Friday, August 4, 2017

पत्नी पर लिखी हास्य कविता पत्नी को कभी न सुनाएँ ---



एक दिन एक महिला ने फ़रमाया ,
आप पत्नी पर हास्य कविता क्यों नहीं सुनाते हैं !
हमने कहा , हम लिखते तो हैं , पर सुनाने से घबराते हैं।
एक बार पत्नी पर लिखी कविता पत्नी को सुनाई थी ,
गलती ये थी कि अपनी को सुनाई थी।
उस दिन ऐसी भयंकर मुसीबत आई,
कि हमें घर छोड़कर जाना पड़ा ,
और रात का खाना खुद ही बनाना पड़ा।
अब हम पत्नी विषय पर कविता तो लिखते हैं ,
लेकिन खुद की नहीं ,
दूसरों की पत्नियों को ही सुनाते हैं।
तभी सकूंन से सुबह शाम दो रोटी खा पाते हैं।


8 comments:

  1. अब हम पत्नी विषय पर कविता तो लिखते हैं ,
    लेकिन खुद की नहीं ,
    दूसरों की पत्नियों को ही सुनाते हैं।
    तभी सकूंन से सुबह शाम दो रोटी खा पाते हैं।

    बात तो तब होती जब दूसरों की पत्नियां कविता सुनकर खाना भी खिला देती?
    just like..

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    2. आप तो घर से भी निकलवाने का इंतज़ाम करा रही हैं...

      जय हिन्द...जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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    3. हा हा हा। सही कहा खुशदीप। वैसे खाना तो हम ही बनाकर दूसरों को खिला सकते हैं। :)

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस : किशोर कुमार और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (06-08-2017) को "जीवन में है मित्रता, पावन और पवित्र" (चर्चा अंक 2688 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत शातिर हैं आप.

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