जेब में रूमाल, हाथ में घड़ी, और
पैंट की बैक पॉकेट में पर्स नजर आए,
तो समझ जाओ कि बंदा हिंदुस्तानी है।
ऊंची बिल्डिंग को ऊंट की तरह सर उठाकर देखे,
और उंगली हिलाकर मंजिलें गिनता नजर आए,
तो समझ जाओ कि.... भाई
पार्किंग या सड़क पर खड़ी गाड़ी,
और काले शीशे देखते ही कंघी करने लग जाए,
तो समझ जाओ कि बंदा...
मौसम सुहाना हो खिली खिली सी धूप हो ,
और नई शर्ट पैंट बैल्ट पहनकर पार्क में घूमने जाए,
तो समझ जाओ कि.... बाऊ
मॉल में घूमते हुए हर चीज को ताके झांके,
और हर शख्स को घूरता नज़र आए
तो समझो कि....
जेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार कर रहा हो,
और बस या गाड़ी को आते हुए देखते ही रुक जाए,
तो समझ जाओ कि... पट्ठा
बस स्टेंड पर किसी के साथ खड़ा हो और
बस के आते ही चलो चलो बोलने लग जाए,
तो समझ जाओ...ये इंसान
किसी काउंटर पर लाइन लगी हो,
और बेझिझक सबसे आगे पहुंच जाए,
तो समझो कि....
हाथ में सेल्फी स्टिक लेकर वीडियो बनाए
और ओटवा को ओटावा बोलता नजर आए,
तो समझ जाओ ....
बंदा हिंदुस्तानी हो,
और सामने से बिना मुस्कराए अकड़ कर निकल जाए,
तो समझ जाओ कि बंदा पक्का हिंदुस्तानी है।


गजब - पक्का हिंदुस्तानी
ReplyDeleteसुन्दर
ReplyDeleteहा हा
ReplyDeleteवाह!! हिंदुस्तानियों की बड़ी अच्छी और सटीक पोल खोल दी है आपने
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteआप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।
ReplyDeleteआपने रोज़मर्रा की आदतों को इतना सटीक पकड़ा है कि हर पंक्ति में कोई न कोई अपना दिख जाता है। घड़ी, रूमाल, लाइन तोड़ना और बस आते ही “चलो-चलो” कहना, सब आँखों के सामने घूम जाता है। भाषा हल्की है और तंज़ बिलकुल सधा हुआ है।
ReplyDeleteशुक्रिया। 😊
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