Monday, September 28, 2015

वर्ल्ड रेबीज डे ...


आज वर्ल्ड रेबीज डे है।  क्या आप जानते हैं :

* रेबीज एक १०० % फेटल रोग है।  यानि यदि रेबीज हो गई तो मृत्यु निश्चित है।

* लेकिन यह १०० % प्रिवेंटेबल भी है।  यानि इससे पूर्णतया बचा जा सकता है।

* इसका बचाव भी बहुत आसान है। अब पेट में १४ दर्दनाक ठीके नहीं लगाये जाते।

* कुत्ते या बिल्ली आदि के काटने पर महज घाव को बहते पानी और साबुन से १० मिनट तक धोते रहिये। फिर कोई भी एंटीसेप्टिक लगा दीजिये।  पट्टी बिलकुल मत बांधिए ।  

* उसके बाद बस डॉक्टर की शरण में चले जाइये।  आपका काम हो गया।

Monday, September 14, 2015

एक मुक्तक ...


आज सिर्फ एक मुक्तक :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
इंसान के कर्म ही बनाते हैं इंसान को शैतान,
वर्ना बन्दे जन्म से तो मासूम हरेक होते हैं ।

अब देखें इसी का हास्य रूप :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
अच्छी सूरत देख कर झांसे में न आओ यारो ,
फेसबुक पर दिखते चेहरे अक्सर फेक होते हैं।  


Wednesday, September 2, 2015

कुछ साल पहले जब हम जवान थे ...


जिंदगी ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि एक अर्से से कोई हास्य कविता नहीं लिख पाए हम । अब फुर्सत मिली है तो प्रस्तुत है , अधेड़ उम्र के हालातों पर एक हास्य कविता :


कुछ साल पहले जब हम प्रमाणित जवान थे ,
सर पर रंगत थी बालों के लहराते खलिहान थे।
याद बहुत आता है वो गुजरा हुआ ज़माना ,
जब अपने घर में हम भी शाहरुख़ ख़ान थे।


सोचते हैं ग़र बालों पर हम भी लगा लें खिज़ाब,
फिर क्या लगा पाओगे , हमारी उम्र का हिसाब।
दिल तो करता है हम भी दें ज़ुल्फ़ों को झटका ,
पर अब सर पर बाल ही कितने बचे हैं ज़नाब।


हेयर ट्रांसप्लांट का कभी मन में बनता है प्लान ,
पर कीमत सुनकर ही  दिल हो जाता है हलकान।
दो बाल भी दिख जाएँ कंघी में तो कहती है पत्नी ,
लो कर दिया सुबह सुबह डेढ़ हज़ार का नुकसान।


इश्क़ और बुढ़ापे में नींद भी कहाँ आती है ,
दोनों में दिल की धड़कन बढ़ जाती है ।
कभी नींद में भी आते थे हसींन ख्वाब ,
अब कम्बख़्त नींद ही ख्वाब में आती है।


बाल ग़र सारे गिर जाएँ तो ग़म नहीं ,
नींद भले आये रातों में हरदम नहीं ।
मूंह में न रहें दांत भी तो मत समझो ,
कि इन चिकने मसूढ़ों में अब दम नहीं।


अंगारों पर राख हो तो आंच कम नहीं होती ,
बुढ़ापे में भी इश्क की आग कम नहीं होती।
मुँह में दांत और पेट में आंत नहीं तो क्या है ,
जीवन की भूख और प्यास कम नहीं होती।


उम्र एक नम्बर होती है , मगर जिंदगी नहीं ,
जिंदगी में खुश रहने पर कोई पाबन्दी नहीं।
हंसने हंसाने का ही दोस्तो नाम है जिंदगी ,
खुल कर हंसो , हंसने पर कोई पाबन्दी नहीं।


जो लोग हँसते हैं, वे अपना तनाव भगाते हैं , 
जो लोग हँसाते हैं, वे दूसरों के तनाव हटाते हैं।  
हँसाना भी एक परोपकारी काम है दुनिया में , 
चलो हास्य कवियों के लिए तालियां बजाते हैं।  


नोट :  इस रचना का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है।