Monday, January 30, 2017

प्रकृति सबसे बड़ा डॉक्टर है ---



चिकित्सा के क्षेत्र में अक्सर कहा जाता है -- we treat , he cures . यानि डॉक्टर्स का कहना होता है कि हम सिर्फ इलाज़ करते हैं , रोगी को ठीक तो वो ऊपरवाला ही करता है। यह सच है कि एक डॉक्टर केवल इलाज़ कर के एक सीमा तक ही स्वास्थ्य लाभ में रोगी की सहायता कर सकता है। इसलिए डॉक्टर भगवान नहीं होता। वह किसी को निश्चित अवधि के बाद सांसें नहीं दे सकता। यह सब कुछ प्रकृति या भगवान के हाथ में है।

लेकिन चिकित्सा के मामले में कई ऐसी स्थितियां और परिस्थितियां भी होती हैं जहाँ डॉक्टर उपचार करने का प्रयास कर सकता है और सफल भी हो जाता है।  परंतु यदि डॉक्टर द्वारा इलाज़ न भी किया जाये , तो भी प्रकृति स्वयं ही रोग को ठीक कर देती है। यह हमारे लिए प्रकृति की देन है।  आइये , जानते हैं ऐसी ही शारीरिक समस्याओं में बारे में जब बिना इलाज़ के भी हम ठीक हो सकते हैं :

१ )  दस्त या आंत्रशोध : दस्त यानि डायरिया एक ऐसा रोग है जो रोग न होकर आंत्र संक्रमण के विरुद्ध शरीर की एक प्रतिक्रिया है।  यानि जब भी आँतों में कोई बाहरी संक्रमण होता है तो हमारी आंतें उस संक्रमण को बाहर धकेल कर उससे छुटकारा पाने का प्रयास करती हैं।  इस प्रक्रिया में शरीर का कुछ पानी और साल्ट्स का ह्रास अवश्य होता है , जिसे हम डायरिया या दस्त कहते हैं।

दस्तों का न कोई उपचार है , न ही अक्सर कोई आवश्यकता होती है। संक्रमण निष्काषित होने पर यह स्वतः ही ठीक हो जाता है।  इसलिए दस्तों में दवा देने की कोई ज़रुरत नहीं होती।  केवल पानी और साल्ट की कमी को पूरा करने के लिए ORS की आवश्यकता होती है।

२ ) वायरल फीवर : वायरस के संक्रमण से होने वाला बुखार सेल्फ लिमिटिंग होता है।  यानि यह आम तौर पर १ से ७ दिन अपने आप ठीक हो जाता है।  इसलिए इसके इलाज़ में किसी विशेष दवा की आवश्यकता नहीं होती।

बस तापमान को कम रखने के लिए पैरासिटामोल की गोली ही काफी है।  

३ )  Chalazion : यह एक मेडिकल टर्म है।  यह वास्तव में आँखों की पलकों में एक गाँठ के रूप में दिखाई देती है। इसकी शुरुआत होती है पलक में मौजूद मीबोमिअन ग्लैंड ( तेल ग्रंथि ) में संक्रमण होने से।  अक्सर ऐसा आँखों पर गंदे हाथ लगने से होता है। शुरू में ग्रंथि में सूजन और तेज दर्द होता है।  इस अवस्था में एंटीबायोटिक्स से इसे ठीक किया जा सकता है।  लेकिन एक बार पुराना हो गया तो तेल ग्रंथि में रुकावट होने से एक गांठ बन जाती है जिसमे न दर्द होता है , न ही कोई और तक़लीफ़।  लेकिन देखने में भद्दी लगती है।  इसलिए रोगी डॉक्टर के पास जाता है।

अक्सर डॉक्टर इसका ऑप्रेशन करने की सलाह देते हैं। क्योंकि इस पर एंटीबायोटिक्स का कोई प्रभाव नहीं होता।

लेकिन इस दशा में किसी उपचार की ज़रुरत नहीं होती। बस साफ रुई को गर्म  पानी में डुबोकर दिन में कई बार इसकी सिकाई करें , कुछ ही दिनों में यह गांठ गायब हो जाएगी। बिलकुल चमत्कारिक ढंग से।

४ ) Ganglion  :  यह भी एक गांठ जैसी ही होती है जो अक्सर हाथ पर या हथेली के जोड़ के पास बन जाती है।  इसमें भी कोई दर्द नहीं होता।  न ही इससे कोई हानि होती है।  लेकिन देखने में भद्दी लगती है या कभी कभी चोट आदि लगने से परेशानी हो सकती है।

डॉक्टर इसके इलाज़ के लिए या तो सिरिंज से इसका पानी निकाल कर पट्टी बाँध देंगे या ऑप्रेशन द्वारा काट कर निकाल देंगे। अक्सर इसमें स्टीरॉयड्स का इंजेक्शन लगाकर भी इलाज़ किया जाता है।  लेकिन इन सबके बाद भी दोबारा होने की सम्भावना काफी ज्यादा रहती है।

लेकिन यदि इसमें कोई दर्द नहीं है और डॉक्टर ने इसे गैंगलिओन ही बताया है तो चिंता की कोई बात नहीं है।  क्योंकि अक्सर यह कुछ समय के बाद स्वयं ही पिघल जाती है और अचानक गायब हो जाती है।  प्रकृति का एक और चमत्कार।

५ )  मस्से ( warts ) : अक्सर हाथों पर या चेहरे पर बन जाते हैं। अक्सर इनमे कोई दर्द नहीं होता लेकिन देखने में भद्दे लगते हैं।  ये भी एक वायरल संक्रमण के कारण होते हैं।  

