Monday, May 18, 2015

हर इंसान एक छोटा मोटा साइकोलॉजिस्ट होता है ---


वैसे तो सायकॉलॉजी अपने आप में एक पूरा सब्जेक्ट है और एक  साइकोलॉजिस्ट ही ह्यूमन सायकॉलॉजी को बेहतर समझ सकता है।  लेकिन हमने देखा है कि आंशिक रूप से ह्यूमन सायकॉलॉजी को लगभग सभी इंसान समझते हैं।

कई साल पहले की बात है।  तब हम पास की मार्किट में एक नाई की दुकान पर जाकर बाल कटवाते थे। एक दिन बाल काटते काटते युवा नाई बोला -- सर मैंने रिसर्च करके एक बहुत ही बेहतरीन फॉर्मूला खोज निकाला है , बालों को मज़बूत करने का। इससे दो सप्ताह में ही आपके बाल आपकी मसल्स की तरह स्ट्रॉन्ग हो जायेंगे। अभी तक हम उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे , लेकिन उसकी यह बात सुनकर अचानक हमें एक अजीब सी ख़ुशी का अहसास हुआ।  आखिर अपनी तारीफ़ सुनना भला किसे अच्छा नहीं लगता।  अब हमने शीशे में झाँका और उसकी बात का आंकलन करने लगे।  ज़ाहिर था , उसकी कही बात असर दिखा रही थी क्योंकि अब हम थोड़ा और अकड़ कर बैठ गए थे।  खैर , उस दिन तो हमने बाल कटवाये और अगली बार सोचने का वादा किया।

अगले बार फिर उसने फिर अपने फॉर्मूले के बारे में याद दिलाया और कहा की एक बार ट्राई करके देखें।  इस बार भी किसी तरह हमने उसको टाला।  लेकिन जब तीसरी बार भी उसने पीछा नहीं छोड़ा तो हमने आखिर उसे बता ही दिया कि हम एक डॉक्टर हैं।

अब यह सुनते ही उसका चेहरा देखने जैसा हो गया।  वह रिसर्च और फॉर्मूला सब भूलकर अपनी पत्नी की बीमारी बताने लगा और मदद की गुहार करने लगा।
खैर हमने उसे जो भी सलाह देनी थी दी।  अंत में उसने स्वयं स्वीकारा कि सर क्या करें धंधा है , दो पैसे की आमदनी हो जाती है , लोगों को बहला फुसला कर।

 हम तो खैर जानते ही थे कि जिस तरह कमान से निकला तीर और मुँह से निकली बात कभी वापस नहीं आते , उसी तरह सर के उड़े बाल भी कभी वापस नहीं आते।

11 comments:

  1. एकदम सटीक विवेचन ह्यूमन साइकोलोजी का, नाई कुछ ज्यादा ही एक्सपेर्ट होते है , एक नाई तो बगल वाली कुर्सी वाले साहब को बता रहा था साहब आपके बाल 2 महीने के मेहमान है इनमे क्रीम न लगाया करें .....

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  2. उड़े हुए बाल तो नहीं ही आते वापस ... हाँ अगर ट्रांसप्लांट करवा लो तो पीछे से निकाल कर आगे जरूर लग जाते हैं ... कई लोग देखे हैं मैंने ...
    सटीक, उम्दा आंकलन है आपका ... हर कोई साइकोलोजिस्ट होता है ...

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ४२ साल की क़ैद से रिहाई - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. अच्छा हुआ बता दिया आपने - नहीं तो हम भी नाई से दवा खरीदनेवाले थे :)

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  5. सच है धंधे के लिए कुछ भी करते हैं लोग

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  6. हा हा :)
    वाह बढ़िया अवलोकन।

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  7. हा हा :)
    वाह बढ़िया अवलोकन।

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  8. पर दिल के खुश रखने को नाई की बात का ख्याल क्या बुरा है :)

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    1. पर वो ख्याल फ्री में नहीं था !

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  9. नाई की सायकॉलॉजी या लोगों की सायकॉलॉजी से खेल।

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