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Friday, April 9, 2021

कोरोना से जंग --

चेहरा मास्क से ढका हुआ ,  

मास्क के ऊपर से झांकती दो आँखें, 

आँखों में अक्सर 

दिखती है एक बेबसी।  

बाकि त्योरियों से भरा मस्तक।  

आजकल इंसान की 

बस यही पहचान रह गई है। 


वो दिखता नहीं है , 

न ही कार्बन मोनोऑक्साइड की तरह, 

उसमे कोई गंध है न रंग।  

एक अदृश्य दुश्मन की तरह, 

घात लगाकर करता है आक्रमण। 

एक अणु ने परमाणु शक्ति को भी , 

शक्तिविहीन बना दिया है।  


नादाँ सभी जानते तो हैं , 

किन्तु मानते नहीं।  

इस सूक्षम शत्रु से लड़ने के 

तौर तरीके।  

शत्रु जो सीमा पार से नहीं, 

न ही देश के जंगलों से आता है।  

वो रहता है आपके ही हाथों में, 

गले लगने को तत्पर, 

गले लगा तो गले पड़ने को तैयार।  


माना कि जिंदगी आजकल अधूरी है, 

परन्तु जो है तो  , 

कभी पूरी भी होगी। 

बस संयम और संतुलन चाहिए,

टैस्ट, रैस्ट और वैक्स 

तीनों मिलकर लगाएंगे बेडा पार।  

 

2 comments:

  1. कोरोना से लड़ने की सटीक सीख ... लेकिन लोग मानते नहीं हैं ...जानते तो सब हैं ...

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (11-04-2021) को   "आदमी के डसे का नही मन्त्र है"  (चर्चा अंक-4033)    पर भी होगी। 
    -- 
    सत्य कहूँ तो हम चर्चाकार भी बहुत उदार होते हैं। उनकी पोस्ट का लिंक भी चर्चा में ले लेते हैं, जो कभी चर्चामंच पर झाँकने भी नहीं आते हैं। कमेंट करना तो बहुत दूर की बात है उनके लिए। लेकिन फिर भी उनके लिए तो धन्यवाद बनता ही है निस्वार्थभाव से चर्चा मंच पर टिप्पी करते हैं।
    --  
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।    
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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