Thursday, May 28, 2009

एक प्रयास

आबादी की रेस में, देश ये सरपटभागे
होंगे हम पच्चीस में, चीन से भी आगे।

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे, भक्तजन शीश नवायें
antarman में झांकिए, आत्मबोध हो जाये।

स्वार्थ में सब डूबकर, मांगे मन की मुराद
मैं maangu संसार में, सुख शान्ति का प्रसाद।

मेरा मेरा सब कहें, तेरा कहे न काय
तेरा मेरा व्यर्थ है, सब यहीं रह जाय।

ख़ुशी बांटना औरों में, है सर्वोत्तम दान
होठों पे मुस्कान हो, तो हर मुश्किल आसान।

बीते दुखों को भूलिए, सफल हों सब काज
बीते दिनों की याद में, व्यर्थ करो न आज ।

3 comments:

  1. bhav bhavna aur kamna k abhinav tirange se ap yonhi bharteeyata ka balki samoochi maanavta ka gaurav badhaate hue aage badhte rahen.. aapki lekhni achha parinam degi,aisa mera vishwas hai
    wish you all the best
    -albela khatri

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  2. ख़ुशी बांटना औरों में, है सर्वोत्तम दान
    होठों पे मुस्कान हो, तो हर मुश्किल आसान।

    -बढ़िया.

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  3. बढ़िया...सीख देती रचना

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