Sunday, January 18, 2015

दातों मे पीड़ा , कीड़ा या केरीज --


बहुत वर्ष पहले की बात है ! बस  मे बैठे हम चंडीगढ़ की ओर जा रहे थे ! रास्ते मे एक स्टेंड पर एक सेल्समेन बस मे चढ़ा और बोलना शुरू हो गया अपनी विशेष आवाज़ मे ! भाईयो , बहनों , मेहरबान , कद्रदान , ज़रा सुनो लगा कर कान ! क्या आपके दांत मे दर्द रहता है ? दांत मे कीड़ा लगा है ? डाक्टर को दिखाया , कोई आराम नहीं आया ! अब घबराने की कोई ज़रूरत नहीं ! हमारे पास है एक नायाब नुश्खा , ये दवा की शीशी जिसकी एक बूंद लगाते ही आपके दांत का कीड़ा घुट कर मर जायेगा और आपका दर्द तुरंत गायब हो जायेगा ! ईलाज़ की गारंटी है , एक बार इस्तेमाल करके देखिये , आपको खुद ही विश्वास हो जायेगा ! 
इसके बाद उसने कहा -- आप मे से किसी के दांत मे दर्द रहता है ? एक साथ कई लोग बोल पड़े -- जी रहता है ! उसने एक आदमी को कहा -- मूँह खोलो ! आपके दांत मे कीड़ा लगा है ! अभी दवा की एक बूंद लगाता हूँ , फिर असर देखिये ! फिर उसने शीशी खोलकर माचिस की एक तिल्ली उसमे डुबोई और उस व्यक्ति के दांत पर लगा दी ! दो तीन मिनट के बाद उसने फिर उसका मूँह खुलवाकर उसी तिल्ली को मूँह मे घुमाया और सबको दिखाते हुए बोला -- लीजिये ज़नाब , कीड़ा मर गया और ये रहा ! तिल्ली की नोक पर एक तिनका सा लगा दिखाई दे रहा था ! उसने बड़ी शान से कहा -- ये है हमारी जादुई दवा , लगाते ही असर करती है ! लेकिन इसकी कीमत सुनकर आप हैरान हो जायेंगे -- कीमत ५० नहीं , २० नहीं , दस भी नहीं , कीमत है मात्र ५ रुपये ! जी हाँ , केवल और केवल ५ रुपये मे आपके दांत का दर्द खत्म ! 
फिर देखते ही देखते उसकी दसियों शीशियाँ बिक गई ! फिर जैसे ही बस चलने को हुई , उसने अपना थैला संभाला और बस से नीचे उतर गया ! और हम डॉक्टर होकर सोचते ही रह गए कि कितना आसान है पब्लिक को बेवकूफ़ बनाना ! 

वास्तव मे दांत का कीड़ा कोई कीड़ा नहीं होता ! इसे डेंटल केरिज कहते हैं जिसमे दांत का सुरक्षा कवच जिसे एनेमल कहते हैं , उसमे ब्रेक हो जाता है ! इसका कारण होता है दांतों के बीच फंसे खाने के कण जिन पर बेक्टीरिया के प्रभाव से अम्ल पैदा होता है जो एनेमल को ब्रेक कर देता है ! ऐसा तभी होता है जब हम अपने मूँह को साफ नहीं रखते , विशेषकर खाने के बाद ! इसलिये मूँह को साफ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ! 

अक्सर शहर मे लोग सुबह ब्रश तो करते हैं , कुछ लोग सुबह शाम दोनो वक्त भी करते हैं , लेकिन खाने के बाद बस एक घूँट पानी पीकर ही काम चला लेते हैं ! ऐसा करने से मूँह मे दांतों के बीच खाना रह जाता है जो मूँह मे मौजूद बेक्टीरिया के रिएक्शन से सड़ने लगता है ! इसे ना सिर्फ मूँह मे दुर्गन्ध होने लगती है , बल्कि लम्बे समय तक ऐसा होने से डेंटल एनेमल भी गलने लगती है ! इससे दांत का भीतरी हिस्सा जिसे पॅल्प कहते हैं , एक्सपोज हो जाता है जिससे दांत मे दर्द रहने लगता है ! धीरे धीरे दांत बिल्कुल खाली हो जाता है जिसे आम बोलचाल की  भाषा मे कीड़ा लगना कहते हैं !

जिस तरह खाना खाने से पहले हाथ धोना आवश्यक होता है , उसी तरह खाने के बाद कुल्ला करना आवश्यक होता है ! लेकिन कुल्ला करना अनपढ़ और गांव के लोगों का काम माना जाता है ! खाने के बाद खाली एक घूँट पानी पीकर काम चलाने का ही नतीज़ा होता है कि पढ़े लिखे शहरी लोगों के दांतों मे भी डेंटल केरिज हो जाती है ! इसीलिये मूँह से भी अक्सर दुर्गन्ध आती है ! 
ज़रा सोचिये , फैशन आवश्यक है या स्वास्थ्य ! 


11 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (19-01-2015) को ""आसमान में यदि घर होता..." (चर्चा - 1863) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत बढ़िया जानकारी प्रस्तुति हेतु आभार!
    निश्चित ही फैशन से ज्यादा आवश्यक है स्वास्थ्य ..

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  3. बहुत बढ़िया जानकारी ....

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  4. बात तो पते की कही है आपने ... बड़े बुजुर्ग अक्सर यही करते थे और उनके दांत लम्बे चलते थे ...
    काम की जानकारी और मुफ्त में दांतों की देखभाल ...

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    1. लेकिन सुबह शाम ब्रश भी ज़रूरी है !

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  5. हम्म बड़ा दुःख देता है यह कीड़ा और फिर डेंटिस्ट की फीस उससे भी ज्यादा :)

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  6. बढ़िया जानकारी..........आभार........

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