डॉक्टर इन्हें तरह तरह से ठीक करते हैं लेकिन यदि इलाज़ नहीं भी किया जाये तो कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं।  अक्सर पैर के तलवे में होने वाले वार्ट्स दर्द करते है और चलना मुश्किल कर देते हैं।  कई बार इनका ऑप्रेशन करना पड़ सकता है।

यदि दर्द नहीं है तो कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।  कुछ समय बाद ये स्वयं ठीक हो जायेंगे। पैर के तलवे में होने वाले वार्ट्स होमिओपैथी के इलाज़ से जल्दी ठीक हो जाते हैं।

इस तरह प्रकृति रोगों से स्वयं ही हमारा बचाव करती है।  लेकिन इसके लिए एक बार डॉक्टर से परामर्श कर यह सुनिश्चित अवश्य करा लें कि रोग का निदान सही है।  यदि निदान गलत हुआ तो बहुत हानि भी हो सकती है क्योंकि किसी भी रोग का इलाज़ यदि जल्दी किया जाये तो ठीक होने की सम्भावना ज्यादा रहती है।  इसलिए सेल्फ ट्रीटमेंट कभी नहीं करना करना चाहिए।  जो भी करें , डॉक्टर की देख रेख में ही करें ।  

Monday, January 9, 2017

नए साल की शुभकामनायें --

भाग १ :

गुजर गया एक और साल , जाते जाते कर गया क्या हाल।
कल तक जो मालामाल थे , वो एक पल में हो गए कंगाल।

नीले नोटों का रंग बदला , लोगों के जीने का ढंग बदला।
नींद उड़ गई अमीरों की , पर मौज करने लगा हर कंगला।

लोग रिक्शा छोड़ कतार में लग गए , पैसे के व्यापार में लग गए।
दिन भर खड़े रहे बैंक के सामने , फिर ठेके की कतार में लग गए।

मोदी ने नोटों का ऐसा दांव लगाया , पस्त हो गई ममता माया।
नर्म पड़ गए नितीश मुलायम , पर धरती हिली ना भूकंप आया।


पंजाब को सरे आम लूट गई भंग , सिद्धू का भाजपा से छूट गया संग ,
साल भर आप से लड़ते रहे नज़ीब , फिर खुद मैदान छोड़ गए जंग।

पठानकोट में चूक हो गई ज़रा सी , बड़ी दर्दनाक घटना थी उरी की।
किसी आतंकी को ना लगी फांसी , पर केजरी की ठीक हो गई खांसी।

विजेंद्र ने कईयों के घमंड किये चूर , हिंदी फिल्मों ने भी कमाया भरपूर।
पाकिस्तानी एक्टर्स तो भागे दुम दबा के , पर सैफीना को हो गया तैमूर।

रागा मोदी राग गाता रह गया ,  करण का यौवन आंसुओं में बह गया ,
अरबाज़ को छोड़ गई मलाईका , सलमान इस साल भी कुंवारा रह गया।

न्यू इयर पर होटलों को हुआ घाटा , कलाकारों ने अपना रेट आधा काटा ,
मिस्त्री की समझ ना आई मिस्ट्रि , क्यों टाटा ने सायरस को किया टाटा।  

आई एस आई एस की ज़ारी रही बर्बादी , अभी वश में नहीं आया बगदादी ,
पर अमेरिका ने हिला कर रख दिया , जब ट्रम्प ने हिलेरी की वाट लगा दी।

ऑलम्पिक्स में मैडल जीते कई रंग के , कुश्ती में साक्षी मलिक के बजे डंके ,
आमिर खान ने सहिष्णु होकर दिया नारा , म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के।

अभी भी जिन लोगों के चेहरे हैं उदास , सोचते हैं कि दिन तो पूरे हो गए पचास ,
उनको कहता हूँ, सोच बदलो, देश बदलेगा , मत सोचो मोदी जी फेल हुए या पास।

भाग २ :

कामना करता हूँ कि इस नए साल में सबके जीवन में :

हँसी के फुव्वारे हो , खुशी के गुब्बारे हो,

न आपसी विवाद हो, न कोई आतंकवाद हो !

और इस नए साल में मुक्ति मिले --

भूखों को भूख से ,घूसखोरों को घूस से ,

किसानो को कर्ज से , मरीजों को मर्ज से ,

गरीबों को कुपोषण से , शरीफों को शोषण से !

बाबुओं को फाइलों से, अस्पतालों को घायलों से ,

चुनाओं को फर्जी वोटों से , देश को नकली नोटों से !

और इस नए साल में , सलामत रहे--

बच्चों की मुस्कान, पंछियों की उड़ान,

फूलों के रंग, अपनों का संग,

बड़ों का दुलार, और भाई भाई का प्यार!

सलामत रहे--

देश की आज़ादी, वीरों के हौसले फौलादी,

लोकतंत्र में अटल विश्वास, और डिजिटल भारत की आस!

और कामना करता हूँ कि --

इस वर्ष ये नया साल , करदे दिलों का वो हाल,

कि ढह जायें सब मज़हब और नफरत की दीवारें,

और सर्व धर्म मिल कर पुकारें ,

मुबारक हो नया साल, सबको मुबारक हो नया साल!

जनता जब सुख चैन से सो पायेगी 
बेटियां भी जब सुरक्षित हो जाएँगी।    
इंसान में जब इंसानियत जाग जायेगी ,
नव वर्ष की कामना तभी शुभ हो पायेगी।