Wednesday, October 17, 2018

मी टू --

जिस तरह ''मी टू'' अभियान के अंतर्गत एक के बाद एक आरोप लगाए जा रहे हैं, यह कोई हैरानी की बात नहीं बल्कि एक ऐसी हकीकत है जो ''टिप ऑफ़ द आइसबर्ग'' की तरह है। समाज में यौन शोषण केवल बच्चियों और महिलाओं का ही नहीं होता बल्कि लड़कों का भी होता आया है। ऐसा पाया गया है कि १८ साल की उम्र तक १५-२० % लड़के यौन शोषण का शिकार हो चुके होते हैं।  एक सर्वेक्षण के अनुसार ३०% बच्चों के यौन शोषण में जान पहचान वाले या रिश्तेदारों का ही हाथ होता है। निसंदेह इसे रोकने के लिए इस विषय को उजागर करना अत्यंत आवश्यक है।

अब सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौनाचार पर रोक लगाने के लिए आवश्यक अधिनियम लागु किया हुआ है जिसके अंतर्गत कोई भी महिला अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में गठित समिति से शिकायत कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई करा सकती है। लेकिन निजी क्षेत्र में विशेषकर सिनेमा जैसे आकर्षक व्यवसाय में महिलाओं की सुरक्षा के कोई पुख्ता उपाय न होने और कलाकारों का व्यक्तिगत रूप से निर्देशक आदि पर निर्भर होने के कारण महिला कलाकारों का यौन शोषण सदा ही होता आया है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हालाँकि ताली एक हाथ से नहीं बजती और अक्सर कहीं न कहीं महिलाएं भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।  लेकिन समाज में महिलाओं की सुरक्षा का उत्तरदायित्त्व सभी पर है और कर्तव्य भी है। इस दिशा में कानून को भी सख्ताई से पेश आना चाहिए।         

1 comment:

  1. एक लम्बे अंतराल के बाद की गई शिकायत पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है और जुर्म को कैसे साबित किया जा सकता है , यह एक पेचीदा सवाल है जिसका जवाब कोई वकील ही दे सकता है।

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