पीने से , साफ सफाई न रखने से --आपको क्या क्या बीमारियाँ हो सकती है ?
अगली पोस्ट में इसी बारे में जानेंगे , हम लोग ।
नोट : यह पोस्ट श्री चंदर कुमार सोनी की फरमाइश पर लिखी गई है । आशा है , आप सभी लाभान्वित होंगे ।
पानी और साबुन लगाकर हाथों को ६ दिशाओं में रगड़ना चाहिए ।
१) हथेलियों पर ।
२) डोर्सम ऑफ़ हैंड्स --यानि हाथ के पिछले हिस्से पर ।
३) वेब्स --उँगलियों के बीच में रगड़ें ।
४) फिंगर टिप्स --उँगलियों के पोरों पर ।
५) अंगूठे के चारों ओर ।
६) दोनों हाथो को घुमाते हुए , सारे हाथ को एक साथ ।
इस तरह हाथ साफ करने से हाथों पर मौजूद कीटाणुओं को काफी कम किया जा सकता है । इससे ओरोफीकल रूट से होने वाली बीमारियों से निजात पाई जा सकती है ।
लेकिन क्या आपको पता है --गोल गप्पे खाने से , साफ पानी न पीने से , साफ सफाई न रखने से --आपको क्या क्या बीमारियाँ हो सकती है ?
अगली पोस्ट में इसी बारे में जानेंगे , हम लोग ।
नोट : यह पोस्ट श्री चंदर कुमार सोनी की फरमाइश पर लिखी गई है । आशा है , आप सभी लाभान्वित होंगे ।

