Monday, April 22, 2019

घुमक्कड़ी और स्वास्थ्य --





एक ज़माना था जब नव विवाहित जोड़े पहली बार शादी के बाद हनीमून के बहाने घर से बाहर जाते थे और अक्सर वही उनकी आखिरी सैर होती थी क्योंकि उसके बाद जीवन यापन में इस कद्र व्यस्त हो जाते थे कि घूमने जाने के लिए न समय होता था और न ही संसाधन। उधर गांवों में तो हनीमून कोई जानता ही नहीं था।  उनका आवागमन तो मायके और ससुराल तक ही सीमित होता था।  लेकिन समय के साथ समय बदला,, सम्पन्नता बढ़ी और अब हमारे यहाँ भी युवा वर्ग पर्यटन में दिलचस्पी लेने लगा। अब यहाँ भी विदेशियों की तरह बहुत से लोग समय मिलते ही निकल पड़ते हैं देश विदेश की सैर पर। 

लेकिन ज़ाहिर है कि दूर दराज के क्षेत्र में सैर पर जाने के लिए आवश्यक है कि आप यात्रा करने में सक्षम हों। यानि आपका स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है , तभी आप यात्रा का पूर्ण आनंद ले पाएंगे।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार स्वस्थ होना महज़ रोगो का न होना नहीं है , अपितु आपका "शारीरिक , मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक" तौर पर सक्षम होना है। जब तक सभी मापदंड पर आप खरे नहीं उतरते , तब तक न आप पूर्ण स्वस्थ हैं और न ही आप यात्रा करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हैं।

अब प्रश्न यह उठता है कि इन पांच मापदंडों में से सबसे अहम और आवश्यक मापदंड क्या है।

शारीरिक : बेशक शारीरिक रूप से सक्षम होना बहुत आवश्यक है। लेकिन बहुत से लोग कई रोगों से पीड़ित होने के बावजूद यात्रा करने में सक्षम रहते हैं। यहाँ तक कि जो लोग अपाहिज होने के कारण चल नहीं पाते, वे भी परिवार के लोगों की सहायता से यात्रा करने में सफल रहते हैं। हमारे एक मित्र डायबिटीज से पीड़ित हैं , रोज दिन में तीन बार इन्सुलिन के इंजेक्शन लगाते हैं, फिर भी ७० वर्ष के आयु में विदेशों की सैर कर रहे हैं। ज़ाहिर है, शारीरिक परिसीमा उनके आड़े नहीं आती। 

आर्थिक:  पर्यटन के लिए निश्चित ही एक न्यूनतम धन राशि चाहिए।  लेकिन अधिकांश पर्यटक बजट टूरिस्ट होते हैं, यानि वे कम से कम खर्चे में घूमना कर लेते हैं। सैर पर जाने के लिए दिलचस्पी और इच्छा शक्ति चाहिए , बाहरी दुनिया देखने के लिए। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो ५ सितारा होटलों में रहकर देश विदेश भ्रमण करते हैं। ट्रैकिंग का शौक रखने वाले न्यूनतम राशि में दो से तीन सप्ताह पर्वतों की वादियों में सुखद समय व्यतीत कर पाते हैं। ज़ाहिर है, पर्यटन के लिए पैसा तो चाहिए लेकिन हर तरह के बजट के लिए विकल्प मौजूद होते हैं। 

सामाजिक : विदेशी सैलानी अक्सर अकेले यात्रा पर निकल पड़ते हैं।  इससे वे स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद की घुमाई कर पाते हैं। हमारे देश में पति पत्नी बच्चों समेत घूमने की रिवाज़ ज्यादा है।  बच्चे बड़े हो जाएँ तो पति पत्नी दोनों यात्रा पर निकल पड़ते हैं। लेकिन यदि साथ में एक और युगल हो तो निश्चित ही घूमने का मज़ा दुगना हो जाता है।  लेकिन इसके लिए आवशयक है कि मित्र युगल भी समान विचारों और पसंद वाला हो।  वरना घर से बाहर निकलकर तो पति पत्नी भी ज्यादा दिन तक बिना लड़े झगड़े नहीं रह पाते।  आखिर, सबकी पसंद नापसंद अलग अलग होती है।  इसलिए समायोजन बहुत आवश्यक है। 

आध्यात्मिक : विश्व भर में बहुत से पर्यटन स्थलों पर मंदिर , मस्जिद, गुरूद्वारे या चर्च यात्रा कार्यक्रम में शामिल होते हैं।  बिना श्रद्धा के इन स्थानों पर आप असहज महसूस कर सकते हैं।  लेकिन यदि श्रद्धा न भी तो आप वास्तु और शिल्प सौंदर्य देखकर भी लाभान्वित हो सकते हैं।  ज़ाहिर है, इन स्थानों पर जाने के लिए आपका आध्यात्मिक रूप से सम्पूर्ण होना आवश्यक नहीं है। 

मानसिक :  अपने ४२ वर्ष के घुमक्कड़ी के अनुभव से हमने यह जाना और पहचाना है कि पर्यटन के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक और अपरिहार्य है। जो लोग मानसिक रोग से त्रस्त होते हैं, वे तो दुर्भाग्यवश असक्षम होते ही हैं, अन्यथा स्वस्थ लोग भी यदि मानसिक रूप से व्याकुल या व्यथित हों तो पर्यटन एक बोझ सा बन सकता है। किसी बात की चिंता, तनाव या डर आपके मूड को इस तरह प्रभावित करता है कि आप न स्वयं बल्कि दूसरों को भी यात्रा का आनंद उठाने में बाधा साबित हो सकते हैं। घर से बाहर निकलकर कई बार अप्रत्यासित रूप से बाधाएं और मुसीबतें आ जाती हैं जिनसे निपटने के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है।   

निष्कर्ष : यह निकलता है कि एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही यात्रा का संपूर्ण आनंद ले सकता है।  कोई भी कमी या बाधा आपके आनंद में विघ्न डाल सकती है।  लेकिन जहाँ बाकि सभी बाधाएं पार की जा सकती हैं  वहीँ मानसिक अस्वस्थता सदा आपके लिए एक नासूर बनाकर रंग में भंग डाल सकती है।  इसलिए जब भी किसी यात्रा पर जाएँ तो मानसिक रूप से नियंत्रित रहकर यात्रा करें ताकि आप यात्रा का सम्पूर्ण आनंद ले सकें।     


7 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 22/04/2019 की बुलेटिन, " टूथ ब्रश की रिटायरमेंट - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. सार्थक और उपयोगी आलेख
    आभार

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  3. बहुत सही ..घूमने के लिये इच्छा शक्ति का प्रबल होना सर्वाधिक आवश्यक है . शेष भी हैं लेकिन इसके पीछे .

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  4. जी आपने सही कहा कि घूमने के लिए इच्छा शक्ति और मानसिक रूप से स्वस्थ होना सबसे जरूरी होता है। वैसे कहा भी गया है कि ब्यूटी लाइज इन द आईज ऑफ़ बेहोल्डर।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (24-04-2019) को "किताबें झाँकती हैं" (चर्चा अंक-3315) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    पुस्तक दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. डॉक्टर साहब स्वयम एक घुमक्कड़ी रहे हैं और चिरयुवा भी. अवकाशप्राप्ति के बाद भी आप-युगल यात्राओं का आनंद लेते रहते हैं, ऐसे में आपकी सीख बिल्कुल विचारणीय है! आभार डॉक्टर साहब!!

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  7. पर्यटन पर केन्द्रित और सुन्दर तस्वीरों से सुसज्जित बेहतरीन आलेख । आभार

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