फुटपाथ पर बच्चों का सोना,
मंदिर में चढ़ावे का चांदी सोना,
और शादी से पहले गंजा होना,
आजकल बहुत रिस्की हो गए हैं।
प्रेम में पागल लड़की से शादी,
हनीमून के लिए पर्वतों की वादी,
और नीले ड्रम की बढ़ती आबादी,
आजकल बहुत रिस्की हो गए हैं।
बुढ़ापे में घर में अकेला होना,
रिटायर्ड शख्स के पास पैसा होना,
और फ्रॉड कॉल पर भरोसा होना,
आजकल बहुत रिस्की हो गए हैं।
सड़कों पर दौड़ती काली थार,
गुड़गांव के रईसजादों का व्यवहार,
और रोड़ रेज में तू तू मैं मैं के आसार,
आजकल बहुत रिस्की हो गए हैं।
*आजकल के दुखद समाचारों पर आधारित।


बदहवास हैरान और परेशान है आज हर एक संवेदनशील मन।
ReplyDeleteसमसामयिक पर सटीक ।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३० जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
धन्यवाद। 🙏
Deleteबेहतरीन रचना 🙏
ReplyDeleteवाह
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