Sunday, June 26, 2016

दिल्ली से कटरा रेल यात्रा -- एक संस्मरण।


तीन दिन और चार रातें घर से बाहर बिताकर आज घर वापस लौट आये। इन तीन दिनों में रेल यात्रा , हेलीकॉप्टर यात्रा , तीर्थ यात्रा , टैक्सी यात्रा , पहाड़ों की यात्रा और भारत पाकिस्तान बॉर्डर की यात्रा कर डाली। बेशक यदि दो तीन दिन के लिए भी घर छोड़कर निकल जाओ तो यह बहुत रिफ्रेशिंग होता है।

दिल्ली से सीधे कटरा के लिए ट्रेन सर्विस शुरू होने से यात्रा करने वालों के लिए बहुत सुविधा हो गई है। श्री शक्ति एक्सप्रैस ट्रेन दिल्ली से शाम को साढ़े पांच बजे चलकर सुबह पांच बजे कटरा स्टेशन पहुँच जाती है।  ट्रेन के चलने से ठीक पहले हलकी हलकी बारिश शुरू हो गई।  इससे पहले मौसम बहुत ही उमस भरा था। लेकिन ट्रेन में शायद ऐ सी  ऑन नहीं था जिसके कारण बैठना दुश्वार सा लग  रहा था।  ट्रेन के आधे घंटे चलने के बाद कहीं जाकर ऐ सी इफेक्टिव लगने लगा।  इस ट्रेन में एक बात बड़ी अच्छी लगी कि खाने पीने के लिए बहुत सामान उपलब्ध था।  हर दो मिनट बाद कोई न कोई खाने का सामान लेकर उपस्थित हो जाता था।  वरना एक समय था जब स्टेशन पर दौड़कर सामान लाना पड़ता था।


कटरा रेलवे स्टेशन -- ग्रेनाइट टाईल्स का फर्श , स्टेशन पर कोई खोमचे वाला नहीं , रात में जलती लाइट्स बहुत खूबसूसरत लग रही थीं।


पृष्ठ भूमि में पहाड़ और बादलों का संगम एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।



आई आर सी टी सी द्वारा बनाया गया विश्राम गृह बहुत भव्य बनाया गया है।  एस्केलेटर और लिफ्ट की सुविधा होने से यात्रियों को सामान ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होती।


भवन का डिजाइन भी बहुत खूबसूरत है।  उस पर ऊपर छाये बादल मन को हर्षित कर रहे थे।
कटरा रेलवे स्टेशन नया होने से बहुत सुन्दर बनाया गया है।  यात्रियों के लिए ठहरने , आराम करने और नहाने धोने के लिए IRCTC ने स्टेशन पर ही आराम गृह बनाया है जिसमे सभी सुविधाएँ दी गई हैं।  यह अलग बात है कि यहाँ भी आम और खास में अंतर रखा गया है। द्वार से घुसते ही फर्श पर सैकड़ो की तादाद में यात्री लेटे हुए मिले जिनके बीच से मुश्किल से रास्ता बनाते  हुए  किसी तरह सीढ़ियों तक पहुंचे।





प्रथम तल पर सभी सुविधाओं से सुसज्जित वी आई पी रैस्टहाउस बहुत आरामदायक है। हालाँकि पानी की किल्लत यहाँ भी है। टी वी , फ्रिज , ऐ सी , डाइनिंग टेबल , सोफे आदि से लैस सुइट में करीने से सजाए गए डबल बेड पर लेटकर फ़ौरन नींद आ जाये तो कोई हैरानी की बात नहीं।  लेकिन यहाँ एक दो घंटे आराम कर और नहा धोकर यात्री निकल पड़ते हैं अपने गंतव्य की ओर अपनी अपनी सुविधानुसार। क्रमशः ---  


4 comments:

  1. वाह ... मज़ा आ गया आपका यात्रा विवरण पढने के बाद .... कई बात जाना होता है माता के पर अब लगता है यात्रा आनद दायक होगी इस ट्रेन द्वारा ...

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (28-06-2016) को "भूत, वर्तमान और भविष्य" (चर्चा अंक-2386) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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